2020 से शुरू होगी 5वीं व 8वीं में पास-फेल प्रथा
Updated at : 25 Oct 2019 1:25 AM (IST)
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फेल होने पर स्कूल विद्यार्थियों को एक और अवसर देगा कोलकाता : 2020 से पश्चिम बंगाल के सभी सरकारी स्कूलों में पांचवीं व आठवीं कक्षा में फिर से पास-फेल प्रथा शुरू होगी. इसको लेकर गुरुवार को राज्य के शिक्षा मंत्री ने एक बैठक शिक्षा अधिकारियों के साथ की. नये शैक्षणिक सत्र से यह प्रणाली शुरू […]
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फेल होने पर स्कूल विद्यार्थियों को एक और अवसर देगा
कोलकाता : 2020 से पश्चिम बंगाल के सभी सरकारी स्कूलों में पांचवीं व आठवीं कक्षा में फिर से पास-फेल प्रथा शुरू होगी. इसको लेकर गुरुवार को राज्य के शिक्षा मंत्री ने एक बैठक शिक्षा अधिकारियों के साथ की. नये शैक्षणिक सत्र से यह प्रणाली शुरू होगी. अब तक की शिक्षा व्यवस्था में कक्षा एक से आठवीं तक के लिए ‘नो डिटेंशन’ नीति से ही बच्चों को पास किया जा रहा था.
यानि कि कोई विद्यार्थी आठवीं तक फेल नहीं होगा. अब इसमें बदलाव करते हुए राज्य सरकार ने यह घोषणा की है कि कक्षा पांचवीं व आठवीं में पास-फेल प्रथा शुरू होगी. इसकी घोषणा राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने नैतिक रूप से फैसला ले लिया है. यह नियम 2020 से लागू होगा. जल्द ही राज्य सचिवालय नवान्न भवन से इस विषय को लेकर एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की जायेगी.
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव के पहले केंद्र सरकार की ओर से राज्यों के पास सिफारिश भेजी गयी थी कि राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत स्कूलों में ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ हटा कर पास-फेल प्रथा शुरू की जाये. अब यह राज्य सरकार पर है कि वे इसे किस तरह व कब लागू करती है. फरवरी, 2019 में इसकी एक गाइडलाइन केंद्र की ओर से जारी की गयी थी. इसके लिए राज्य सरकार ने एक पांच सदस्यीय कमेटी बनायी थी. इस कमेटी की हेड सोमा बंद्योपाध्याय को बनाया गया. जुलाई महीने में कमेटी ने अपनी रपट शिक्षा विभाग को भेज दी थी. 34 पन्नों की रिपोर्ट में साल में तीन बार परीक्षा लेने के साथ शिक्षकों की भूमिका पर भी टिप्पणी की गयी थी.
इस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री के पास भेजा गया था. इन दो कक्षाओं में परीक्षा में सफल नहीं होने वाले छात्रों को दो महीने तक विशेष कक्षा लेकर उनकी फिर से परीक्षा लेने का प्रावधान किया गया है. हालांकि दक्षिण भारतीय राज्य जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र आदि में अभी भी कक्षा 8वीं तक सभी बच्चों को स्कूल में पास किया जाता है. वहां ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ ही चल रही है.
इस विषय में बंगीय शिक्षा ओ शिक्षा कर्मी समिति के सह सचिव सपन मंडल का कहना है कि राज्य सरकार के इस फैसले से संगठन सहमत नहीं है. 5वीं कक्षा में बच्चे को फेल कर देने से पढ़ाई के प्रति बच्चे में डर बैठ जायेगा, इससे स्कूलों में ड्रापआऊट की संख्या बढ़ जायेगी. पहले पास-फेल को हटाने के पीछे दूसरे कारण थे, सरकार उन जड़ों पर काम नहीं कर रही है. स्कूलों में बेसिक सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए.
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