सबूत छिपाने के लिए आनन-फानन में संदीप घोष ने दिया बिल्डिंग में तोड़फोड़ का आदेश!
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 06 Sep 2024 1:03 AM
आरजी कर कांड. पूर्व प्रिंसिपल के खिलाफ एक और गंभीर आरोप, पत्र सोशल मीिडया पर वायरल
आरजी कर कांड. पूर्व प्रिंसिपल के खिलाफ एक और गंभीर आरोप, पत्र सोशल मीिडया पर वायरल कोलकाता. आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पूर्व प्रिंसिपल के खिलाफ आरोपों का सिलसिला थमने का मानो नाम नहीं ले रहा. उनके खिलाफ मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग में तोड़फोड़ और बदलाव के लिए आनन-फानन में आदेश जारी करने का भी मामला तूल पकड़ लिया है. आरोप लग रहा है कि जूनियर महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या की वारदात के कुछ ही घंटों के बाद संदीप घोष ने ऑन ड्यूटी डॉक्टर रेस्ट रूम और टॉयलेट तोड़ने का आदेश दे दिया था. इस आशय का एक आदेश पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसकी पुष्टि प्रभात खबर नहीं कर रहा. पर, आरोप लगाने वालों की धारणा है कि दुष्कर्म और हत्या की घटना के सबूत मिटाने के उद्देश्य से ही संदीप घोष ने ऐसा किया होगा. इस आरोप को बल मिलने की बड़ी वजह यह भी है कि जिस दिन आरजी कर मामले को जांच के लिए अदालत के आदेश पर सीबीआई ने इसे अपने हाथ में लिया था, उसी दिन रिनोवेशन के नाम पर घटनास्थल के पास स्थित डॉक्टर्स रेस्ट रूम को तोड़ भी दिया गया था. इससे यह भी धारणा बन रही है कि संदीप घोष के हस्ताक्षर वाले पत्र के फर्जी होने की आशंका कम है. उल्लेखनीय है कि आरजी कर में जहां जूनियर डॉक्टर की लाश मिली थी, उस सेमिनार हॉल से सटे ही ऑन ड्यूटी डॉक्टर्स रेस्ट रूम और शौचालय भी स्थित हैं. मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा आनन-फानन में इसे तोड़ने जैसा कदम क्यों उठाया गया, इसके पीछे दुष्कर्म और हत्या की घटना से जुड़े सबूतों से छेड़छाड़ की मंशा थी या नहीं, इसे लेकर बहस-विवाद की स्थिति पैदा हो गयी है. ज्ञात हो कि पूर्व प्रिंसिपल डॉ संदीप घोष ने जो आदेश जारी किया था, वह पीडब्ल्यूडी के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (सिविल और इलेक्ट्रिकल) के नाम गया था. उसमें रेस्ट रूम और टॉयलेट तो तोड़ने का जिक्र है. बकायदा संदीप घोष के हस्ताक्षर के साथ. खास बात यह भी है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार रूम के पास कंस्ट्रक्शन में तोड़फोड़ कर बदलाव करने के निर्णय का मामला अदालत के सामने भी सवालों के घेरे में है. मालूम हो कि आरजी कर के मुद्दे पर लगभग पूरा बंगाल सुलग रहा है. रोज लाखों लोग सड़क पर उतर रहे हैं. जगह-जगह और दिन-रात विरोध के स्वर गूंज रहे हैं. कोलकाता पुलिस के रवैये पर भी अदालत से लेकर सड़कों तक बहस का दौर चल रहा है. जांच एजेंसियां, अदालत और घटना के विरोध में आंदोलन पर उतारू लोग, सभी जानना चाहते हैं कि जब इतनी बड़ी घटना हो चुकी थी और जिस मामले में अदालत को इतना सख्त रुख अपनाना पड़ा था, इसके बावजूद तोड़फोड़ कर कंस्ट्रक्शन में बदलाव करने का आदेश कैसे जारी हो सकता था या यह काम कितने साहस के साथ किया गया ? दरअसल, वायरल हो रहे पत्र में संदीप घोष के हवाले से लिखा गया है, ‘मैं बताना चाहता हूं कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, कोलकाता, के विभिन्न विभागों में ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों के कमरे और अलग- अलग अटैच्ड टॉयलेट्स में कमियां हैं. आपसे अनुरोध है कि रेजिडेंट डॉक्टरों की मांग के अनुसार तुरंत आवश्यक कार्रवाई करें.’ पत्र में आगे लिखा गया है कि 10 अगस्त को प्लेटिनम जुबली बिल्डिंग में आयोजित एक बैठक में स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम और स्वास्थ्य शिक्षा निदेशक कौस्तव नायक की उपस्थिति में यह निर्णय लिया गया है. यानी डॉ घोष ने स्वास्थ्य विभाग के कंधे पर बंदूक रखते हुए इस कार्य को करा दिया था. ध्यान रहे कि इस मामले की जांच कर रही सीबीआई पहले ही सुप्रीम कोर्ट को बता चुकी है कि घटनास्थल से सबूत गायब हो गये हैं. आरजी कर मामले को लेकर आंदोलन में शामिल डॉ सुवर्णा गोस्वामी ने कहा है कि घटना के सबूत छुपाने की कोशिश की गयी है. इस मामले में संदीप घोष समेत पूरा सिंडिकेट ही काम कर रहा है.
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