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अवैध नियुक्तियों के लिए पार्थ और मुकुल डालते थे दबाव

Updated at : 20 Sep 2025 1:40 AM (IST)
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अवैध नियुक्तियों के लिए पार्थ और मुकुल डालते थे दबाव

पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (डब्ल्यूबीएसएससी) नियुक्ति घोटाले की जांच में नया मोड़ आ गया है.

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घोटाला. एसएससी के पूर्व चेयरमैन ने कोर्ट के समक्ष दिया बयान

संवाददाता, कोलकातापश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (डब्ल्यूबीएसएससी) नियुक्ति घोटाले की जांच में नया मोड़ आ गया है. शुक्रवार को आयोग के पूर्व चेयरमैन चित्तरंजन मंडल ने कोलकाता स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) की विशेष अदालत में गवाही देते हुए दावा किया कि पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी व तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता मुकुल राय ने नियुक्ति प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया और उन पर दबाव बनाया. मंडल ने अदालत को बताया कि इन दोनों नेताओं की ओर से नियमों से परे जाकर अभ्यर्थियों को नौकरी देने की अनुचित मांग की गयी थी. शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार के तीन मामलों की सुनवाई शुक्रवार को अलीपुर स्थित विशेष सीबीआइ अदालत में शुरू हुई. तीनों मामलों- एसएससी नौवीं-10वीं, 11वीं-12वीं व ग्रुप सी में एक साथ सुनवाई चल रही है.

सीबीआइ के प्रमुख गवाह के रूप में पेश हुए चित्तरंजन मंडल

शुक्रवार को सीबीआइ ने चित्तरंजन मंडल को इस मामले में प्रमुख गवाह के रूप में अदालत में पेश किया. उनकी गवाही महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वह उस समय एसएससी के शीर्ष पद पर थे, जब कथित गड़बड़ियां हुईं. पार्थ चटर्जी एसएससी नियुक्ति घोटाले में पहले से ही गिरफ्तार हैं और जेल में न्यायिक हिरासत की अवधि काट रहे हैं. उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर से करोड़ों रुपये नकद व कीमती सामान बरामद होने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया था. सीबीआइ और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों इस मामले की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रहे हैं.

2011 में एसएससी के चेयरमैन बने थे चित्तरंजन मंडल

शुक्रवार को गवाही देते हुए चित्तरंजन मंडल ने कहा कि मुकुल राय और पार्थ चटर्जी ने उन पर अवैध रूप से नियुक्ति करने का दबाव बनाया था. चित्तरंजन मंडल ने कहा कि उन्होंने 2011 में मुख्यमंत्री के कहने पर एसएससी चेयरमैन का पद संभाला था. तब उन पर नेताओं और मंत्रियों का भारी दबाव था. मंडल का आरोप है कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता खत्म कर दी गयी थी और शीर्ष स्तर से लगातार सिफारिशें थोपने की कोशिशें हो रही थीं. इसी कारण कई अयोग्य अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से नौकरी दी गयी. जब चित्तरंजन के चेयरमैन पद पर नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री के बयान सामने आये, तो वकील संजय दासगुप्ता ने अनुरोध किया कि इसे मामले में शामिल न किया जाये. गवाही के दौरान, पार्थ चटर्जी के वकील बिप्लब गोस्वामी ने चित्तरंजन मंडल से उनकी वर्तमान राजनीतिक पहचान के बारे में पूछा. उन्होंने जानना चाहा कि क्या वह किसी खास राजनीतिक दल के ””दबाव”” में झूठी गवाही दे रहे हैं. चित्तरंजन मंडल ने इससे इनकार किया और कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है.

राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु को दी क्लीन चिट

स्कूल सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन चित्तरंजन मंडल ने दावा किया कि पार्थ चटर्जी और मुकुल राय अवैध नियुक्ति के लिए दबाव बनाते थे. हालांकि, उन्होंने वर्तमान शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु को ””क्लीन चिट”” दे दी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH KUMAR SINGH

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