HMPV Virus in Kolkata: कर्नाटक-गुजरात के बाद कोलकाता पहुंचा एचएमपीवी वायरस, अब तक सामने आए 4 मामले, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

Published by : Pritish Sahay Updated At : 06 Jan 2025 9:21 PM

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HMPV Virus

HMPV Virus in Kolkata: नये साल की शुरुआत में एक और चीना वायरस ने भारत की चिंता बढ़ा दी है. देश में एचएमपीवी वायरस के चार मामले सामने आ चुके हैं. कर्नाटक, गुजरात के बाद पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक और मामला सामने आया है. हालांकि नये वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है. विभाग ने लोगों को चिंता न करने की सलाह दी है.

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HMPV Virus in Kolkata: चीन में चिंता बढ़ाने के बाद ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMVP) की दस्तक अब भारत में भी हो चुकी है. भारत में तीन राज्यों में इससे संक्रमित मरीज की पुष्टी हो चुकी है. कर्नाटक, गुजरात और पश्चिम बंगाल में इस वायरस के मरीज मिल चुके हैं.  पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी एक बच्चा एचएमपीवी वायरस से पीड़ित पाया गया है. हालांकि अस्पताल सूत्रों ने कहा है कि संक्रमित शिशु में चीनी वेरिएंट नहीं मिला है. बच्चे का सफल इलाज हो चुका है और वो अपने घर भी लौट गया है, लेकिन वायरस ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है.

बच्चे सबसे ज्यादा हो रहे हैं प्रभावित

हाल में कोलकाता के पियरलेस अस्पताल में एचएमपीवी से पीड़ित एक छह महीने के बच्चे का इलाज किया गया है. फिलहाल उसकी सेहत पर नजर रखी जा रही है. ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस से सबसे ज्यादा खतरा बच्चों और बूढ़ों को हो रहा है. अभी तक देश में मिले मामलों में बच्चों ही इससे प्रभावित हुए हैं. जानकारी के अनुसार, देश में एचएमपीवी के चार मामले सामने आ चुके हैं. लेकिन अभी भी यह निश्चित नहीं है कि यह चीनी वैरिएंट है या नहीं.

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी

एचएमपीवी वायरस को लेकर राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से अलर्ट भी जारी की गई है. विभाग ने लोगों से न घबराएं और सजग रहने की अपील की है. राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों को इस वायरस से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है. पियरलेस हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर हेड डॉ सहेली दासगुप्ता ने बताया कि दो महीने पहले शहर में छह माह का एक शिशु संदिग्ध अवस्था में इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा था. वह मुंबई से कोलकाता आया था. अस्पताल में इलाज के बाद अब वह पूरी तरह से ठीक हो चुका है.

 पांच साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं सबसे ज्यादा प्रभावित- डॉ दासगुप्ता

डॉ दासगुप्ता ने बताया कि ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस संक्रमण आम तौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है. यह वायरस ज्यादातर सर्दियों के मौसम में होता है. इसके मुख्य लक्षण बुखार, खांसी, जुकाम और सांस लेने में तकलीफ हैं. कभी-कभी तकलीफ इतनी ज्यादा हो सकती है कि बच्चों को पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट में हाई फ्लो नेजल कैनुला, बाइपैप या सीपीएपी से सांस लेने में सहायता की जरूरत होती है. डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में दो महीने पहले पीआइसीयू में मेटान्यूमोवायरस संक्रमण से पीड़ित छह महीने के बच्चे का इलाज किया गया था. इस संक्रमण के लिए कोई एंटीवायरस उपचार की आवश्यकता नहीं है. अगर आपके बच्चे को तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में कठिनाई, दूध पीने में मुश्किल हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

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लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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