ePaper

तृणमूल कांग्रेस का अभेद किला है मन्तेश्वर विधानसभा सीट, सिद्दिकुल्लाह चौधरी को हराना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती

23 Jan, 2026 6:33 pm
विज्ञापन
तृणमूल कांग्रेस का अभेद किला है मन्तेश्वर विधानसभा सीट, सिद्दिकुल्लाह चौधरी को हराना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती

Monteswar Assembly: सिद्दिकुल्लाह चौधरी वर्तमान में पूर्व बर्धमान जिले की मन्तेश्वर विधानसभा सीट से विधायक हैं. ममता बनर्जी ने उनकी प्रशासनिक क्षमता और समाज पर उनके प्रभाव को देखते हुए उन्हें अपनी कैबिनेट में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है. पश्चिम बंगाल में यह सीट चंद उन सीटों में से है जहां तृणमूल को हराना किसी भी दल के लिए एक कठिन चुनौती है.

विज्ञापन

Monteswar Assembly: कोलकाता. पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले में स्थित मन्तेश्वर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र एक सामान्य श्रेणी की सीट है. 2021 के चुनाव में यहां से वर्तमान विधायक सैकत पांजा यहां दल बदलकर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े. पांजा के पार्टी बदलने से भाजपा को माकपा से आगे निकलने और मन्तेश्वर में तृणमूल कांग्रेस के लिए मुख्य चुनौती बनने का अवसर मिला, लेकिन सैकत पांजा वो चुनाव तृणमूल के सिदिकुल्लाह चौधरी से 31,508 वोटों से हार गए. भाजपा की बढ़ती मौजूदगी के बावजूद, 2026 के चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस को मन्तेश्वर विधानसभा क्षेत्र में साफ बढ़त मिली हुई है. उलटफेर तभी मुमकिन है जब भाजपा एक मजबूत एंटी-इनकंबेंसी नैरेटिव बनाने में कामयाब हो, हिंदू वोटरों को एकजुट करने के लिए एक जरूरी मुद्दा पहचाने, और लेफ्ट फ्रंट-कांग्रेस गठबंधन के अचानक फिर से उभरने से फायदा उठाए, जो हाल के वर्षों में एक मामूली ताकत बनकर रह गया है.

माकपा यहां से जीत चुकी है 11 चुनाव

1951 में स्थापित, मन्तेश्वर सीट पर 2016 के उपचुनाव सहित 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. वाम मोर्चे ने शुरुआती दशकों में 11 बार जीत हासिल करते हुए दबदबा बनाया, जिसमें सीपीआई (एम) ने 10 जीत और 1962 में अविभाजित सीपीआई ने एक जीत हासिल की. ​​कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने तीन-तीन बार यह सीट जीती है, जबकि एक स्वतंत्र उम्मीदवार ने एक बार जीत हासिल की. 2016 में पांजा ने हिदायतुल्लाह को सिर्फ 706 वोटों से हराया था. जीत के कुछ ही महीनों के अंदर पांजा की मौत हो गई, जिसके बाद हुए उपचुनाव में उनके बेटे सैकत पांजा ने माकपा के मोहम्मद उस्मान गनी सरकार को 1,27,127 वोटों से हराया. तृणमूल की बढ़त 2019 में 28,036 वोटों से बढ़कर 2024 में 45,742 वोटों तक पहुंच गई. माकपा का वोट शेयर तेजी से गिरा है, जो 2016 के उपचुनाव के बाद से पिछले दो विधानसभा और दो संसदीय चुनावों में 10 से 12 प्रतिशत के बीच रहा है.

नामवोट
सिद्दिकुल्लाह चौधरी1,05,460
सैकत पांजा73,655
विजेता पार्टी का वोट %50.5 %
जीत अंतर %15.3 %
स्रोत: चुनाव आयोग

गठबंधन के साथ बने सरकार का हिस्सा

सिद्दिकुल्लाह चौधरी वर्तमान में जनशिक्षा प्रसार और पुस्तकालय सेवा विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में कार्य कर रहे हैं. उनके कार्यकाल में पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण और जनशिक्षा के प्रसार की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं. वे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुँच को सुगम बनाने के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं. सिद्दिकुल्लाह चौधरी ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत विभिन्न छोटे दलों और स्वतंत्र आंदोलनों के माध्यम से की. उन्होंने 2016 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और मंगलकोट विधानसभा सीट से चुनाव जीता. उनकी लोकप्रियता और सामुदायिक पकड़ को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें अपनी कैबिनेट में जगह दी. 2021 के चुनावों में भी उन्होंने अपनी जीत बरकरार रखी और पुन: मंत्री पद संभाला.

सिद्दिकुल्लाह चौधरी किस विभाग के मंत्री हैं?

वे पश्चिम बंगाल सरकार में जनशिक्षा प्रसार और पुस्तकालय सेवा (Mass Education Extension and Library Services) विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं.

उनका विधानसभा क्षेत्र कौन सा है?

वे पूर्व बर्धमान जिले के मन्तेश्वर (Manteswar) विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं.

सिद्दिकुल्लाह चौधरी किस सामाजिक संगठन से जुड़े हैं?

वे जमीयत उलेमा-ए-हिंद की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष हैं, जो एक प्रमुख सामाजिक और धार्मिक संगठन है.

उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या है?

उन्होंने दारुल उलूम देवबंद से स्नातक (फाजिल) की पढ़ाई की है और वे एक उच्च कोटि के इस्लामी विद्वान हैं.

क्या वे पहले भी विधायक रहे हैं?

हाँ, वे तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुँचे हैं और इससे पहले भी राज्य की राजनीति में विभिन्न भूमिकाओं में सक्रिय रहे हैं.

वे किस राजनीतिक दल से संबद्ध हैं?

वे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के सदस्य हैं.

उनकी धार्मिक पहचान क्या है?

वे एक प्रमुख इस्लामिक विद्वान (आलिम) हैं और जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बंगाल इकाई का नेतृत्व करते हैं.

उनका मुख्य योगदान क्या माना जाता है?

उन्हें बंगाल में अल्पसंख्यक अधिकारों की आवाज उठाने और राज्य में मदरसों व पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण के प्रयासों के लिए जाना जाता है.

सामाजिक नेतृत्व से राजनीतिक उदय

सिद्दिकुल्लाह चौधरी का जन्म पूर्व बर्धमान जिले के एक धार्मिक और सम्मानित परिवार में हुआ था. उनके पिता स्वर्गीय हाजी अबुल कासिम चौधरी थे. सिद्दिकुल्लाह चौधरी की शुरुआती शिक्षा पारंपरिक रही और उन्होंने विश्व प्रसिद्ध इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की. उनकी शैक्षणिक योग्यता और धार्मिक विषयों पर उनकी पकड़ ने उन्हें समाज में ‘मौलाना’ के रूप में एक विशिष्ट पहचान दिलाई. राजनीति में आने से पहले सिद्दिकुल्लाह चौधरी सामाजिक और धार्मिक सुधारों में सक्रिय थे.

सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन से चमके

सिद्दिकुल्लाह चौधरी जमीयत उलेमा-ए-हिंद (पश्चिम बंगाल इकाई) के अध्यक्ष के रूप में लंबे समय से सेवा दे रहे हैं. अल्पसंख्यकों के अधिकारों, शिक्षा और सामाजिक न्याय के लिए उनके संघर्ष ने उन्हें जमीन पर एक मजबूत जनाधार दिया. ममता बनर्जी के ‘मां, माटी, मानुष’ के आंदोलन के दौरान, विशेष रूप से सिंगूर और नंदीग्राम के दौर में, सिद्दिकुल्लाह चौधरी ने किसानों के हक में आवाज उठाई. बाद में उन्होंने अपनी राजनीतिक शक्ति को तृणमूल कांग्रेस के साथ जोड़ा, जिससे राज्य की राजनीति में एक नया समीकरण बना.

सिद्दिकुल्लाह चौधरी की खास बातें

  • विद्वान राजनेता: वे देश के धार्मिक विद्वानों में से एक माने जाते हैं.
  • मजबूत सांगठनिक आधार: जमीयत उलेमा-ए-हिंद (पश्चिम बंगाल) के अध्यक्ष है.
  • निर्वाचन क्षेत्र: पूर्व बर्धमान की मन्तेश्वर सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं.
  • मंत्रालय: जनशिक्षा प्रसार और पुस्तकालय सेवा विभाग के स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री हैं.
  • किसानों की आवाज: भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलनों में उनकी भूमिका ने उन्हें एक जननेता के रूप में स्थापित किया.
  • शिक्षा पर जोर: एक मंत्री के रूप में उनका मुख्य फोकस पुस्तकालयों के जरिए ज्ञान के प्रसार और साक्षरता दर को बढ़ाने पर है.
  • सक्रिय कार्यकर्ता: उन्होंने सीएए और एनआरसी जैसे मुद्दों पर राज्य में बड़े विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है.

Also Read: बंगाल में RSP का गढ़ रहा बोलपुर आज TMC का अभेद्य किला, चंद्रनाथ सिन्हा को हराना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती

विज्ञापन
Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola

अपने पसंदीदा शहर चुनें

ऐप पर पढ़ें