कोलकाता : परीक्षा केंद्र पर छात्रों को मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, कैलक्यूलेटर लाने की अनुमति नहीं

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Feb 2019 5:57 AM

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कोलकाता : माध्यमिक परीक्षा 12 फरवरी से शुरू हो रही है. राज्य के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है. बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि जिन स्कूलों में माध्यमिक परीक्षा के सेंटर होंगे, वहां स्कूल के गेट पर एक पोस्टर लगा होना चाहिए. पोस्टर पर साफ अक्षरों में यह […]

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कोलकाता : माध्यमिक परीक्षा 12 फरवरी से शुरू हो रही है. राज्य के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है. बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि जिन स्कूलों में माध्यमिक परीक्षा के सेंटर होंगे, वहां स्कूल के गेट पर एक पोस्टर लगा होना चाहिए. पोस्टर पर साफ अक्षरों में यह लिखा होगा कि परीक्षार्थियों को मोबाइल, इलोक्ट्रॉनिक गैजेट्स व कैलक्यूलेटर परीक्षा केन्द्र में लाने की इजाजत नहीं है. इस नियम का सभी परीक्षार्थियों को पालन करना होगा.

साथ ही परीक्षा के समाप्त होने तक बोर्ड के सभी कंट्रोल रूम खुले रहेंगे. इसके लिए बोर्ड ने कंट्रोल रूम नंबर जारी किये हैं. ये नंबर, 033-2321-3872, 033-2359-2278, 033-2321-3089 हैं. किसी भी समस्या में आने पर विद्यार्थी या अभिभावक इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं.
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली ने बताया कि माध्यमिक परीक्षा केंद्रों से जुड़े 8 मुख्य संस्थानों की सूची बुधवार को भेजी गयी है. इस साल लगभग 1.1 मिलियन विद्यार्थी परीक्षा में बैठेंगे. इसके लिए लगभग 2700 परीक्षा केन्द्र बनाये गये हैं. परीक्षा केंद्रों पर कोई गड़बड़ी या अप्रिय घटना रोकने के लिए इस बार कड़े नियम बनाये गये हैं.
ड्यूटी पर तैनात स्कूल के शिक्षक व गैर-शिक्षक कर्मी को अपना मोबाइल स्विच ऑफ करके रखना होगा. उनको अपना मोबाइल संस्थान के हैड को जमा करवाना होगा. कोई भी शिक्षक इसका प्रयोग नहीं कर सकता है. बोर्ड के अध्यक्ष ने बताया कि परीक्षा के पूरे दिन मोबाइल फोन ताला व चाबी में बंद रहेगा. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की यह योजना है कि किसी भी तरह की अप्रिय घटना या मोबाइल पर कोई शरारती तत्व गत वर्ष की तरह पेपर मोबाइल पर लीक न कर पाये. परीक्षा में किसी को भी कोई गड़बड़ी करने का माैका नहीं मिल पायेगा.
ऐसी व्यवस्था बोर्ड ने की है. परीक्षा-स्थल पर केवल परीक्षा केन्द्र के कार्यालय इनचार्ज, केन्द्र के इन्चार्ज, परीक्षा-केन्द्र के सचिव के रूप में माैजूद स्कूल प्रमुख, स्थल-सुपरवाइजर, अतिरिक्त स्थल सुपरवाइजर ही परीक्षा के दाैरान, फोन पर बात कर सकते हैं. ये अधिकारी भी इस फोन का प्रयोग केवल परीक्षा से जुड़े मामलों पर बोर्ड अधिकारियों से संवाद करने के आपातकालीन स्थिति में कर सकते हैं. प्रश्नपत्र के पैकेट, परीक्षा हॉल में परीक्षार्थियों के समक्ष ही सुबह 11.40 पर खोले जायेंगे.
गत साल की तरह इस बार भी स्कूल के स्ट्रोंग रूम में प्रश्नपत्र रखे जायेंगे. परीक्षा के आधे घंटे पहले ही प्रश्नपत्र के पैकेट्स की सील खोली जायेगी. सभी पेपर नये पैकेट में रिलीज किये जायेंगे, जो परीक्षा केन्द्र में परीक्षा शुरु होने के 15 मिनट पहले ही खोले जायेंगे. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी निर्देशों में यह भी कहा गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में कोताही बरतने वाले या बाधा पहुंचाने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी. चाहे वे किसी भी रूप में जुड़े रहे हो. परीक्षा शांतिपूर्ण बिना किसी गड़बड़ी के सम्पन्न हो जायें, इसके लिए सभी को कड़े निर्देश जारी किये गये हैं. नियम का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी.
स्कूलों को प्रतिदिन का रुटीन माध्यमिक बोर्ड को भेजना होगा
कोलकाता : पश्चिम बंग माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सभी अनुदान प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के प्रमुख को इस बात का खुलासा करने के लिए कहा है कि उन्होंने 2019 के एकेडमिक सत्र के लिए प्रतिदिन का रुटीन बोर्ड को अब तक क्यों नहीं भेजा. राज्य के सभी स्कूलों को इससे पहले नोटिस भेजा गया था कि वे प्रतिदिन का रूटीन बोर्ड में भेजें. इस नियम को अभी तक स्कूल गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. इसी को ध्यान में रख कर बोर्ड ने फिर से इसका स्पष्टीकरण स्कूलों से मांगा है कि वे प्रतिदिन का रूटीन जमा करवायें. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के इस फरमान से कई हेडमास्टर नाराज हैं. उनका कहना है कि यह स्कूलों का इंटरनल मामला है.
काैन स्कूल में किस शिक्षक या शिक्षिका ने कितनी क्लास ली या कितने घंटे क्लास चली, यह स्कूल का प्रबंधन या हेडमास्टर व्यवस्थित करे
गा, इसको लेकर बोर्ड ने निर्देश जारी किये हैं, यह सीधे ताैर पर शिक्षकों पर दबाव डालने की प्रक्रिया है. कुछ का कहना है कि कुछ शिक्षक संगठन अपनी वित्तीय मांगें सरकार के सामने रखते हैं, सरकार उनको पूरा करने में सक्षम नहीं है. अब इन मांगों को दरकिनार करके स्कूल व शिक्षकों पर दबाव डाला जा रहा है. गाैरतलब है कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से लगभग 15,000 माध्यमिक स्कूलों को एक निर्देश जारी कर यह कहा है कि वे प्रतिदिन एक रूटीन तैयार करें. सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूलों को यह करना अनिवार्य है, इससे स्कूलों की पढ़ाई व कामकाज पर नजर रखी जा सकेगी. बोर्ड के एक अधिकारी का कहना है कि स्कूल के प्रधान को 2019 के सत्र शुरू होने से पहले ही यह रूटीन भेजना था, लेकिन अभी तक सभी स्कूलों ने नहीं भेजा है.
मात्र 35 प्रतिशत स्कूलों ने ही प्रतिदिन का रूटीन भेजा है. बोर्ड यह जानना चाहता है कि स्कूलों ने पाठयक्रम समय पर पूरा करने की तैयारी के लिए क्या योजना बनायी है. जनवरी से लेकर दिसंबर तक कैसे सिलेबस पूरा होगा व परीक्षाएं होंगी, इसकी योजना पहले से स्कूलों को ठोस तरीके से बनानी होगी. इसी लक्ष्य को ध्यान में रख कर प्रतिदिन का रुटीन तैयार करने के लिए निर्देश दिया गया है. प्रत्येक सप्ताह में शिक्षक पढ़ाने व सिखाने में कितना समय दे रहे हैं. स्कूल में एक्सट्रा करीक्युलर गतिविधियों के लिए कितनी कक्षाएं दी गयी हैं. पीरियड की अवधि क्या है. महत्वपूर्ण विषयों के लिए कितना समय दिया गया है. इन सभी की जानकारी शिक्षा बोर्ड में देनी होगी. बोर्ड के अधिकारी का कहना है कि नया सत्र शुरु हुए एक महीना बीत गया है लेकिन अभी तक पूरा रुटीन भेजने के लिए स्कूल सक्रिय नहीं हुए हैं.
कई स्कूलों ने बोर्ड के इस निर्देश की ओर ध्यान ही नहीं दिया है. बोर्ड स्कूल की प्रतिदिन की गतिविधियों पर नियंत्रण रखना चाहता है, ताकि स्कूलों का ओवरऑल एकेडमिक स्तर सुधारा जा सके. इसके लिए बोर्ड की ओर से एक मॉडल रुटीन भी स्कूलों को भेजा गया है. इसी के आधार पर 15 फरवरी तक रूटीन भेजना होगा अथवा इसका स्पष्टीकरण करना होगा. इस नोटिस में कहा गया है कि इस निर्धारित तिथि तक नहीं भेजने पर स्कूलों को इसका जुर्माना देना पड़ेगा. यह चाैंकाने वाली बात है कि कई स्कूल इस निर्देश को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं.
इसका उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया जायेगा. सर्विस नियम के अनुसार बोर्ड द्वारा यह अधिसूचना स्कूलों के जिला इन्सपेर्टर्स को भी जारी की गयी है. इस मामले में निरीक्षक भी स्कूलों का निरीक्षण कर सकते हैं. स्कूल हैड्स को समय सीमा के अंदर प्रतिदिन के रूटीन की रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है. कुछ हैडमास्टरों का कहना है कि इसमें विलंब इसलिए हो रहा है, क्योंकि बोर्ड के मॉडल रुटीन में अनिवार्य विषयों को जोड़ा गया है. कक्षा 5 से 10 तक कक्षाओं में कम्प्यूटर शिक्षा भी है लेकिन इसको जोड़ा नहीं गया है. इसके लिए सही शिक्षक भी उपलब्ध नहीं हैं.
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