बीरभूम पहुंच अपने बचपन को किया याद, भावविभोर हुईं सीएम

Updated at : 06 May 2024 1:26 AM (IST)
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बीरभूम पहुंच अपने बचपन को किया याद, भावविभोर हुईं सीएम

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रविवार को बीरभूम जिले के बोलपुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार असित कुमार माल के समर्थन में लाभपुर में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाव विभोर हो गईं.

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मामा के घर पर आकर बचपन में कभी धान काटना और तैराकी करना सीखा था बीरभूम. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रविवार को बीरभूम जिले के बोलपुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार असित कुमार माल के समर्थन में लाभपुर में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाव विभोर हो गईं. इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने मामा के घर में बिताये बचपन की याद को ताजा किया. उन्होंने कहा कि जब वह बचपन में मामा के घर आती थीं तो धान काटना और तालाब में तैराकी करना सीखती थीं. उन्होंने कहा कि बचपन की यादें हमेशा सुखद होती हैं. उन्होंने कहा की आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में उन यादों के पन्नों को एक बार पलटने की फुरसत के कुछ पल भी नहीं मिल पाते हैं. जिसके पास जितनी अधिक जिम्मेदारी होगी, उसे यादगार बनाने के लिए उतना ही कम समय देना होता है. रविवार को बीरभूम के लाभपुर में चुनावी रैली करते हुए वह अपने बचपन की यादों में खो गयीं. मुख्यमंत्री के मामा का घर लाभपुर के पास ही कुसुंबा गांव में ही है. वहां उनका बचपन कैसे बीता, सब कुछ उन्होंने सार्वजनिक सभा में बताया. असित माल के समर्थन में जनसभा की शुरुआत करते हुए ममता बनर्जी ने कोई राजनीतिक भाषण नहीं दिया, बल्कि कुसुंबा गांव में मामा के घर में बिताए दिनों को याद किया. तृणमूल नेत्री के शब्दों में, ‘मेरा जन्म कुसुंबा गांव में हुआ था. उसके बाद मैं कोलकाता चली गई. जब मैं बच्ची थी तो हम परीक्षा के बाद अपने मामा के घर आते थे. मैं एक महीने तक रुकती थी. कभी-कभी मैं गांव में घूमती थी. तालाब में तैरती थी, खेत में धान काटने जाती थी. पेड़ों पर चढ़ती थी. ये सब बचपन की सीख है, आज की सीख नहीं. हर कोई कहता है कि मैं यह कैसे करूं? मैंने सब कुछ सीख लिया है. कई लोग कहते हैं, खाना बनाना इतनी बड़ी बात नही है? मैं कहती हूं, खाना बनाना बहुत बड़ा काम है. खाना बनाते समय नमक नहीं डालोगे तो खाओगे कैसे? या चीनी दी जाए तो मछली के सूप का स्वाद कैसा होगा? तो, अच्छा खाना बनाना भी एक कला है.’ उन्होंने कहा, ‘मैं कभी चकईपुर नहीं गई. लेकिन यह मुझे बहुत बुरा लगता है. चकईपुर मेरा पुश्तैनी घर है. मैंने तय किया है कि जब कुसुंबा जाऊंगी तो चकईपुर गांव भी जाऊंगी. वहां हमारे पास देवत्व संपत्ति थी. लेकिन मेरे पिता उन्हें नहीं ले गये. हमारे ताऊ के बच्चे हैं, वे सब कुछ देखते हैं.’ मुख्यमंत्री ने कहा कि बीरभूम की मिट्टी, पवित्र मिट्टी है. यह धरती रवींद्रनाथ टैगोर की कर्मभूमि है.’ लाभपुर में मां फुल्लरा देवी के मंदिर में सीएम ने जाकर पूजा अर्चना की.

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