सीट बंटवारे पर लेफ्ट फ्रंट की अहम बैठक जल्द होगी

Updated at : 07 Jan 2026 1:48 AM (IST)
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सीट बंटवारे पर लेफ्ट फ्रंट की अहम बैठक जल्द होगी

आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे के मुद्दे पर लेफ्ट फ्रंट और उसके घटक दलों की अहम बैठक जल्द होने की संभावना है.

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वाममोर्चा के चेयरमैन बिमान बसु करेंगे दो दिवसीय बैठक

संवाददाता, कोलकाता

आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे के मुद्दे पर लेफ्ट फ्रंट और उसके घटक दलों की अहम बैठक जल्द होने की संभावना है. माकपा के वरिष्ठ नेता और लेफ्ट फ्रंट के चेयरमैन बिमान बसु इस विषय पर अपने सहयोगी दलों के साथ दो दिवसीय बैठक करने जा रहे हैं. हालांकि बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह बैठक शीघ्र आयोजित की जा सकती है. वर्तमान में वामदलों की राजनीतिक स्थिति कमजोर मानी जा रही है, लेकिन बैठक से पहले ही फ्रंट के भीतर मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं. अलग-अलग घटक दलों के अलग सुरों को देखते हुए माना जा रहा है कि सीपीएम को सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन स्तर पर गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

फॉरवर्ड ब्लॉक ने साफ कर दिया है कि वह लेफ्ट फ्रंट के बाहर किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करना चाहता. पार्टी के राज्य सचिव नरेन चटर्जी का कहना है कि फॉरवर्ड ब्लॉक उन्हीं सीटों पर चुनाव लड़ना चाहता है, जिन पर उसका पहले अधिकार रहा है. उन्होंने याद दिलाया कि जब फॉरवर्ड ब्लॉक सरकार में था, तब उसने 34 सीटों पर चुनाव लड़ा था. वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 21 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में लेफ्ट फ्रंट ने कांग्रेस और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ) के साथ गठबंधन किया था. आइएसएफ के चेयरमैन नौशाद सिद्दीकी पहले ही अलीमुद्दीन जाकर लेफ्ट फ्रंट चेयरमैन बिमान बसु से मुलाकात कर चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक यदि गठबंधन होता है, तो आइएसएफ पिछली बार की तुलना में अधिक सीटों की मांग कर सकता है. आरएसपी के राज्य सचिव तपन होर के अनुसार, सीपीएम ने आइएसएफ से बातचीत की है. उन्होंने कहा कि बड़े हित को ध्यान में रखते हुए आरएसपी पिछली बार लड़ी गयी सीटों को स्वीकार करने को तैयार है. हालांकि यदि कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं होता है, तो आरएसपी 19 सीटों की मांग करेगा. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मौजूदा समय में बंगाल में लेफ्ट की स्थिति काफी कमजोर है.

और संसदीय व विधानसभा राजनीति में उसका प्रतिनिधित्व शून्य है. आकलन के मुताबिक राज्य में लेफ्ट का वोट शेयर घटकर करीब पांच से छह प्रतिशत तक सिमट गया है. ऐसे में सीट बंटवारे और गठबंधन को लेकर होने वाली यह बैठक लेफ्ट फ्रंट के लिए बेहद निर्णायक मानी जा रही है.

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