बंगाल चुनाव 2026: अब पोस्टल वोटिंग में नहीं होगी गड़बड़ी, इलेक्शन कमीशन ने कस दिये स्क्रू, जानें कैसी होगी व्यवस्था

Updated at : 09 Apr 2026 7:52 AM (IST)
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Election Commission New Postal Ballot Rules West Bengal Election 2026 News

Election Commission New Postal Ballot Rules: निर्वाचन आयोग ने पोस्टल बैलेट (डाक मतपत्र) के नियमों को सख्त किया. सीसीटीवी निगरानी, माइक्रो ऑब्जर्वर की तैनाती और CAPF के पहरे में होगा मतदान. घर ले जाने पर रोक.

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Election Commission New Postal Ballot Rules: चुनावी ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वोटरों के लिए निर्वाचन आयोग (ECI) ने नियमों को और कड़ा कर दिया है. इलेक्शन कमीशन ने पोस्टल बैलेट (डाक मतपत्र) मतदान प्रक्रिया को लेकर नये और बेहद सख्त दिशा-निर्देश जारी किये. अब डाक मतपत्र के जरिये होने वाली वोटिंग किसी सामान्य मतदान केंद्र से कम सुरक्षित नहीं होगी. आयोग ने साफ कर दिया है कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात मतदाता अब केवल निर्दिष्ट सुविधा केंद्रों (FC) पर ही अपना वोट डाल सकेंगे. बैलट पेपर घर ले जाने की अनुमति नहीं होगी. किसी और से बैलट पेपर मंगवा भी नहीं पायेंगे.

CCTV की नजर और CAPF का पहरा

निर्वाचन आयोग के नये फरमान में कहा गया है कि मतदान की गोपनीयता बनाये रखते हुए पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया जायेगा. प्रत्येक सुविधा केंद्र और डाक मतदान केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगाये जायेंगे. जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) इसकी ऑनलाइन निगरानी करेंगे. सुरक्षा व्यवस्था ऐसी होगी कि हर केंद्र के प्रवेश द्वार पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) का कम से कम आधा सेक्शन तैनात रहेगा. बिना अनुमति किसी को भी प्रवेश नहीं मिलेगा.

पर्यवेक्षकों को ‘ट्रिपल चेक’ की जिम्मेदारी

नये नियमों में अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गयी है. अब पर्यवेक्षकों (Observers) को वोटिंग के दिन हर केंद्र का कम से कम 3 बार दौरा करना होगा. क्या हैं नियम, यहां पढ़ें.

  • माइक्रो ऑब्जर्वर : प्रत्येक मतदान बूथ पर ग्रुप ‘बी’ स्तर के अधिकारी को माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया जायेगा.
  • मोबाइल बैन : मतदान केंद्रों के अंदर मोबाइल फोन ले जाने पर पाबंदी रहेगी. पर्यवेक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि इस नियम का पालन हो रहा है या नहीं.

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Election Commission New Postal Ballot Rules: नियम 18A का सख्त पालन

चुनाव संचालन नियम 1961 के नियम 18A का हवाला देते हुए चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा बनाये गये सुविधा केंद्रों पर ही मतपत्र प्राप्त करना, वोट दर्ज करना और उसे वापस करना अनिवार्य है. ये केंद्र मुख्य रूप से प्रशिक्षण स्थलों और रिटर्निंग अधिकारियों के कार्यालयों में बनाये गये हैं, ताकि प्रक्रिया सुव्यवस्थित रहे.

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चुनाव में गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त हुए नियम

निर्वाचन आयोग का यह कदम डाक मतपत्रों के जरिये होने वाली संभावित गड़बड़ियों को रोकने और पारदर्शिता को 100 प्रतिशत तक सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. 23 और 29 अप्रैल को होने वाले बंगाल चुनाव 2026 में इन नये नियमों का असर साफ देखने को मिलेगा.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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