ममता नहीं, पहले ज्योति बसु भाजपा को बंगाल लाये : पार्थ
Updated at : 28 Apr 2019 1:20 AM (IST)
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कोलकाता : कलकत्ता प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस से मिलिये कार्यक्रम में पूछे गये एक सवाल के जवाब में राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि जो लोग सांप्रदायिक शक्ति के रूप में पहचान बनानेवाली भाजपा को बंगाल में लाने के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेवार बताते हैं, वे लोग ये क्यों भूल […]
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कोलकाता : कलकत्ता प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस से मिलिये कार्यक्रम में पूछे गये एक सवाल के जवाब में राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि जो लोग सांप्रदायिक शक्ति के रूप में पहचान बनानेवाली भाजपा को बंगाल में लाने के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेवार बताते हैं, वे लोग ये क्यों भूल जाते हैं कि पहली बार ब्रिगेड परेड मैदान में ज्योति बसु ने अटल बिहारी वाजपेयी का हाथ पकड़ कर फोटो खिंचवाया था. ऐसे में यह आरोप ममता बनर्जी या तृणमूल पर लगाने का क्या तुक है.
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी शुरू से ही भाजपा के खिलाफ विरोधी दलों को लामबंद करने के लिए एकजुट करती रही हैं. उन्होंने साफ कहा था कि जो पार्टी जहां मजबूत है, वह वहां लड़े. भाजपा के खिलाफ विपक्ष का एक उम्मीदवार खड़ा करने की बात थी. लेकिन कांग्रेस और वामपंथियों ने इस प्रयास पर पानी फेर दिया. इसका मतलब यह नहीं है कि हमलोग प्रयास करना छोड़ दें.
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जिस तरह से माकपा के कार्यकर्ता भाजपा में जा रहे हैं, उससे साफ हो गया है कि आनेवाले दिनों में माकपा के दिग्गज नेता भी भाजपा में शामिल हो जायेंगे. माकपा के राज्य सचिव व पोलित ब्यूरो के सदस्य सूर्यकांत मिश्र ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ साठगांठ है. तृणमूल भाजपा को आठ सीट देना चाहती थी, लेकिन भाजपा 12 सीट मांग रही थी. इसलिए बात नहीं बनी. जवाब में उन्होंने कहा कि आनेवाले दिनों में सूर्यकांत मिश्रा खुद भाजपा में शामिल हो गये, तो किसी को आश्चर्य नहीं होना पड़ेगा, क्योंकि जिस तरह से माकपा के बड़े नेता सब भाजपा में शामिल हो रहे हैं, उससे यह साबित होता है कि आनेवाले दिनों में इस पार्टी का कोई नाम लेनेवाला नहीं रहेगा.
उन्होंने कहा कि पूरे देश में भाजपा के खिलाफ लड़नेवाले नेताओं के अगर नाम पूछे जायें, तो ममता बनर्जी का नाम सबसे पहले आता है. पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और वाममोर्चा ने भाजपा की सुविधा के लिए अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला लिया, ताकि भाजपा के लिए राह आसान हो जाये. लेकिन बंगाल की जनता समझदार है और वह यहां की सभी 42 लोकसभा सीटें तृणमूल कांग्रेस को देगी, ताकि ममता बनर्जी केंद्र में भाजपा के खिलाफ लड़ाई लड़ सकें.
राज्य में हुए तीन चरणों के चुनाव पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव शांतिपूर्ण रहा है. हिंसा की कुछ छिटपुट घटनाएं हो रही हैं. हालांकि यह नहीं होना चाहिए. मैं हिंसा की राजनीति के पक्ष में नहीं हूं.
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