आज मनाया जायेगा ‘इंटरनेशनल डे ऑफ ट्राइब्स’
Updated at : 09 Aug 2019 2:13 AM (IST)
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आदिवासियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इबरॉड की नयी पहल तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में आठ राज्यों के आदिवासी भाग लेंगे कोलकाता : पश्चिम बंगाल में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में आदिवासी इलाके हैं, जहां आदिवासियों के जीवन यापन के लिए क्लाइमेट चेंज एक बहुत बड़ी चुनाैती है. इसके अलावा वनों की कटाई, जैविक […]
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आदिवासियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इबरॉड की नयी पहल
तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में आठ राज्यों के आदिवासी भाग लेंगे
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में आदिवासी इलाके हैं, जहां आदिवासियों के जीवन यापन के लिए क्लाइमेट चेंज एक बहुत बड़ी चुनाैती है. इसके अलावा वनों की कटाई, जैविक विविधता की क्षति, जल की कमी, संदूषण व खाद्य संरक्षण आदिवासी समुदाय के लिए एक ग्लोबल चुनाैती है. आदिवासियों के विकास के लिए व उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए इबराॅड (इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ बायो-सोशल रिसर्च एंड डेवलपमेंट), आरकेवीवाइ (राष्ट्रीय कृषि विकास योजना) के तहत कई विकास कार्य कर रहा है.
इबराॅड एक ऐसा संस्थान है, जो वन क्षेत्रों में रहनेवाले आदिवासी समुदाय व हाशिये पर गये लोगों के विकास के लिए अनुकरणीय मॉडल तैयार कर उन्हें स्वनिर्भर बना रहा है. यह जानकारी गुरुवार को प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में इबरॉड (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बायो-सोशल रिसर्च एंड डेवलपमेंट) के चैयरमेन प्रो. एसबी राय व इबरॉड की कार्यकारी निदेशक रक्तिमा मुखोपाध्याय ने दी. उनका कहना है कि आदिवासी समुदाय के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आर्गेनिक खेती व जैविक खेती की ट्रेनिंग के साथ मछली पालन, पशु पालन की भी सुविधा दी जा रही है. इसमें महिलाएं भी प्रशिक्षण लेकर रोजगार हासिल कर रही हैं.
उनका कहना है कि समाज में सकारात्मक बदलाव तभी आयेगा, जब आदिवासी व पिछड़े समुदाय का कल्याण होगा. इसी को ध्यान में रख कर बांकुड़ा, झारग्राम व दक्षिण 24 परगना के आदिवासी पिछड़े ग्रामीण इलाकों में किसानों को भी आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है. ऑर्गेनिक खेती के जरिये आदिवासी छोटे उद्यमी के रूप में उभर रहे हैं. बेहतरीन कार्यों के लिए केंद्र सरकार के ट्राइबल अफेयर्स के मंत्रालय द्वारा इबरॉड को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा दिया गया है. नौ अगस्त को ‘इंटरनेशनल डे ऑफ ट्राइब्स’ के रूप में मनाया जायेगा. इसके लिए स्थायी प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर संस्थान के कैम्पस (केष्टोपुर) तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया है. इसमें देश के आठ जिलों के आदिवासी भाग लेंगे.
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