कोलकाता: महंगे स्मार्ट मोबाइल फोन और लैपटॉप के बढ़ते चलन के कारण इन दिनों इससे जुड़ीं घटनाएं भी आम हो गयी हैं. ट्रेनों में मोबाइल फोन की छिनताई आम हो चली है. हावड़ा और सियालदह रेलवे स्टेशन क्षेत्र में आये दिन मोबाइल छिनताई से जुड़े अपराध हो रहे हैं. इन दिनों ट्रेनों व रेलवे स्टेशनों पर एक नया गिरोह सक्रिय है, जो यात्रियों को ब्रांडेड एंड्रायड मोबाइल सेट कम कीमत पर बेचने के बहाने ठग रहा है.
कई बार गिरोह के लोग यात्रियों को उनके पुराने मोबाइल फोन के बदले महंगे मोबाइल सेट देने का लालच देकर अपने चंगुल में फंसाते हैं. जब यात्री उनके चंगुल में फंस जाता है, तो गिरोह के लोग बड़ी चालाकी से उसे डमी मोबाइल फोन देकर यात्री के रुपये या पुराने मोबाइल फोन लेकर फरार हो जाते हैं. इस गिरोह के लोग खासकर ऐसे लोगों को अपना शिकार बनाते हैं, जो कम पढ़े-लिखे हों या फिर उन्हें जल्दबाजी में ट्रेन पकड़नी है. नाम नहीं छापने की शर्त पर आरपीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले दिनों हावड़ा स्टेशन पर ऐसे एक गिरोह के सदस्य को पकड़ा गया था, लेकिन साक्ष्य के अभाव में उसे छोड़ देना पड़ा.
कैसे बनाते हैं शिकार
इस गिरोह के इनफॉर्मर स्टेशनों के प्रवेश द्वार, पार्किंग एरिया, टिकट काउंटर और प्लेटर्म पर खड़े रहते हैं, जो स्टेशन पर आनेवाले यात्रियों पर बारिकी से नजर रखते हैं. उनकी नजर यात्रियों के मोबाइल फोन पर होती है. जब कोई कम पढ़ा-लिखा या सीधा-सादा व्यक्ति कीमती मोबाइल के साथ नजर आता है, तो गिरोह के लोग उस पर नजर रखने लगते हैं. यात्री किसके साथ, किस ट्रेन में और कहां तक जायेगा, इसकी पूरी जानकारी इकट्ठा करने का प्रयास करते हैं. जानकारी एकत्रित होने के बाद गिरोह का दूसरा सदस्य यात्री के साथ मेल-जोल बढ़ाता है. इस दौरान गिरोह का सदस्य अपना मोबाइल यात्री को दिखाता है और उससे कम कीमत पर बेचने का ऑफर देता है. सौदा तय होते ही गिरोह का सदस्य यात्री से रुपये लेकर यात्री को असली मोबाइल की जगह डमी मोबाइल फोन दे देता है. हालांकि मोबाइल पैकेट में फोल्ड रहता है. जब तक यात्री पैकेट को खोलने में व्यस्त होता है, तब तक नजर बचा कर नकली मोबाइल गिरोह के लोग नौ-दो ग्यारह हो जाते हैं. गिरोह के लोगों के पास बड़ी संख्या में डमी मोबाइल पैकेट में पैक रहता है. यात्रियों को कीमती नया मोबाइल दिखा कर मात्र दो से तीन हजार रुपये में बेचने का ऑफर दिया जाता है.
राजकीय रेल पुलिस अनजान
हावड़ा मंडल जीआरपी के पुलिस अधिक्षक नीलाद्री चक्रवर्ती ने बताया कि इस तरह के किसी भी गिरोह के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है. हालांकि उन्होंने इसके बारे में जानकारी लेने का आश्वासन जरूर दिया.
हावड़ा-मुगलसराय व सियालदह-मुगलसराय मार्ग पर सक्रिय
गिरोह के सदस्य हावड़ा, बर्दवान और सियालदह रेलवे स्टेशनों पर वारदात को अंजाम देते हैं. इसके अलावा हावड़ा-मुगलसराय व सियालदह-मुगलसराय रेल मार्ग की ट्रेनों के यात्रियों को भी अपना शिकार बनाते हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस तरह के गिरोह के लोंगों का ठिकाना मटियाबुर्ज, हावड़ा, बर्दवान, सियालदह और मुगलसराय के आपपास के इलाकों में है. हालांकि यह गिरोह अभी नया है, लेकिन कम समय में ही कई यात्रियों को अपना शिकार बना चुका है.