जिउतिया आज से, संतान की सलामती को माताएं रखेंगी निर्जला व्रत कल

Updated at : 01 Oct 2018 2:55 AM (IST)
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जिउतिया आज से, संतान की सलामती को माताएं रखेंगी निर्जला व्रत कल

दुर्गापुर : संतान की दीर्घायु के लिये किया जाने वाला जीवित्पुत्रिका पर्व मंगलवार को मनाया जायेगा. दुर्गापुर व इसके आसपास के इलाके में श्रद्धालु इसे लेकर खासे उत्साहित हैं. महिलाएं अपने पुत्र के दीर्घायु होने की कामना के साथ दो अक्टूबर को निर्जला व्रत धारण करेंगी. जिउतिया पर्व को लेकर बाजार गुलजार हो गया है. […]

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दुर्गापुर : संतान की दीर्घायु के लिये किया जाने वाला जीवित्पुत्रिका पर्व मंगलवार को मनाया जायेगा. दुर्गापुर व इसके आसपास के इलाके में श्रद्धालु इसे लेकर खासे उत्साहित हैं. महिलाएं अपने पुत्र के दीर्घायु होने की कामना के साथ दो अक्टूबर को निर्जला व्रत धारण करेंगी. जिउतिया पर्व को लेकर बाजार गुलजार हो गया है. सोमवार को नहाय-खाय के साथ इस पर्व की शुरूआत होगी. व्रती महिलाएं नदी, तालाब व घरों में स्नान-ध्यान कर अपने पितरों को जलांजलि देंगी.
खैर, तेल आदि अर्पित कर पितरों से पूरे परिवार की रक्षा के लिए कामना करेंगी. इसके बाद पूजा-अर्चना कर मड़ुआ की रोटी, सतपुतिया व नौनी का साग आदि व्यंजन बनायेंगी. जीवित्पुत्रिका या जिउतिया पर्व हिन्दू धर्म में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाये जाने वाले पर्वों में से एक है. इस दिन व्रत का खास महत्व होता है, जिसे अपनी संतान की मंगलकामना और लंबी आयु के लिए रखा जाता है. हिन्दू पंचांग के अनुसार जिउतिया व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी से नवमी तिथि
तक मनाया जाता है. छठ की तरह ही यह व्रत भी तीन दिनों तक चलता है, इसमें पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन निर्जला व्रत और तीसरे दिन व्रत का पारण होता है. इसमें पहले दिन नहाय खाय, दूसरे दिन निर्जला व्रत और तीसरे दिन व्रत का पारण होता है. जिउतिया व्रत के पहले दिन को नहाय खाय कहा जाता है, इस दिन महिलाएं प्रातःकाल जल्दी जागकर पूजा पाठ करती है और एक बार भोजन करती है.
उसके बाद महिलाएं दिन भर कुछ भी नहीं खातीं हैं. व्रत के दूसरे दिन को खर जिउतिया कहा जाता है. यह जिउतिया व्रत का मुख्य दिन होता है. पूरे दिन महिलाएं जल ग्रहण नहीं करती है.
यह व्रत का आखिरी दिन होता है. इस दिन व्रत का पारण किया जाता है. वैसे तो इस दिन सभी खाया जाता है लेकिन मुख्य रूप से झोर भात, नोनी का साग, मड़ुआ की रोटी सबसे पहले भोजन के रूप में ली जाती है. बिहार और उत्तरप्रदेश के कुछ हिस्सों में इस पर्व को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है.
बाजार में बढ़ गयी चहल पहल
जिउतिया पर्व को लेकर बाजार में काफी चहल पहल है. पर्व को लेकर रविवार को अन्य दिनों की अपेक्षा खरीदारों की संख्या बढ़ी थी. जिउतिया पर्व को लेकर सब्जी की कीमत आसमान छू रही थी. बेनाचिती, चंडीदास सहित कई जगहों पर लगने वाली सब्जी मंडियों में जिउतिया के नहाय खाय के दिन झिंगी सतपुतिया, कंदा, नोनी, साग बोडा, लाल साग सहित विभिन्न प्रकार की हरी सब्जी की लोगों ने खरीदारी की. बाजार में सतपुतिया 80 रुपये किलो, नोनी साग, 100 रुपये किलो, बिक रहा था.
जिउतिया में फलों का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा रही है. केला और खीरा की बिक्री सबसे अधिक हुई. अन्य फलों में सेब, मौसमी, अमरूद, नाशपाती जैसे फलों की भी बिक्री हुई. पर्व को लेकर फलों के दाम में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गयी. 15 रुपये दर्जन मिलने वाला केला 30 रुपये दर्जन मिल रहा था जबकि खीरा जो 25 रुपये किलो मिल रहा था, 40 रूपये किलो बिका. नाशपाती 60 रुपये से बढ़ कर 80 रुपये किलो हो गया. सेब 80 रुपये से बढ़ कर 120 रुपये किलो तक पहुंच गया.
पांच से 40 रुपये तक बिका जिउतिया
इस पर्व में पारण के दिन जिउतिया पहनने की परंपरा है. इसे लेकर बाजार में तरह-तरह के जिउतिया बिक रहे हैं. पांच रूपये से लेकर 40 रूपये तक जिउतिया उपलब्ध हैं. माताएं जिउतिया में सोने या चांदी गुथवाते देखी गयी. आभूषण दुकानों पर जिउतिया की खरीदारी के लिए काफी भीड़ दिखी. जगह-जगह धागे की जिउतिया की दुकान भी सजी दिखी.
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