कई नामी कंपनियों की दवाएं जांच में फेल

फर्मास्युटिकल उद्योग को झटका. सीडीएससीओ ने की 52 दवाओं की समीक्षा, रिपोर्ट निराशाजनक
कोलकाता. देश में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली करीब 52 दवाओं को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा जनवरी में की गयी समीक्षा के दौरान मानक गुणवत्ता (एनएसक्यू) के अनुरूप नहीं पाया गया है. 93 प्रकार की दवाएं कई राज्य सरकारों के औषधि नियंत्रण प्राधिकरणों द्वारा गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुई हैं. इनमें से कई दवा निर्माता गुजरात, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, पांडिचेरी में स्थित थे. दो व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं, जिनमें से एक हृदय संबंधी उपचार के लिए इस्तेमाल की जाती है और दूसरी एंटीबायोटिक के रूप में. वहीं, वेस्ट बंगाल में हुई गुणवत्ता जांच में भी कुछ दवाएं विफल रही हैं. यह आमजनों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है. बंगाल के लोग बाजार में बिकनेवाली दवाओं के उपयोग को लेकर चिंतित हैं. चिह्नित बैचों में पैरासिटामोल, हृदय की दवाएं और विटामिन सप्लीमेंट शामिल हैं. 145 एनएसक्यू दवाओं में से 52 की पहचान केंद्रीय औषधि नियामकों द्वारा की गयी है, जबकि शेष 93 बैच राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में विफल रहे. एनएसक्यू दवाएं वे हैं जो राष्ट्रीय या अंतराराष्ट्रीय प्राधिकरणों द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करती हैं. सर्विस डॉक्टर्स फोरम के महासचिव डॉ सजल विश्वास ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल फार्मास्युटिकल कंपनी की रिंगर लैक्टेट सलाइन सहित कई दवाएं, जो मिदनापुर मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद सवालों के घेरे में आयी थीं, केंद्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला द्वारा गुणवत्ता परीक्षण में फेल साबित हुई हैं. यह रिपोर्ट फार्मास्युटिकल उद्योग के लिए एक बड़ा झटका है और कई मरीज इन घटिया दवाओं का सेवन भी कर रहे हैं. अगर मरीजों को उचित गुणवत्ता वाली दवा मिल रही हैं, तो वे पूरी तरह से अंधेरे में हैं. निम्न मानक वाली एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग से आम लोगों की सेहत पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा. शहर के एक अन्य चिकित्सक डॉ जी मुखर्जी ने कहा कि केंद्र को इस मुद्दे पर शून्य सहिष्णुता अपनानी चाहिए और दवा निर्माताओं के लाइसेंस रद्द करने चाहिए और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करनी चाहिए. ज्ञात हो कि पिछले कुछ समीक्षा में एनएसक्यू दवाओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है. अक्टूबर 2024 में सीडीएससीओ ने 90 दवा और फॉर्मूलेशन नमूनों को एनएसक्यू के रूप में चिह्नित किया था. वहीं पिछले साल ही नवंबर में यह संख्या बढ़कर 111, दिसंबर में 135 और इस साल जनवरी में बढ़ कर 145 हो गयी है. बता दे कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने जनवरी में उच्च रक्तचाप, एलर्जी और मतली की दवाओं सहित 145 दवाओं और फॉर्मूलेशन के चुनिंदा बैचों को मानक गुणवत्ता (एनएसक्यू) के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया है. इनमें ग्लेनमार्क फार्मा की लोकप्रिय उच्च रक्तचाप की दवा टेल्मा एएम और उल्टी को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एल्केम हेल्थ साइंसेज की ओंडेम-4 टैबलेट भी शामिल हैं. निरंतर नियामक निगरानी के हिस्से के रूप में सीडीएससीओ बिक्री या वितरण बिंदुओं से दवा के नमूने एकत्र करता है, उनका विश्लेषण करता है और मासिक आधार पर सीडीएससीओ पोर्टल पर नकली दवाओं की सूची प्रदर्शित करता है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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