आंदोलन: बांग्ला की अनिवार्यता के खिलाफ मौन जुलूस, डुआर्स तक पहुंची भाषा विवाद की आंच

Updated at :09 Jun 2017 9:01 AM
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आंदोलन: बांग्ला की अनिवार्यता के खिलाफ मौन जुलूस, डुआर्स तक पहुंची भाषा विवाद की आंच

जलपाईगुड़ी: सभी स्कूलों में बांग्ला भाषा को अनिवार्य किये जाने संबंधी मुख्यमंत्री के बयान को लेकर डुआर्स में भी आंदोलन शुरू हो गया है. गुरुवार को गोजमुमो सदस्यों ने धूपगुड़ी बीडीओ को इस संबंध में एक ज्ञापन दिया. मोरचा का कहना है कि इससे पहाड़, तराई और डुआर्स के नेपाली और आदिवासी विद्यार्थियों को समस्या […]

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जलपाईगुड़ी: सभी स्कूलों में बांग्ला भाषा को अनिवार्य किये जाने संबंधी मुख्यमंत्री के बयान को लेकर डुआर्स में भी आंदोलन शुरू हो गया है. गुरुवार को गोजमुमो सदस्यों ने धूपगुड़ी बीडीओ को इस संबंध में एक ज्ञापन दिया. मोरचा का कहना है कि इससे पहाड़, तराई और डुआर्स के नेपाली और आदिवासी विद्यार्थियों को समस्या होगी. सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की गयी है.

ज्ञापन देने से पहले मोरचा समर्थकों ने मुंह पर काला कपड़ा बांधकर मौन जुलूस निकाला और विरोध प्रदर्शन किया. गोजमुमो के केंद्रीय कमिटी सदस्य तथा डुआर्स कमिटी के सचिव संदीप छेत्री ने कहा कि हम बांग्ला भाषा का सम्मान करते हैं.

सरकार पहाड़, तराई और डुआर्स को छोड़ पूरे राज्य में बांग्ला भाषा की पढ़ाई अनिवार्य कर सकती है. लेकिन इस अंचल में कई स्कलू प्रथम भाषा के रूप में नेपाली पढ़ाते हैं. ऐसे में बांग्ला थोपे जाने से विद्यार्थियों को परेशानी होगी. इधर, धूपगुड़ी के बीडीओ दीपंकर राय ने कहा कि गोजमुमो का ज्ञापन मिला है. इसे उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दिया जायेगा.

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