ओबीसी: हाइकोर्ट के फैसले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप नहीं

Updated at : 04 Feb 2025 6:56 AM (IST)
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ओबीसी: हाइकोर्ट के फैसले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप नहीं

पश्चिम बंगाल में 12 लाख ओबीसी प्रमाण पत्र रद्द मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाइकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है.

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उच्च न्यायालय रद्द कर चुका है 12 लाख अन्य पिछड़ी जाति प्रमाण पत्र

मामले को लेकर दायर नयी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

संवाददाता, कोलकातापश्चिम बंगाल में 12 लाख ओबीसी प्रमाण पत्र रद्द मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाइकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है. इसी बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य में 12 लाख ओबीसी प्रमाण पत्र रद्द करने से संबंधित एक नये मामले को खारिज कर दिया है. बताया गया है कि ओबीसी प्रमाण पत्र रद्द करने का मामला लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. हाल ही में इस संबंध में एक नया मामला दर्ज किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने छह जनवरी को ओबीसी प्रमाण पत्र को लेकर दायर हुए मामले को खारिज कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि ओबीसी प्रमाणपत्र रद्द करने के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया जायेगा.

जानकारी के अनुसार, अमल कुमार दास ने ओबीसी प्रमाण पत्र को लेकर कलकता हाइकोर्ट में मामला दायर किया था, जिस पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और लगभग 12 लाख ओबीसी प्रमाण पत्र रद्द करने का आदेश दिया. वहीं, अवनी कुमार घोष नामक व्यक्ति ने छह जनवरी को कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक नया मामला दायर किया. हालांकि, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में कुल तीन प्रतिवादी हैं. राज्य सरकार, पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग और अमल कुमार दास. नये मामले में शीर्ष अदालत ने कहा है कि वह उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करेगी. दो न्यायाधीशों की पीठ ने यह भी कहा कि यदि इस संबंध में कोई याचिका लंबित थी तो उसका भी निपटारा कर दिया गया.

क्या है मामला

उल्लेखनीय है कि पिछले साल 22 मई को कलकत्ता हाइकोर्ट के जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा जारी 12 लाख ओबीसी प्रमाण पत्रों को रद्द कर दिया था और कहा था कि 2010 से बनाये गये ये प्रमाण पत्र तय नियम के अनुसार नहीं बनाये गये हैं. हाइकोर्ट के इस फैसले को राज्य सरकार व पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है, जिस पर आगामी सुनवाई 18 फरवरी को होगी. इसकी सुनवाई भी न्यायमूर्ति गवई की अध्यक्षता वाली पीठ पर की जा रही है. इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में नया दायर मामला खारिज कर दिया है.

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