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शानदार जीत से निगम ने शुरू की दूसरी पारी

कोलकाता : शहरवासियों को जल आपूर्ति, साफ-सफाई, निकासी व्यवस्था, प्राथमिक स्वास्थ्य व प्राथमिक शिक्षा, बस्ती विकास जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्थापित कोलकाता नगर निगम के इस वर्ष के कामकाज का अगर लेखा-जोखा निकाला जाये तो शायद ही कुछ ऐसी बातें सामने आये, जो याद रखने लायक हो. हालांकि यह वर्ष राजनीतिक रूप […]

कोलकाता : शहरवासियों को जल आपूर्ति, साफ-सफाई, निकासी व्यवस्था, प्राथमिक स्वास्थ्य व प्राथमिक शिक्षा, बस्ती विकास जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्थापित कोलकाता नगर निगम के इस वर्ष के कामकाज का अगर लेखा-जोखा निकाला जाये तो शायद ही कुछ ऐसी बातें सामने आये, जो याद रखने लायक हो. हालांकि यह वर्ष राजनीतिक रूप से निगम में तृणमूल के लिए बेहद यादगार रहा, जिसने इस वर्ष हुए निगम चुनाव में जबरदस्त कामयाबी हासिल कर दोबारा बोर्ड का गठन किया.
चुनावी साल रहा 2015 : साल की शुरुआत के साथ ही निगम में चुनाव की गतिविधियां तेज हो गयी थीं. लोग जहां एक आेर 2015 का स्वागत कर रहे थे, वहीं राजनेता चुनावी रणनीति तय करने में लगे हुए थे. जोका एक व दो ब्लॉक के निगम में जुड़ने के बाद पहली बार निगम के 144 वार्ड के लिए मतदान हुआ. 18 अप्रैल को हुए मतदान में तृणमूल कांग्रेस ने जबरदस्त जीत हासिल करते हुए कुल 144 में से 114 वार्ड पर कब्जा जमा लिया, जबकि वाममोरचा के खाते में केवल 15 सीटें आयीं. बंगाल में परिवर्तन का नारा देने वाली भाजपा की इस चुनाव में हवा निकल गयी आैर उसे मात्र सात सीटों पर ही संतोष करना पड़ा. कांग्रेस ने किसी तरह पांच सीटें जीतीं, जबकि तीन निर्दल भी इस चुनाव में कामयाब रहे.
शोभन फिर बने मेयर : निगम चुनाव के जीत के नायक रहे शोभन चटर्जी को इस शानदार सफलता के लिए इनाम के रूप में दोबारा मेयर की कुर्सी मिली, वहीं चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़ कर तृणमूल में शामिल हुईं माला राय ने निगम की पहली महिला चेयरपर्सन होने का गौरव हासिल किया. श्री चटर्जी ने अपने पिछले मेयर परिषद में कोई अधिक परिवर्तन नहीं किया. एक-दो को छोड़ कर उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल के मेयर परिषद को ही बनाये रखा.
विपक्षी दलों में लगी सेंध : 144 में से 114 सीट जीतनेवाली तृणमूल को निगम के संचालन में किसी दल के सहयोग की जरूरत पड़नेवाली नहीं है, पर इसके बावजूद तृणमूल ने विपक्षी दलों में सेंध लगा ही दी. सबसे पहले तो तीनों निर्दल पार्षद तृणमूल में शामिल हुए. उसके बाद भाजपा के दो पार्षद भी तृणमूल के हो गये. गार्डेनरीच इलाके से कामयाब हुईं कांग्रेस की एक महिला पार्षद ने भी तृणमूल का दामन थाम लिया.
नहीं मिली किसी दल को विपक्ष की हैसियत : किसी भी दल को विपक्ष की हैसियत नहीं मिली. नियमानुसार विपक्ष की हैसियत हासिल करने के लिए कुल सीटों के दस प्रतिशत सीट पर जीत हासिल करनी होगी. इस चुनाव में किसी भी दल ने यह कारनामा अंजाम नहीं दिया था. हालांकि वाममोरचा का कहना था कि हम लोग दल विशेष के रूप में नहीं, बल्कि मोरचा के रूप में चुनाव लड़ते हैं. इस चुनाव में हम लोगों ने 15 सीट जीती हैं, इसलिए हमें विपक्ष की हैसियत दी जाये, पर तृणमूल बोर्ड ने इस मांग को ठुकरा दिया.
म्यूनिसिपल अकाउंट्स कमेटी के चेयरमैन का पद सत्ता पक्ष के पास : कोलकाता नगर निगम की परंपरा रही है कि म्यूनिसिपल अकाउंट्स कमेटी के चेयरमैन का पद हमेशा विपक्ष को दिया जाता है, पर इस बार म्यूनिसिपल अकाउंट्स कमेटी के चेयरमैन का पद भी तृणमूल ने अपने पास ही रख लिया. वर्षों बाद कमेटी के लिए चुनाव हुए, जिसमें तृणमूल के पांच और कांग्रेस व वाममोरचा के एक-एक सदस्य कामयाब हुए.
व्हाट्सएप का लिया सहारा : सोशल नेटवर्किंग साइट व्हाट्सएप एक बेहद मजबूत माध्यम बन कर उभरा है. इसकी ताकत व पहुंच को देखते हुए निगम ने भी लोगों की शिकायतें सुनने के लिए इसका सहारा लिया. निगम के कुछ विभागों के कामकाज के बारें में शिकायतें व प्रस्ताव दर्ज करवाने के लिए निगम ने एक व्हाट्सअप नंबर जारी किया.
बिल्डिंग प्लान, ट्रेड लायसेंस व फूड लायसेंस हुआ ऑनलाइन : निगम के कामकाज में स्वच्छता लाने के लिए 2015 में निगम प्रशासन ने बिल्डिंग प्लान, ट्रेड लायसेंस व फूड लायसेंस को ऑनलाइन कर दिया. अब कहीं से भी लोग बिल्डिंग प्लान, ट्रेड लायसेंस व फूड लायसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं. यह प्रक्रिया शुरू होने के बाद लोगों को बार-बार निगम के दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंग. निगम का मानना है कि इससे कामकाज में आसानी होने के साथ-साथ लोगों को दलालों के चंगुल से बचाने में भी सहायता मिलेगी.
बस्तियों का हुआ सर्वे : कोलकाता 300 से अधिक पुराना शहर है. इस अवधि में शहर में काफी बदलाव आये हैं, पर अभी भी महानगर की बस्तियों की हालत में कोई खास फर्क नहीं आया है. यह सच्चाई स्वयं निगम द्वारा करवाये गये एक सर्वे से सामने आया. इस सर्वे के अनुसार महानगर में लगभग 4000 बड़ी-छोटी बस्तियां हैं. जहां अभी भी बुनियादी सुविधाआें का भारी अभाव है.
डेंगू व मलेरिया पर काफी हद तक नियंत्रण: हाल के दिनों में महानगर में डेंगू से कुछ मौतें हुई हैं. हालांकि निगम का स्वास्थ्य विभाग इस बात से इंकार कर रहा है. पर इस सच्चाई से किसी को भी इंकार नहीं है कि महानगर में डेंगू व मलेरिया के प्रकोप में भारी कमी आयी है.
आर्थिक स्थिति अभी भी खस्ता: तृणमूल ने निगम में अपनी दूसरी पारी की शुरूआत तो कर दी है, पर पिछले कार्यकाल की तरह इस बार भी निगम की आर्थिक हालत में सुधार की कोई कोशिश कारगर नहीं हुई है. आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण इस वर्ष भी निगम के सभी विभागों के बजटीय खर्च के 40-60 प्रतिशत रकम के खर्च पर रोक लगी हुई है.
कमजोर विपक्ष : 2015 में कोई खास उपलब्धि नहीं होने के बावजूद तृणमूल को निगम के संचालन में किसी तरह की दिक्कत नहीं आ रही है. इसका एक सबसे बड़ा कारण विपक्ष का कमजोर होना है. चुनाव में मिली हार ने पहले ही विपक्ष की हालत खराब कर दी थी, ऊपर से चुनाव के बाद कई विपक्षी दलों के पार्षदों के तृणमूल में जाने से विपक्ष की सेहत आैर भी खराब हो गयी है. विपक्षी दलों को हर वक्त अपने अंदर टूट-फूट का खतरा सताये रखता है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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