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प्रशासनिक कार्यों में आयेगी तेजी, ग्रामीण विकास पर जोर

Updated at : 17 Aug 2025 9:03 PM (IST)
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प्रशासनिक कार्यों में आयेगी तेजी, ग्रामीण विकास पर जोर

संयुक्त बीडीओ पद की स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए नयी नीति जारी

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संयुक्त बीडीओ पद की स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए नयी नीति जारी कोलकाता. पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग ने राज्य के ग्रामीण प्रशासन के स्तंभों में से एक संयुक्त बीडीओ पद की स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए नयी नीति जारी की है. विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर कहा है कि अब से संयुक्त बीडीओ के स्थानांतरण में स्पष्ट नियमों का पालन करना होगा. इससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आयेगी और स्थानांतरण से जुड़ीं विभिन्न अनैतिक गतिविधियों पर लगाम लगाना संभव होगा. राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में संयुक्त बीडीओ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. नियमित प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ जनहित में उनकी कई जिम्मेदारियां होती हैं. यह पद पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (डब्ल्यूबीसीएस) ग्रुप-सी कैडर में शामिल है. लंबे समय से इस पद के लिए कोई विशिष्ट स्थानांतरण नीति नहीं होने की शिकायतें मिल रही थीं. श्रमिक संगठनों ने किया बदलाव का स्वागत : वहीं, श्रमिक संगठनों के एक वर्ग ने एक विशिष्ट ढांचे में स्थानांतरण नीति लागू किये जाने का स्वागत किया है. तृणमूल कर्मचारी संघ के नेता मनोज चक्रवर्ती लंबे समय से इस नीति के कार्यान्वयन के लिए आंदोलन कर रहे थे. उन्होंने कहा : यह एक सराहनीय कदम है. तबादलों को लेकर इतने लंबे समय से चल रहीं सभी अनैतिक गतिविधियां अब बंद हो जायेंगी. सरकार को सभी संवर्गों में चरणबद्ध तरीके से स्थानांतरण नीति लागू करनी चाहिए. इस नयी स्थानांतरण नीति की मुख्य विशेषताओं में कई बातें जोड़ी गयी हैं. नयी स्थानांतरण नीति में कहा गया है कि संयुक्त बीडीओ का स्थानांतरण आमतौर पर हर तीन साल में किया जायेगा. पूरे राज्य को छह ज़ोन या वर्गों में विभाजित किया गया है. ”ए” से ”एफ” तक. इसमें दक्षिण बंगाल को चार वर्गों में और उत्तर बंगाल को दो वर्गों में विभाजित किया गया है. एक अधिकारी को अपने गृह नगर वाले वर्ग में कम से कम दो बार काम करने का अवसर मिलेगा. हालांकि, अपने ही जिले में काम करने का अवसर केवल एक विशेष राज्य-स्तरीय समिति की सिफारिश पर ही मिलेगा. उन्हें एक ही जिले या एक ही जोन में लगातार दो बार स्थानांतरित नहीं किया जा सकता. उन्हें सेवाकाल में एक बार घर के नजदीक किसी अंचल में काम करने का अवसर मिलेगा. किसी भी संयुक्त बीडीओ की सेवानिवृत्ति से एक वर्ष पहले तबादला नहीं किया जायेगा. तबादले के अलावा, संयुक्त बीडीओ चाहें, तो तीन साल के लिए किसी अन्य कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर भी जा सकते हैं. इस नयी नीति में उल्लेख है कि कम से कम आठ वर्षों के अनुभव वाले संयुक्त बीडीओ को राज्य मुख्यालय, जिला मुख्यालय या प्रशिक्षण केंद्रों में काम करने का अवसर दिया जायेगा. वह अपनी सेवा के दौरान कम से कम दो से तीन वर्षों तक ऐसी जगहों पर काम कर सकेंगे. परिणामस्वरूप, प्रशासनिक अनुभव और बढ़ेगा और कुशल कार्य का वातावरण बनेगा. राज्यस्तरीय तबादलों के मामले में विशेष छूट भी देगी. यदि किसी अधिकारी को कोई व्यक्तिगत या पारिवारिक आपात स्थिति होती है, तो उसके अनुसार निर्णय लिया जायेगा. यदि नयी तबादला नीति लागू होती है, तो न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि तबादलों को लेकर लंबे समय से चला आ रहा असंतोष भी कम होगा. इसके अतिरिक्त यह आशा की जाती है कि ग्रामीण विकास परियोजनाएं अधिक सुचारू रूप से क्रियान्वित होंगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANDIP TIWARI

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By SANDIP TIWARI

SANDIP TIWARI is a contributor at Prabhat Khabar.

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