चुनाव आयोग की वेबसाइट में तकनीकी गड़बड़ी, ‘विचाराधीन’ हुए बंगाल के करोड़ों वोटर, TMC ने साधा निशाना

Updated at : 25 Mar 2026 8:55 PM (IST)
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Election Commission Technical Glitch Bengal TMC

एसआईआर के मुद्दे पर टीएमसी ने शेयर किया बंगाल का नक्शा, उस पर लिखा अंडर एडजुडिकेशन.

Election Commission Technical Glitch Bengal: पश्चिम बंगाल में निर्वाचन आयोग के सर्वर में आयी खराबी के कारण वैध मतदाताओं के नाम भी Under Consideration दिखने लगे. चुनाव आयोग ने जांच के आदेश दिये. तृणमूल कांग्रेस ने इलेक्शन कमीशन पर मतदाताओं को परेशान करने के आरोप लगाये. क्या है पूरा मामला, यहां पढ़ें.

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Election Commission Technical Glitch Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले डिजिटल मोर्चे पर एक बड़ी लापरवाही सामने आयी है. मंगलवार रात इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) की आधिकारिक वेबसाइट पर आई एक तकनीकी खराबी ने राज्य के करोड़ों मतदाताओं की धड़कनें बढ़ा दीं. अचानक सिस्टम में राज्य के लगभग सभी वैध मतदाताओं को ‘विचाराधीन’ (Under Consideration) श्रेणी में दिखाया जाने लगा. हालांकि, आयोग ने इसे एक सर्वर संबंधी त्रुटि बताते हुए सुधार लिया है, लेकिन इस घटना ने बंगाल की सियासी तपिश को और बढ़ा दिया है.

आधी रात को ‘वोटर लिस्ट’ का हाई वोल्टेज ड्रामा

सोमवार की आधी रात को पहली पूरक सूची जारी होने के महज 24 घंटे के भीतर यह गड़बड़ी सामने आयी. जब मतदाताओं ने अपना ईपीआईसी (EPIC) नंबर डालकर स्थिति जांचनी चाही, तो उन लोगों के नाम भी ‘विचाराधीन’ दिखने लगे, जिनके नाम अंतिम मतदाता सूची में पहले से ही कन्फर्म थे.

इलेक्शन कमीशन ने दी सफाई

इलेक्शन कमीशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को बताया कि यह समस्या सर्वर से जुड़ी एक तकनीकी गड़बड़ी थी. सिस्टम ने गलती से राज्य के सभी मतदाताओं को ‘विचाराधीन’ चिह्नित कर दिया. तकनीकी टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 2 घंटे के भीतर इस गड़बड़ी (Erorr) को ठीक कर दिया. आयोग अब इस खराबी के मूल कारणों की गहन जांच कर रहा है.

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पूरे बंगाल को बना दिया संदिग्ध – तृणमूल कांग्रेस

इलेक्शन कमीशन की साइट पर हुई इस तकनीकी चूक पर बंगाल की सत्तारूढ़ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने सोशल मीडिया के जरिये चुनाव आयोग को घेरते हुए आरोप लगाया कि इस ‘गलती’ ने प्रभावी रूप से बंगाल के पूरे मतदाता वर्ग को ही संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया. टीएमसी का कहना है कि वैध मतदाताओं और उन लोगों को भी ‘विचाराधीन’ दिखाना, जिनके मामले पहले ही सुलझ चुके हैं, मतदाताओं को मानसिक रूप से परेशान करने की साजिश है.

टीएमसी ने किया ये ट्वीट

टीएमसी ने इलेक्शन कमीशन पर निशाना साधते हुए कहा- आप खुद एक बार चेक करके देख लीजिए. निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर जाएं (https://electoralsearch.eci.gov.in/). अपना एपिक (EPIC) नंबर दर्ज करें. अपना SIR स्टेटस (Status) देख लें. भले आपको सुनवाई के लिए न बुलाया गया हो, भले अंतिम मतदाता सूची में आपका नाम पहले से मौजूद हो, या आप एक मैप्ड (Mapped) वोटर हों, या आपका मामला पूरक सूची में सुलझ चुका हो, अब आप अपना स्टेटस UNDER ADJUDICATION (विचाराधीन) पायेंगे.

टीएमसी ने आगे कहा कि चुनाव आयोग ने अपने पोर्टल पर पूरे बंगाल को ही ‘विचाराधीन’ घोषित कर दिया है. बंगाल का हर एक मतदाता अब UNDER ADJUDICATION है. टीएमसी ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को ‘वैनिश’ (गायब) कमीशन कहकर संबोधित करते हुए कहा कि वैनिश कमीशन और भाजपा ने मिलकर बंगाल की पूरी मतदाता सूची को संदिग्ध बना दिया है.

मतदाताओं में डर और आयोग का खेद

हालांकि, चुनाव आयोग ने इस असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले जनता के लिए यह केवल ‘तकनीकी खराबी’ नहीं है. विशेष रूप से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच ऐसी गड़बड़ी ने चुनाव आयोग की डिजिटल विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिये हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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