मातला रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव नहीं बढ़ा, यात्रियों की परेशानी बरकरार

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मातला रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव नहीं बढ़ा, यात्रियों की परेशानी बरकरार

दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग लाइन पर स्थित मातला रेलवे स्टेशन यात्रियों के लिए अब भी नाम मात्र का स्टेशन बना हुआ है.

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संसद में सांसद प्रतिमा मंडल ने उठाया मुद्दा, सुबह-शाम अतिरिक्त लोकल की मांग

संवाददाता, कैनिंग.

दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग लाइन पर स्थित मातला रेलवे स्टेशन यात्रियों के लिए अब भी नाम मात्र का स्टेशन बना हुआ है. बड़े आयोजन के साथ उद्घाटन के बाद स्थानीय लोगों को राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन हकीकत यह है कि स्टेशन पर पूरे दिन में सिर्फ दो जोड़ी लोकल ट्रेन ही ठहरती हैं. इसके कारण इलाके के यात्रियों को रोजमर्रा की आवाजाही में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है.

संसद में उठी आवाज : जयनगर की सांसद प्रतिमा मंडल ने संसद के शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे को उठाते हुए रेल मंत्री का ध्यान आकृष्ट किया. प्रश्नोत्तर काल के दौरान उन्होंने कहा कि शियालदह दक्षिण शाखा के कैनिंग सेक्शन में स्थित मातला स्टेशन का उद्घाटन वर्ष 2021 में होने के बावजूद यहां पर्याप्त ट्रेनों का ठहराव नहीं है. स्टेशन चालू होने के बाद भी लोगों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है.

यात्रियों की मुश्किलें : प्रतिमा मंडल ने बताया कि दिन में केवल दो जोड़ी ट्रेन रुकने के कारण नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और मरीजों को समय और पैसे दोनों की बर्बादी झेलनी पड़ रही है. कई यात्रियों को मजबूरी में पास के दूसरे स्टेशनों तक जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है. उन्होंने मांग की कि सुबह और शाम के समय कम से कम दो जोड़ी अतिरिक्त लोकल ट्रेनों का ठहराव मातला स्टेशन पर सुनिश्चित किया जाये.

रेलवे का पक्ष : रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि किसी भी स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव का फैसला यात्रियों की संख्या, टिकट की मांग और यात्रीभार जैसे मानकों के आधार पर किया जाता है. इन्हीं मापदंडों को देखते हुए यह तय होता है कि किसी स्टेशन पर और कितनी ट्रेनें रोकी जा सकती हैं.

स्थानीय लोगों की उम्मीद : स्थानीय लोगों का कहना है कि मातला स्टेशन पर पर्याप्त ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से उन्हें रोज अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय के साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ता है. अब इलाके के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि संसद में मुद्दा उठने के बाद रेलवे प्रशासन इस समस्या पर गंभीरता से विचार करेगा और मातला स्टेशन को वास्तव में यात्रियों के उपयोगी स्टेशन के रूप में विकसित करेगा.

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Subodh Kumar Singh

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