सर्वोच्च सजा देने के राज्य सरकार के आवेदन पर सीबीआइ ने उठाये सवाल

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 23 Jan 2025 2:49 AM

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आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्रशिक्षु महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी संजय राय को सर्वोच्च सजा देने की मांग को लेकर राज्य सरकार की याचिका पर सीबीआइ ने सवाल उठाया है.

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आरजी कर मामला

संवाददाता, कोलकाता

आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में प्रशिक्षु महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी संजय राय को सर्वोच्च सजा देने की मांग को लेकर राज्य सरकार की याचिका पर सीबीआइ ने सवाल उठाया है. मामले में अभियुक्त संजय राय को आजीवन कारावास की सजा हुई है. मंगलवार को फांसी की सजा देने की मांग पर राज्य सरकार की ओर से कलकत्ता हाइकोर्ट में याचिका दायर की गयी. खंडपीठ ने मामले को स्वीकार कर लिया है. बुधवार को न्यायाधीश देबांग्शु बसाक व न्यायाधीश मोहम्मद शब्बार रशीदी की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई. सुनवाई की शुरुआत में ही राज्य सरकार द्वारा सर्वोच्च (फांसी) सजा देने के आवेदन पर सीबीआइ ने आपत्ति जतायी. सीबीआइ के अधिवक्ता ने कहा कि पीड़िता के परिजन, सीबीआइ या अभियुक्त यदि उच्च अदालत में नहीं जाता है तो राज्य सरकार कैसे यह आवेदन कर सकती है. सीबीआइ की इस दलील का राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्त व सरकारी वकील देवाशीष राय ने विरोध किया. न्यायाधीश बसाक ने कहा कि मामले की ग्रहणयोग्यता को लेकर सवाल उठा है. सीबीआइ की ओर से कहा गया है कि वह अपनी तरफ से उच्च अदालत में आवेदन करेगी. पीड़िता के परिजन भी आवेदन कर सकते हैं. यहां तक कि सजायाफ्ता संजय राय को यदि कुछ कहना है तो वह उच्च अदालत में आवेदन कर सकता है. इसके बाद न्यायमूर्ति बसाक ने राज्य सरकार से सवाल किया कि पीड़िता के परिवार को इस मामले की जानकारी है? अदालत के बाहर परिवार के लोगों ने क्या कहा है, इस पर हम कुछ नहीं कहेंगे. लेकिन उनके बिना न्याय प्रक्रिया को आगे बढ़ाना क्या संभव है. खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार का कहना है कि उपयुक्त सजा नहीं मिली है, इसे लेकर कौन-कौन मामला दायर कर सकता है. राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि पीड़िता के परिजन, राज्य सरकार, सीबीआइ व अभियुक्त. इसके बाद न्यायाधीश ने कहा कि पीड़िता के परिजन क्या कहना चाहते हैं, यदि उनकी बात भी सुनी जाये तो असुविधा क्या है. राज्य सरकार ने कहा कि ऑनलाइन जो निर्देशनामा अपलोड हुआ है, उस आधार पर ही मामला दर्ज किया गया है. सियालदह अदालत से मात्र तीन लोगों को ही सर्टिफाइड कॉपी दी गयी है, जिसमें सीबीआइ, पीड़िता के परिजन व अभियुक्त शामिल है. फिर राज्य सरकार स्वत:स्फूर्त आवेदन कर सकती है या नहीं, इसे लेकर सवाल उठ सकता है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के एक मामले को उदाहरण के रूप में पेश किया गया. इस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि लालू प्रसाद का मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा था. हाइकोर्ट ने पूरे मामले की जांच करने का निर्देश सीबीआइ को दिया था. लेकिन यह मामला पूरी तरह से अलग है. विशेष परिस्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने कानून के दायरे में यह कदम उठाया है. कानून के मुताबिक राज्य सरकार उच्च अदालत में जा सकती है. फौजदारी मामले में सजा बढ़ाने व घटाने का आवेदन करने का अधिकार है. सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि अगले सोमवार (27 जनवरी) को फिर से मामले की सुनवाई करेंगे. न्यायाधीश ने सोमवार को सीबीआइ, सजायाफ्ता संजय राय, पीड़िता के परिजन सहित सभी पक्षों को अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया.

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