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मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में तृणमूल नेता अनुब्रत की बेटी सुकन्या को मिली जमानत

Updated at : 11 Sep 2024 1:00 AM (IST)
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मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में तृणमूल नेता अनुब्रत की बेटी सुकन्या को मिली जमानत

तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल की बेटी सुकन्या मंडल को दिल्ली हाइकोर्ट ने जमानत दे दी. उन्हें पश्चिम बंगाल में मवेशी तस्करी रैकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने गिरफ्तार किया था.

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संवाददाता, कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल की बेटी सुकन्या मंडल को दिल्ली हाइकोर्ट ने जमानत दे दी. उन्हें पश्चिम बंगाल में मवेशी तस्करी रैकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने गिरफ्तार किया था. हाइकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मुकदमे के पूरा होने में लंबा समय लग सकता है. ऐसे में उन्हें हमेशा जेल में ही नहीं रख सकते.

26 अप्रैल 2023 से हिरासत में

सुकन्या मंडल 26 अप्रैल 2023 से हिरासत में हैं. न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि वह एक महिला हैं और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 के तहत जमानत की हकदार हैं.

हाइकोर्ट ने सुकन्या को 10 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की जमानत देने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि वह अदालत की अनुमति के बिना देश न छोड़ें और गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश न करें. हाइकोर्ट ने कहा कि आवेदक एक शिक्षित महिला हो सकती हैं, जिसका अपना व्यवसाय और वाणिज्यिक उद्यम हो, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि उसके खिलाफ आरोप अनिवार्य रूप से उसके पिता से जुड़े हैं और उसने अपने व्यावसायिक कामों में पिता के धन का उपयोग किया हो.

पीएमएलए की धारा 45 (1) के प्रावधान के अनुसार, कोई व्यक्ति, जो 16 वर्ष से कम आयु का है या महिला है या बीमार है (या जिस पर या तो अकेले या अन्य सह-आरोपियों के साथ एक करोड़ रुपये से कम की राशि के धन-शोधन का आरोप है) उसे जमानत पर रिहा किया जा सकता है.

सुकन्या मंडल ने इस आधार पर जमानत मांगी थी कि वह एक महिला हैं और कथित मवेशी तस्करी रैकेट में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) द्वारा दर्ज मामले में उसकी कोई संलिप्तता नहीं है. सुकन्या के वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि वह 31 वर्षीय अविवाहित महिला हैं और उनका इतिहास साफ-सुथरा है. उन्होंने तर्क दिया कि इडी को अब उनकी हिरासत की जरूरत नहीं है, क्योंकि जांच पूरी हो चुकी है और अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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