शांतिपुर अस्पताल में पांच किलो के ट्यूमर की सफल सर्जरी, 43 वर्षीय महिला की जान बची

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शांतिपुर अस्पताल में पांच किलो के ट्यूमर की सफल सर्जरी, 43 वर्षीय महिला की जान बची

गरीब परिवार की हसीना बीबी को रिस्की सर्जरी के जरिये जीवनदान, डॉक्टरों की टीम ने ढाई घंटे तक चली सर्जरी में कामयाबी हासिल की

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गरीब परिवार की हसीना बीबी को रिस्की सर्जरी के जरिये जीवनदान, डॉक्टरों की टीम ने ढाई घंटे तक चली सर्जरी में कामयाबी हासिल की नदिया. मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल नहीं, बल्कि नदिया जिले के शांतिपुर स्टेट जनरल अस्पताल के डॉक्टरों ने एक जोखिमपूर्ण सर्जरी में बड़ी कामयाबी हासिल की. 43 वर्षीय हसीना बीबी, जो बेरपाड़ा की रहने वाली हैं, कुछ महीनों पहले बच्चेदानी के ट्यूमर से प्रभावित हुईं. ट्यूमर का वजन लगातार बढ़ता गया और गरीब परिवार होने के कारण अस्पताल ही उनकी एकमात्र उम्मीद बन गया. सर्जरी और टीम की भूमिका: शांतिपुर अस्पताल की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ पवित्रा बेपारी के नेतृत्व में चार डॉक्टरों की एक विशेष टीम बनायी गयी. एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, गायनेकोलॉजिस्ट और दो अनुभवी सर्जनों ने मिलकर ढाई घंटे तक चली सर्जरी के दौरान हसीना बीबी का पांच किलो का ट्यूमर निकालने में सफलता हासिल की. परिवार ने बताया कि सर्जरी के बाद हसीना बीबी पहले की तरह मुस्कुरा रही हैं और उनकी जान बच गयी है. सर्जरी की चुनौतियां : डॉ पवित्रा बेपारी ने कहा कि मामला पहले ही गंभीर था और समय के साथ और रिस्की हो गया था, लेकिन सर्जरी के अलावा कोई विकल्प नहीं था. अस्पताल में आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के बावजूद डॉक्टरों ने जोखिम उठाकर ऑपरेशन किया. उन्होंने बताया कि पांच किलो का ट्यूमर हसीना बीबी के लिए जानलेवा बन गया था, लेकिन टीम की मेहनत और अनुभव से जीवन बचा लिया गया.

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