तृणमूल के मौन विधायकों पर बढ़ेगा सदन में बोलने का दबाव

Updated at : 13 Feb 2025 9:12 PM (IST)
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तृणमूल के मौन विधायकों पर बढ़ेगा सदन में बोलने का दबाव

तृणमूल बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी है. संख्या बल में भी वह राज्य की अन्य पार्टियों से कहीं आगे हैं. इसलिए तृणमूल विधायक-सांसद विधानसभा-लोकसभा में अपने मुख्य विरोध दल भाजपा को घेरना का अवसर गवाना नहीं चाहते. पर तृणमूल के 118 विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने अपने चार साल के कार्यकाल में विधानसभा के किसी भी चर्चा सत्र में हिस्सा नहीं लिया है. हाल ही में पार्टी को यह जानकारी मिली है.

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कोलकाता.

तृणमूल बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी है. संख्या बल में भी वह राज्य की अन्य पार्टियों से कहीं आगे हैं. इसलिए तृणमूल विधायक-सांसद विधानसभा-लोकसभा में अपने मुख्य विरोध दल भाजपा को घेरना का अवसर गवाना नहीं चाहते. पर तृणमूल के 118 विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने अपने चार साल के कार्यकाल में विधानसभा के किसी भी चर्चा सत्र में हिस्सा नहीं लिया है. हाल ही में पार्टी को यह जानकारी मिली है.

ज्ञात रहे कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को विधानसभा में पार्टी विधायकों के साथ बैठक की थीं. इससे पहले तृणमूल विधायक दल ने विगत चार वर्षों में विधायकों के कामकाज की समीक्षा की. विधायक दल द्वारा तैयार की गयी सूची में कुल 118 विधायकों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने चार वर्षों में विधानसभा की कार्यवाही के दौरान किसी भी चर्चा में हिस्सा नहीं लिया है. यानी इन विधायकों ने चार साल के दरम्यान सदन में कभी अपना मुंह नहीं खोला. लोकसभा में भी ऐसे कई उदाहरण हैं. राजनीति के जानकार इस वर्ग को मूक-बधिर की श्रेणी में रखते हैं. एक समय लोकसभा में राज्य के कई सांसदों को इस वर्ग में ही रखा गया था. अब बेशक स्थिति उतनी खराब नहीं है. वास्तव में पार्टी के कई सांसद अब संसद के दोनों सदनों में आवाज उठाते हैं. लेकिन विधानसभा में हालात अलग हैं.

चार साल में सैकड़ों विधायक मौन धारण किये रहे. राज्य में तृणमूल विधायकों की कुल संख्या अब 222 है. इनमें से 118 विधानसभा में मौन रहते हैं. अर्थात आधे से अधिक बोलते ही नहीं.

अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में तृणमूल नेतृत्व ने इन 118 विधायकों को इस साल विधानसभा में सक्रिय बनाने का फैसला किया है. यह जिम्मेदारी दो अनुभवी विधायकों संसदीय कार्यमंत्री शोभन देव चट्टोपाध्याय और विधानसभा में तृणमूल के मुख्य संयोजक निर्मल घोष को सौंपी गयी है. शोभन देव फिलहाल मामले में कोई कड़ी कार्रवाई नहीं करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि जो विधायक निष्क्रिय बने हुए हैं, उन्हें दंडित किये बिना सत्र कक्ष में कैसे सक्रिय किया जाये इस पर विचार करना होगा. हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं. वहीं, निर्मल घोष ने अपने कार्यालय को निर्देश दिया कि वे उन लोगों के नाम विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय को सौंपें, जिन्होंने लंबे समय से विधानसभा में भाषण नहीं दिया है.

निष्क्रिय विधायकों को चर्चा सत्र में हिस्सा लेने का निर्देश

ज्ञात रहे कि बुधवार को विधानसभा में बजट पेश किया गया. अब विधानसभा में चार दिन का अवकाश है. राज्यपाल के अभिभाषण पर सोमवार व मंगलवार को चर्चा होगी. बजट पर बुधवार और गुरुवार को चर्चा होगी. ऐसे में निष्क्रिय विधायकों को इन चार दिवसीय चर्चाओं के दौरान अपना मुंह खोलने का निर्देश दिया गया है. तृणमूल ने सदन में वक्ताओं की नयी सूची तैयार कर ली है. इसमें आमता विधायक सुकांत पाल, बशीरहाट दक्षिण से विधायक सप्तर्षि बनर्जी, हरिपाल से कराबी मन्ना, चांपदानी से अरिंदम ग्विन के शामिल हैं. यह भी निर्देश दिया गया है कि हाल में उपचुनाव जीतने वाले विधायकों को भी बहस में बोलना होगा. इस सूची में मेदिनीपुर के विधायक सुजय हाजरा, नैहाटी विधायक सनत दे, तालडांगरा से विधायक फल्गुनी सिंघबाबू, हरोआ विधायक शेख रबीउल इस्लाम और सिताई विधायक संगीता राय के नाम हैं.

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