कोलकाता : मेडिका में इलाज के दौरान लापरवाही, सीने में था दर्द, काट दिया पांव

Published at :16 Mar 2017 7:57 PM (IST)
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कोलकाता : मेडिका में इलाज के दौरान लापरवाही, सीने में था दर्द, काट दिया पांव

कोलकाता. कोलकाता स्थित मेडिका सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में रोगी सुनील पांडेय की मौत के मामले में छानबीन के लिए पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है. कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के कार्डियो थोरेसिक एंड वैस्कुलर साइंसेस (सीटीवीएस) विभागाध्यक्ष डॉ प्लान मुखर्जी, एसएसकेएम (पीजी) जनरल मेडिसीन विभाग के […]

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कोलकाता. कोलकाता स्थित मेडिका सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में रोगी सुनील पांडेय की मौत के मामले में छानबीन के लिए पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है. कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के कार्डियो थोरेसिक एंड वैस्कुलर साइंसेस (सीटीवीएस) विभागाध्यक्ष डॉ प्लान मुखर्जी, एसएसकेएम (पीजी) जनरल मेडिसीन विभाग के सौमित्र घोष तथा पीजी के ऑर्थोपेडिकल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ आनंद किशोर पाल जांच कमेटी में शामिल किये गये है. कमेटी को सात दिनों के भीतर स्वास्थ्य विभाग में रिपोर्ट पेश किये जाने का निर्देश दिया गया है. बुधवार को सुनील पांडेय के परिजनों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात कर न्याय की अपील की थी. सुश्री बनर्जी ने लापरवाही पाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था.

क्या था मामला
आरोप है कि सीने में दर्द की शिकायत लेकर कोलकाता स्थित मेडिका सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीज सुनील पांडेय मरीज के पांव का ऑपरेशन कर चिकित्सकों ने उसका पांव काट दिया. जिसके बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती गयी. पांव कटने के दो दिन बाद चिकित्सा के दौरान उसकी मौत हो गयी है. वह यादवपुर इलाके का रहने वाला है. इस घटना के बाद मृतक के परिवार वालों ने अस्पताल के चिकित्सकों के खिलाफ चिकित्सा में लापरवाही बरतने की शिकायत पूर्व यादवपुर थाने में दर्ज करायी है.
क्या कहना है मृतक रोगी के भाई का
मृतक सुनील पांडेय के भाई राजू पांडेय ने बताया कि सीने में दर्द की शिकायत लेकर सुनील को मेडिका अस्पताल में भरती किया गया था. अस्पताल में चिकिस्ता के दौरान उसकी एंजिओग्राफी की गयी. इसके बाद उसके बायें पांव में एक रडनुमा यंत्र बिठाया गया, इसके बाद से उसके पांव से रक्त का श्राव बंद नहीं हो रहा था. इसके कारण पांव में संक्रमण बढ़ता गया. जिसके बाद चिकित्सकों ने 11 मार्च को एक ऑपरेशन कर सुनील का पांव काट दिया. इसके बाद चिकित्सा के दौरान उसकी मौत हो गयी.
पत्नी की आरोप : होली के कारण छुट्टी पर थे डाॅक्टर
सुनील की पत्नी सुजाता पांडे का आरोप है कि मेरे पति को अस्पताल लाया गया था, उस समय उनकी तबीयत उतनी खराब नहीं थी. इसके अलावा होली का त्योहार होने के कारण अस्पताल में रविवार व सोमवार को अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक भी मौजूद नहीं थे. इसके कारण उसके पति का उचित इलाज नहीं हो सका. ऑपरेशन में पांव काटा गया, इसके बाद उसे उचित चिकित्सा नहीं मिली. इसके कारण ही उनके पति की मौत हुई.
पुलिस को अस्पताल से नहीं मिला कटे पांव का हिस्सा
पूर्व यादवपुर थाने के जांच अधिकारी बताते हैं कि जिस पैर को काटा गया, जांच के सिलसिले में वह पैर कब्जे में लेकर एसएसकेएम अस्पताल में उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजना है, लेकिन अस्पताल की तरफ से पैर डिस्पोस (नष्ट) कर देने की जानकारी दी गयी. लेकिन यह डिस्पोस किसके कहने पर हुई, इसका उन्हें जवाह नहीं मिल सका है. पुलिस ने अपनी जांच शुरु कर दी है. चिकित्सा से जुड़े अस्पताल के चिकित्सकों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजने की तैयारी की जा चुकी है. पुलिस जल्द लापरवाही से जुड़े आरोपियों तक पहुंचेगी.

क्या कहना है अस्पताल का
मेडिका का कहना है कि मरीज थ्रोमबस इम्बोलाइजेशन की शिकायत हुई थी. इस बीमारी में आट्री में रक्त का थक्का बन जाता है और रक्त स्त्राव होना बंद हो जाता है. इससे जहां रक्तस्त्राव नहीं होता है. वहां सुन्न हो जाता है तथा यह टॉक्सिक होते जाता है. इसके पूरे शरीर में फैलने की आशंका रहती है. इसे फैलने से रोकने के लिए पहले टॉक्सिक लाइन का निर्धारण किया जाता है. उसकी पहचान होने के बाद ही मरीज के पांव घुटने के नीचे ऑपरेशन कर काटने का निर्णय किया गया था. यह चिकित्सा विज्ञान की पद्धति को पालन कर ही किया गया.
ब्रेन डेथ किशोरी के इलाज का बनाया 5.15 लाख का बिल
एक दूसरे मामले में, महानगर के मेडिका अस्पताल के खिलाफ एक चिकित्सक ने अपनी बेटी की चिकित्सा में लापरवाही बरतने की शिकायत पूर्व यादवपुर थाने में शिकायत दर्ज करायी है. किशोरी के पिता व एनआरएस अस्पताल के डॉ. रामचंद्र भद्र ने का आरोप है कि मेरी 19 महीने की बच्ची ब्रेन डेथ की शिकार हो गयी थी. चिकित्सा के लिए बच्ची को लेकर मेडिका सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ले गये. वहां भी चिकित्सा के नाम में उसके पास पांच लाख 15 हजार 581 रुपये का बिल बनाया गया. लेकिन बेटी की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. इसके कारण वह चाहते हैं कि मेडिका अस्पताल के आरोपी चिकित्सकों के खिलाफ उचित कार्रवाई करे. पुलिस ने शिकायत दर्ज कर इस मामले की जांच भी शुरु कर दी है.
राज्य सरकार ने बनाया है नया कानून
निजी अस्पतालों में लापरवाही और अत्याधिक बिल लेने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निजी अस्पतालों के अधिकारियों के साथ बैठक में गहरी नाराजगी जतायी थी. निजी अस्पतालों पर लगाम लगाने के लिए तीन मार्च को विधानसभा में ‘दे वेस्ट बंगाल क्लीनिकल इस्टेबल्सिमेंट्स (रेजिस्ट्रेशन, रेग्युलेशन एंड ट्रांसपेरेंसी), बिल, 2017 किया गया था. इस विधेयक में लापरवाही व कानून के उल्लंघन करने पर 50 लाख रुपये तक जुर्माना और तीन साल तक का सजा का प्रावधान है तथा अस्पताल के खिलाफ फौजदारी मामला दायर करने तथा लाइसेंस रद्द करने तक का प्रावधान रखा गया है. फिलहाल विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हेतु विचाराधीन है. इस विधेयक में पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग गठन का प्रस्ताव है, जो शिकायतों पर विचार करेगा.
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