सलाइन कांड : प्रसूता की मौत पर सर्विस डॉक्टर फोरम ने जताया खेद, सरकार पर साधा निशाना

Updated at : 13 May 2025 1:39 AM (IST)
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सलाइन कांड : प्रसूता की मौत पर सर्विस डॉक्टर फोरम ने जताया खेद, सरकार पर साधा निशाना

मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज की मियाद समाप्त हो चुके रिंगर लैक्टेट सलाइन की वजह से बीमारी एक और प्रसूता की मौत हुई है

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उच्च स्तरीय न्यायिक जांच और दोषियों को कड़ी सजा की मांग

संवाददाता, कोलकाता.

मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज की मियाद समाप्त हो चुके रिंगर लैक्टेट सलाइन की वजह से बीमारी एक और प्रसूता की मौत हुई है, जिसकी चिकित्सा पिछले चार महीने से एसएसकेएम (पीजी) में चल रही थी. ऐसे में प्रसूता की मौत पर चिकित्सकों के संगठन सर्विस डॉक्टर फोरम के महासचिव डॉ सजल विश्वास ने खेद व्यक्त किया है. उन्होंने एक प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि इस साल जनवरी में पश्चिम बंगाल की एक दवा कंपनी द्वारा निर्मित रिंगर लैक्टेटेड सलाइन के विषाक्तता के कारण एक गर्भवती महिला की मौत हो गयी थी और चार अन्य गंभीर रूप से बीमार पड़ गयी थीं. इनमें से तीन का इलाज एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है. उनमें से एक और की सोमवार को मौत हो गयी. यह घटना साबित करती है कि विषाक्त रिंगर लैक्टेट गर्भवती महिलाओं की मौत और भयावह परिणामों के लिए जिम्मेदार है.

राज्य सरकार इस जहरीली सलाइन के निर्माता वेस्ट बंगाल फार्मास्यूटिकल्स के खिलाफ कोई कार्रवाई किये बिना ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों को निलंबित कर दी थी. सलाइन के नमूने को राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला द्वारा पारित कर दिया गया. कुछ ही दिनों में केंद्रीय प्रयोगशाला में सलाइन का नमूना परीक्षण में फेल हो गया. एक साल पहले इस कंपनी के रिंगर्स लैक्टेट के नमूने फेल हो गये थे.

इस घटना से यह साबित होता है कि राज्य सरकार न केवल पूरे राज्य में मिलावटी और घटिया दवाओं के प्रसार की अनुमति दे रही है, बल्कि औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में नमूना परीक्षण रिपोर्ट में भी हेराफेरी कर रही है और असफल रिपोर्ट को भी पास कर रही है. इससे अधिक भयानक अपराध कोई नहीं हो सकता. हम सर्विस डॉक्टर्स फोरम की ओर से मांग करते हैं कि इस घटना की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच हो तथा इस घटना में शामिल सभी लोगों को कड़ी सजा दी जाये, चाहे वह दवा निर्माता कंपनी हो या फिर वे अधिकारी जो इन मिलावटी दवाओं को सरकारी अस्पतालों में चलाने में मदद कर रहे हैं. हम मांग करते हैं कि जांच पूरी होने तक किसी भी दवा का उपयोग न किया जाये. सरकारी अस्पतालों में केवल उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयों की निर्बाध आपूर्ति की जानी चाहिए.

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