अच्छा उत्पादन किसी भी किसान के चेहरे पर हंसी ले आता है, पर राज्य में इस वर्ष आलू का अत्यधिक उत्पादन किसानों के लिए जी का जंजाल बन गया है. उत्पादन तो अधिक हुआ है, पर आलू की सही कीमत नहीं मिल रही है. फलस्वरूप खेती के लिए लिये गये कर्ज का बोझ इतना बढ़ गया है कि अब तक राज्य में कई किसान आत्महत्या कर चुके हैं. हालांकि सरकार ने इस स्थिति से किसानों को बचाने के लिए कुछ उपाय भी किये हैं, पर अभी तक उन उपायों का फायदा होता नहीं दिख रहा है. राज्य में प्रत्येक वर्ष आलू का उत्पादन – 65 लाख मैट्रिक टन इस वर्ष हुआ आलू का उत्पादन – 1 करोड़ 20 लाख मैट्रिक टनआलू उत्पादन में इजाफा – 15 प्रतिशतमुख्य आलू उत्पादक जिले – 5राज्य में आलू के लिए कोल्ड स्टोरज की संख्या- 357आलू रखने की क्षमता – 5091242.79 मैट्रिक टनकोल्ड स्टोरेज की कमी के कारण किसानों को औने-पौने दाम पर अपना आलू बेच देना पड़ता है. इस स्थिति में ग्राहक भी नहीं मिलते हैं. सरकार ने आलू की बिकवाली को प्रोत्साहन देने के लिए दस करोड़ रुपये का एक फंड शुरू किया है. अन्य जिलों एवं विदेशों तक आलू भेजने वाले व्यवसायियों को प्रोत्साहित करने के लिए भी राज्य सरकार ने कुछ छूट की घोषणा की है. इसके अलावा किसानों से पांच रुपये प्रति किलो की दर से आलू खरीद कर सरकार अपने सूफल बाजारों में भी बेच रही है. पर इन कदमों के बावजूद अभी तक स्थिति नियंत्रण में नहीं आयी है.
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अत्यधिक आलू उत्पादन बना किसानों के लिए जंजाल
अच्छा उत्पादन किसी भी किसान के चेहरे पर हंसी ले आता है, पर राज्य में इस वर्ष आलू का अत्यधिक उत्पादन किसानों के लिए जी का जंजाल बन गया है. उत्पादन तो अधिक हुआ है, पर आलू की सही कीमत नहीं मिल रही है. फलस्वरूप खेती के लिए लिये गये कर्ज का बोझ इतना बढ़ […]
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Prabhat Khabar Digital Desk
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