कानून का दुरुपयोग है एक ही वैवाहिक विवाद में दो केस
Published by : AKHILESH KUMAR SINGH Updated At : 03 Feb 2026 3:06 AM
कलकत्ता हाइकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए स्पष्ट किया है कि एक ही घटना और समान आरोपों के आधार पर दूसरी एफआइआर दर्ज करना कानूनन स्वीकार्य नहीं है.
संवाददाता, कोलकाता
कलकत्ता हाइकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए स्पष्ट किया है कि एक ही घटना और समान आरोपों के आधार पर दूसरी एफआइआर दर्ज करना कानूनन स्वीकार्य नहीं है. अदालत ने इसे कानून की प्रक्रिया का पूर्ण दुरुपयोग करार दिया है. न्यायमूर्ति चैताली चटर्जी दास की पीठ ने पति और उसके ससुराल पक्ष की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए राणाघाट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) की अदालत में लंबित कार्यवाही को रद्द कर दिया. मामले में शिकायतकर्ता पत्नी (विपक्षी संख्या-2) ने आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ता संख्या-1 (पति) के साथ उनका 12 वर्षों का संबंध था, जिसके बाद दोनों ने मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया. पत्नी का दावा था कि शादी के दो महीने बाद ही पति और ससुराल वालों ने उसके साथ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न शुरू कर दिया.
हालांकि, अदालत ने पाया कि पत्नी ने इन्हीं आरोपों और इसी घटना को लेकर पहले ही सागर थाना में एफआइआर दर्ज करा रखी थी. इसके बावजूद बाद में धानतला थाना में उसी घटना को आधार बनाकर दूसरी एफआइआर दर्ज करायी गयी, जो कानून की दृष्टि से अनुचित है. हाइकोर्ट ने टिप्पणी की कि शिकायत की प्रकृति तंग करने वाली और तुच्छ प्रतीत होती है. न्यायमूर्ति दास ने कहा कि ऐसी कार्यवाही को जारी रखने की अनुमति देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि समस्त तथ्यों और परिस्थितियों के संचयी मूल्यांकन के बाद यह स्पष्ट है कि कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस या पर्याप्त सामग्री मौजूद नहीं है. इसी आधार पर अदालत ने दूसरी एफआइआर को रद्द कर दिया.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










