न्यायाधीश जयमाल्य बागची आज लेंगे शपथ, शीर्ष अदालत में सुन सकते हैं आरजी कर मामला

Published by : SUBODH KUMAR SINGH Updated At : 17 Mar 2025 12:31 AM

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सुप्रीम कोर्ट में आरजी कर मामले की सुनवाई चल रही है.

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संवाददाता, कोलकाता.

सुप्रीम कोर्ट में आरजी कर मामले की सुनवाई चल रही है. कलकत्ता हाइकोर्ट से शीर्ष अदालत में गये न्यायाधीश जयमाल्य बागची आरजी कर मामला सुन सकते हैं. देश के प्रधान न्यायाधीश की बेंच में उन्हें शामिल किया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक सोमवार को शीर्ष अदालत में न्यायाधीश के रूप में जयमाल्य बागची शपथ लेंगे. इसके बाद प्रधान न्यायाधीश की बेंच में तृतीय न्यायाधीश के रूप में उन्हें देखने को मिल सकता है. यदि ऐसा हुआ तो वह आरजी कर मामले की सुनवाई में रहेंगे.

सोमवार को डेढ़ महीने बाद फिर से आरजी कर का मामला उठने की संभावना है. सुबह 11 बजे से मामले की सुनवाई शुरू होने की उम्मीद जतायी गयी है. पिछले 10 मार्च को कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश रहे जयमाल्य बागची को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में केंद्रीय सरकार ने मंजूरी दी. इसके बाद कॉलेजियम ने उन्हें मनोनीत किया था. छुट्टी के कारण शीर्ष अदालत बंद रहने के कारण न्यायाधीश बागची शपथ नहीं ले पाये थे. सोमवार सुबह 10 बजे वह शपथ लेंगे. उसके बाद वह न्यायाधीश के रूप में उनका काम शुरू कर देंगे. सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश की बेंच आरजी कर का मामला चल रहा है. सोमवार को सुनवाई की तालिका में तीसरे नंबर पर ही आरजी कर मामला है. अभी तक मामले की सनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना व न्यायाधीश संजय कुमार का नाम है. एक न्यायाधीश का नाम अभी तक रिक्त है. सूत्रों के मुताबिक तृतीय न्यायाधीश के रूप में जयमाल्य बागची शामिल हो सकते हैं. इसके पहले हाइकोर्ट में उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुए आर्थिक घोटाले की सुनवाई की थी. उनकी ही अदालत में सीबीआइ द्वारा संजय राय को फांसी देने की अपील का मामला भी था. लेकिन वह इस मामले की सुनवाई नहीं कर पाये. इसके पहले वह शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में मनोनित हुए. केवल आरजी कर का मामला ही नहीं, राज्य के कई मामले प्रधान न्यायाधीश की बेंच में सुनवाई की तालिका में है. इस मामले को भी न्यायाधीश बागची सुन सकते हैं. आरजी कर की पीड़िता के माता-पिता सीबीआइ जांच से नाखुश हैं. वहीं हाइकोर्ट में संजय राय को फांसी देने की मांग पर अपील की गयी है.

हालांकि पीड़िता के माता-पिता फांसी के पक्ष में नहीं है. ऐसे में मामले की सुनवाई पर सभी की निगाहें हैं.

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