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रिंगर्स लैक्टेट नहीं, ‘मानवीय भूल’ और साइड इफेक्ट से गयी प्रसूता की जान

Updated at : 13 Jan 2025 11:25 PM (IST)
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रिंगर्स लैक्टेट नहीं, ‘मानवीय भूल’ और साइड इफेक्ट से गयी प्रसूता की जान

मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज में रिंगर्स लैक्टेट चढ़ाये जाने से प्रसूता की मौत का मामला जोर पकड़ता जा रहा है. इस मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर गठित विशेष मेडिकल जांच कमेटी ने स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम को रिपोर्ट सौंप दी है. जांच कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार ‘मानवीय भूल’ और साइड इफेक्ट की वजह से यह घटना हुई है.

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कोलकाता.

मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज में रिंगर्स लैक्टेट चढ़ाये जाने से प्रसूता की मौत का मामला जोर पकड़ता जा रहा है. इस मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर गठित विशेष मेडिकल जांच कमेटी ने स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम को रिपोर्ट सौंप दी है. जांच कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार ‘मानवीय भूल’ और साइड इफेक्ट की वजह से यह घटना हुई है. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार,रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रोटोकॉल को माने बगैर प्रसूताओं को ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन दिया गया था. विशेषज्ञों के अनुसार प्रसव पीड़ा को कम करने के लिए इस इंजेक्शन को दिया जाता है. इस इंजेक्शन को मांसपेशियों में दिया जाता है. लेकिन अगर सलाइन के माध्यम से दिया गया तो धीरे चढ़ाना पड़ता है. जांच कमेटी का दवा है कि तेज गति से सलाइन के जरिये इसे चढ़ाया गया. जिस वजह से पांच प्रसूताओं की हालत बिगड़ी. 13 सदस्यीय विशेषज्ञ कमेटी का यह भी मानना है कि सलाइन चढ़ाने की वजह से प्रसूता की मौत नहीं हुई है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घटना वाले दिन मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज प्रसूता विभाग सह पूरे अस्पताल में रिंगर लैक्टेटेड (आरएल) सलाइन की 1,250 बोतलें इस्तेमाल की गयीं थीं. लेकिन पांच प्रसूताओं को छोड़कर दूसरे किसी मरीज को दिक्कत नहीं हुई. ऐसे में साफ है कि सीधे सलाइन इस घटना के लिए जिम्मेवार नहीं है. प्रारंभ में, यह माना जा रहा था कि उस रात इस्तेमाल की गयी अन्य दवाओं का गर्भवती महिलाओं पर दुष्प्रभाव पड़ा है. किस दवा के कारण साइड इफेक्ट हुआ है इसकी भी जांच की जा रही है.

हालांकि, समिति के सदस्य इस बात से सहमत हैं कि यह हालत अकेले रिंगर के लैक्टेट सलाइन के कारण नहीं हो सकती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज में घटना वाले दिन सीनियर रेसिडेंट मेडिकल ऑफिसर (एसआर) ड्यूटी पर नहीं थे. वहीं दवा की मियाद समाप्त हुई है या नहीं यह देखने का काम सिस्टर इंचार्ज करती थीं.

घटना वाले दिन सिस्टर इंचार्ज भी छुट्टी पर थीं. वहीं, जिन वरिष्ठ डॉक्टरों को ड्यूटी पर होना चाहिए था, उनमें से कोई भी शुक्रवार रात को वहां मौजूद नहीं था. जिम्मेदारी जूनियर डॉक्टर संभाल रहे थे. सूत्रों का दावा है कि दो पीजीटी डॉक्टर सो गये. इस वजह से यह घटना हुई.

कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग के प्रमुख और जांच समिति के सदस्य प्रो. डॉ सौमित्र घोष ने बताया कि संबंधित दवा कंपनी के रिंगर लैक्टेट या सलाइन से इस संक्रमण के फैलने या बीमार होने की संभावना बहुत कम है. सलाइन का यही बैच अन्य मरीजों को भी दिया गया था. तो वे बीमार क्यों नहीं पड़े? स्वास्थ्य सचिव भी इस प्रारंभिक रिपोर्ट पर गौर कर रहे हैं. गौरतलब है कि इस घटना में एक प्रसूता की मौत हुई है, जबकि, चार बीमार हैं. इनमें से तीन की हालत गंभीर बनी हुई है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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