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अब सुभाष सरोवर में होगी पेड़ों की गणना, क्यूआर कोड से होगी पहचान

दक्षिण कोलकाता का ‘फेफड़ा’ कहे जाने वाले रवींद्र सरोवर की तर्ज पर उत्तर-पूर्व कोलकाता के फेफड़े माने जाने वाले सुभाष सरोवर में यह सर्वे किया जा रहा है.

उत्तर-पूर्व कोलकाता के ‘फेफड़े’ सुभाष सरोवर में पहली बार वृक्ष सर्वे केएमडीए जुटायेगा पेड़ों की प्रजाति, आयु व संख्या से जुड़ी जानकारी कोलकाता. रवींद्र सरोवर के बाद अब कोलकाता के सुभाष सरोवर में भी पेड़ों की गणना और विस्तृत सर्वे किया जायेगा. इस दौरान सरोवर परिसर में मौजूद पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाये जायेंगे, ताकि उनकी प्रजाति, आयु और अन्य जानकारियों को डिजिटल रूप से दर्ज किया जा सके. दक्षिण कोलकाता का ‘फेफड़ा’ कहे जाने वाले रवींद्र सरोवर की तर्ज पर उत्तर-पूर्व कोलकाता के फेफड़े माने जाने वाले सुभाष सरोवर में यह सर्वे किया जा रहा है. कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (केएमडीए) के अनुसार, सरोवर का बड़ा हिस्सा पेड़ों और हरियाली से आच्छादित है, लेकिन अब तक यहां मौजूद पेड़ों की संख्या, प्रजाति और उनकी आयु से संबंधित कोई प्रामाणिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. इसी जानकारी को जुटाने के उद्देश्य से यह सर्वे किया जायेगा. सर्वे के दौरान प्रत्येक पेड़ पर क्यूआर कोड लगाया जायेगा, जिससे उसकी पूरी जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगी. केएमडीए ने बताया कि राज्य सरकार की अनुमति मिलने के बाद यह कार्य शुरू किया जायेगा. उल्लेखनीय है कि सुभाष सरोवर लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें करीब 40 एकड़ में झील और शेष 60 एकड़ में पेड़-पौधों व जंगलनुमा क्षेत्र मौजूद है. हालांकि केएमडीए के पास फिलहाल यह जानकारी नहीं है कि यहां मौजूद पेड़ कितने पुराने हैं और उनकी संख्या कितनी है. केएमडीए सूत्रों के अनुसार, इस सर्वे को लेकर पश्चिम बंगाल बायोडायवर्सिटी बोर्ड से बातचीत की गयी है. सुभाष सरोवर क्षेत्र में कृष्णचूड़ा, राधाचूड़ा, शिमुल, पलाश, काठबादाम, अर्जुन, शीशम, साल, महादेवदारु और देवदारु जैसी कई महत्वपूर्ण प्रजातियों के पेड़ मौजूद हैं. गौरतलब रहे कि रवींद्र सरोवर में पहले किये गये सर्वे में 8,000 से अधिक पेड़ों की पहचान की गयी थी. अम्फान चक्रवात के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ गिरने के बावजूद सर्वे में यह भी सामने आया था कि 7,000 से अधिक पेड़ 70 से 80 वर्ष पुराने हैं. इस संबंध में केएमडीए के एक अधिकारी ने बताया कि रवींद्र सरोवर और सुभाष सरोवर, दोनों ही झीलें शहर के पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. यदि इनसे जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध होगी, तो उनके रखरखाव और संरक्षण में काफी सहूलियत होगी. उन्होंने कहा कि यह जानकारी आम लोगों के साथ भी साझा की जा सकेगी. अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना के लिए राज्य सरकार से वित्तीय सहायता की आवश्यकता है, जिसके लिए सरकार को पत्र लिखा गया है. उम्मीद जतायी गयी है कि यह सर्वे इसी वर्ष शुरू हो जायेगा.

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