राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल उल्लंघन पर ‘संग्राम’, राज्यसभा में ममता बनर्जी सरकार पर कार्रवाई की मांग

Published by :Mithilesh Jha
Published at :11 Mar 2026 10:26 PM (IST)
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BJP MP Demands Action Against West Bengal Govt

राज्यसभा में हंगामे के बाद कार्यवाही स्थगित.

BJP MP Demands Action Against West Bengal Govt: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बंगाल दौरे में प्रोटोकॉल उल्लंघन का मामला राज्यसभा में गूंजा. भाजपा सांसद बाबू राम निषाद ने इसे ‘संवैधानिक अपराध’ करार देते हुए अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई करने की मांग की है.

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BJP MP Demands Action Against West Bengal Govt: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान हुए कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन पर कोलकाता से दिल्ली तक संग्राम छिड़ गया है. बुधवार को राज्यसभा में इस मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बाबू राम निषाद ने इसे ‘चूक’ नहीं बल्कि ‘संवैधानिक अपराध’ करार दिया. शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए भाजपा सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की कि पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाये, ताकि कोई अन्य राज्य भविष्य में ऐसी हिमाकत न कर सके.

पश्चिम बंगाल पर अनुच्छेद 356 की तलवार!

सांसद बाबू राम निषाद ने दलील दी कि पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार का आचरण संविधान के अनुच्छेद 52 से 62, और अनुच्छेद 256 व 257 का खुला उल्लंघन है. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कोई राज्य सरकार जान-बूझकर राष्ट्रपति का अपमान करती है, तो इसे ‘संवैधानिक विफलता’ माना जाना चाहिए. निषाद ने मांग की कि ऐसी स्थिति में अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई की व्यवस्था हो और संबंधित अधिकारियों पर भी दंडात्मक कार्रवाई की जाये.

अनुच्छेद 356, 25 से 62, अनुच्छेद 256 और 257 को जानें

अनुच्छेदक्या है अनुच्छेद में
अनुच्छेद 356यह केंद्र सरकार को किसी राज्य में ‘राष्ट्रपति शासन’ लगाने की शक्ति देता है, यदि वहां का संवैधानिक तंत्र विफल हो जाये. इसे राज्य सरकार को बर्खास्त करने का सबसे शक्तिशाली और विवादित औजार माना जाता है.
अनुच्छेद 52 से 62ये अनुच्छेद भारत के ‘राष्ट्रपति’ के पद, उनकी योग्यता, चुनाव प्रक्रिया और कार्यकाल की व्याख्या करते हैं. इसमें राष्ट्रपति के महाभियोग (पद से हटाने की प्रक्रिया) और उनके पद की गरिमा के नियमों का उल्लेख है.
अनुच्छेद 256यह अनुच्छेद कहता है कि प्रत्येक राज्य अपनी शक्ति का प्रयोग संसद द्वारा बनाये गये कानूनों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए करेगा. सरल शब्दों में कहें, तो राज्यों की सरकारें केंद्र के कानूनों को लागू करने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य हैं.
अनुच्छेद 257इस अनुच्छेद के तहत केंद्र सरकार कुछ विशेष स्थितियों में राज्यों को निर्देश (Directives) दे सकती है, ताकि केंद्र की शक्ति में बाधा न आये. इसमें रेलवे और राष्ट्रीय महत्व के संचार साधनों की सुरक्षा के लिए राज्यों को निर्देश देना भी शामिल है.

राज्यसभा में तीखी नोक-झोंक

जैसे ही भाजपा सांसद ने यह मुद्दा उठाया, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के सदस्यों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया. जवाब में भाजपा के अन्य सदस्यों ने निषाद का पुरजोर समर्थन किया. सदन में इस ‘प्रोटोकॉल वॉर’ के चलते काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा.

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क्या था पूरा विवाद?

7 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बंगाल के दौरे पर थीं. तब प्रोटोकॉल के ‘ब्लू बुक’ नियमों के विपरीत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) वहां मौजूद नहीं थे. नियमों के मुताबिक, राष्ट्रपति के आगमन पर राज्य के इन शीर्ष पदों पर बैठे लोगों का उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर होना अनिवार्य है.

संसद में भाजपा और निषाद ने क्या कहा

  • संवैधानिक उल्लंघन : भाजपा ने इसे अनुच्छेद 52-62, 256 और 257 का सीधा उल्लंघन बताया.
  • कार्रवाई की मांग : राज्य सरकार के विवेकाधीन अनुदानों (Discretionary Grants) में कटौती की मांग की गयी.
  • नया कानून : संवैधानिक प्रमुखों के अपमान की स्थिति में विशेष कठोर कानून बनाने का सुझाव दिया गया.
  • राष्ट्रीय गौरव : राष्ट्रपति पद को 140 करोड़ भारतीयों के गौरव का प्रतीक बताते हुए गरिमा बनाये रखने पर जोर दिया गया.

चूक नहीं, संवैधानिक अपराध है

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा के दौरान जो हुआ, वह महज चूक नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अपराध है. जब राज्य सरकार जान-बूझकर सर्वोच्च पद की अवहेलना करती है, तो वह यह कैसे भूल जाती है कि उसने खुद संविधान की शपथ ली है?

बाबू राम निषाद, राज्यसभा सांसद, भाजपा

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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