डॉक्टर नैया को हाइकोर्ट से राहत, छह सप्ताह तक पुलिस जांच पर लगी रोक
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 23 Jan 2025 2:58 AM
बुधवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर अशफाकुल्ला नैया को कलकत्ता हाइकोर्ट से राहत मिल गयी. हाइकोर्ट ने उसके खिलाफ जारी पुलिस जांच पर अंतरिम रोक लगा दी.
संवाददाता, कोलकाता
बुधवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर अशफाकुल्ला नैया को कलकत्ता हाइकोर्ट से राहत मिल गयी. हाइकोर्ट ने उसके खिलाफ जारी पुलिस जांच पर अंतरिम रोक लगा दी. अगले छह सप्ताह तक यह आदेश बहाल रहेगा. न्यायाधीश तीर्थंकर घोष की अदालत में मामले की सुनवाई हुई. अगली सुनवाई 21 फरवरी को होगी. सुनवाई की शुरुआत में नैया के अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि मंगलवार को पुलिस ने एक और नोटिस भेजा है. अदालत के निर्देश पर राज्य सरकार ने केस डायरी पेश किया. इसे देख कर न्यायाधीश ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई भी प्रिस्क्रिप्शन या लेटरहेड नहीं है, जहां उन्होंने खुद को ईएनटी विशेषज्ञ का दावा किया है. राज्य ने इसके जवाब में कहा कि उन्होंने क्लिनिक की प्रिस्क्रिप्शन का उपयोग किया है. न्यायाधीश ने पूछा कि जिस विज्ञापन में उन्होंने ईएमटी विशेषज्ञ होने का दावा किया है, वह कहां से मिला है. राज्य ने कहा कि जिसने शिकायत दर्ज करायी थी, उसने सोशल मीडिया पर इसे देखा था.
वहीं, से इसे मुहैया कराया था. आरोप पत्र के साथ इस विज्ञापन का प्रिंटआउट दिया गया था, न्यायाधीश ने राज्य से सवाल पूछा. राज्य ने कहा कि इसे अलग से दिया गया था. तलाशी अभियान के दौरान जूनियर डॉक्टर के घर से कोई प्रिस्क्रिप्शन या लेटरहेड बरामद हुआ था, इस पर राज्य ने कहा कि नहीं. राज्य ने कहा कि उनके क्लिनिक में तलाशी अभियान चलाना चाहते हैं. इस पर न्यायाधीश ने कहा कि एक आरोप क्या मिला कि रिसर्च शुरू हो गया. क्या इस तरह से जांच होती है? इस पर राज्य की ओर से कहा गया कि यह एक अपराध है, इसलिए जांच शुरू की गयी. न्यायाधीश ने फिर सवाल उठाया कि एक पन्ने की एक शिकायत मिली और एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू हो गयी. कोई तथ्य या प्रमाण कहां है? सबूत लेकर यदि एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू होती, तो क्या बिगड़ जाता.
न्यायाधीश ने कहा : सरकार आमलोगों का अभिभावक जैसी होती है. आमलोगों पर अपने अधिकार का प्रयोग करना शुरू करेंगे, तो लोग कहां जायेंगे. राज्य ने कहा कि चिकित्सक ने क्लिनिक के प्रिस्क्रिप्शन का डेढ़ साल तक उपयोग किया है. उन्होंने यह क्यों नहीं कहा कि वह ईएनटी विशेषज्ञ नहीं हैं. इस पर न्यायाधीश ने कहा कि अभी तक कोई सबूत नहीं पेश किया गया है. राज्य के वकील ने कहा कि मामला हाइकोर्ट में होने के कारण क्लिनिक की तलाशी नहीं ले पा रहे हैं. तलाशी की अनुमति दी जाये. चिकित्सक जांच में भी सहयोग नहीं कर रहे हैं, लेकिन चिकित्सक के वकील ने इसका विरोध किया. उन्होंने पुलिस जांच पर रोक लगाने की मांग की, जिसे अदालत ने मंजूर कर ली.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










