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रिपोर्ट में खुलासा: दुनिया की सर्वाधिक संकटग्रस्त नदी है गंगा, कोलकाता के आस-पास प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा

Updated at : 04 Sep 2018 9:47 AM (IST)
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रिपोर्ट में खुलासा: दुनिया की सर्वाधिक संकटग्रस्त नदी है गंगा, कोलकाता के आस-पास प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा

नयी दिल्ली : गंगा की बेहतरी के लिए भले ही केंद्र सरकार नमामि गंगा जैसी परियोजना के जरिये भारी-भरकम धनराशि खर्च कर रही है, बावजूद इसके देश की इस पवित्र नदी की सेहत नहीं सुधर रही है. अंतरराष्ट्रीय स्तर के एनजीओ वर्ल्ड वाइड फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने इसे दुनिया की सबसे संकटग्रस्त नदी करार दिया है. […]

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नयी दिल्ली : गंगा की बेहतरी के लिए भले ही केंद्र सरकार नमामि गंगा जैसी परियोजना के जरिये भारी-भरकम धनराशि खर्च कर रही है, बावजूद इसके देश की इस पवित्र नदी की सेहत नहीं सुधर रही है. अंतरराष्ट्रीय स्तर के एनजीओ वर्ल्ड वाइड फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने इसे दुनिया की सबसे संकटग्रस्त नदी करार दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता महानगर के आसपास इस नदी का प्रदूषण स्तर सर्वाधिक और खतरनाक हो चुका है.
इसके पीछे तर्क देते हुए संस्था ने कहा है कि गंगा विश्व की सबसे अधिक संकटग्रस्त नदी इसलिए है, क्योंकि लगभग सभी दूसरी भारतीय नदियों की तरह गंगा में भी लगातार पहले बाढ़ और फिर सूखे की स्थिति पैदा हो रही है.
इस अंतरराष्ट्रीय संस्था का गंगा को लेकर जारी यह बयान सरकार के लिए झटका माना जा रहा.गंगा ऋषिकेश से ही प्रदूषित हो रही है. आगे के इलाकों में बढ़ने के बाद उसमें मिलने वाले प्रदूषण का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. गंगा किनारे लगातार बसायी जा रही बस्तियों चन्द्रभागा, मायाकुंड, शीशम झाड़ी में शौचालय तक नहीं हैं. इसलिए यह गंदगी भी गंगा में मिल रही है.
ऋषिकेश से लेकर कोलकाता तक गंगा के किनारे परमाणु बिजलीघर से लेकर रासायनिक खाद तक के कारखाने लगे हैं. जिसके कारण गंगा लगातार प्रदूषित हो रही है.
गंगा की सहायक नदियां
गंगा में उत्तर की ओर से आकर मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियों में यमुना, रामगंगा, करनाली (घाघरा), ताप्ती, गंडक, कोसी और काक्षी हैं, जबकि दक्षिण के पठार से आकर मिलने वाली प्रमुख नदियों में चंबल, सोन, बेतवा, केन, दक्षिणी टोस आदि शामिल हैं. यमुना गंगा की सबसे प्रमुख सहायक नदी है, जो हिमालय की बन्दरपूंछ चोटी के यमुनोत्री हिमखंड से निकलती है.
पीने, नहाने या खेती लायक नहीं है गंगा नदी का पानी
देश की सबसे प्राचीन और लंबी नदी गंगा उत्तराखंड के कुमायूं में हिमालय के गोमुख नामक स्थान पर गंगोत्री हिमनद से निकलती है. गंगा के इस उद्गम स्थल की ऊंचाई समुद्र तल से 3140 मीटर है. उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक गंगा विशाल भू-भाग को सींचती है.
गंगा भारत में 2,071 किमी और उसके बाद बांग्लादेश में अपनी सहायक नदियों के साथ 10 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है. गंगा नदी के रास्ते में पड़ने वाले राज्यों में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. गंगा उत्तराखंड में 110 किलोमीटर , उत्तर प्रदेश में 1,450 किलोमीटर , बिहार में 445 किमी और पश्चिम बंगाल में 520 किमी का सफर तय करते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है.
यह नदी 40 से 50 करोड़ से अधिक लोगों का भरण-पोषण करती है. भारत में गंगा क्षेत्र में 565,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर खेती की जाती है, जोकि भारत के कुल कृषि क्षेत्र का लगभग एक तिहाई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि गंगा नदी को तीन मानकों पर परखा गया है. गंगा नदी का पानी पीने लायक, नहाने लायक या खेती लायक है या नहीं. तीनों ही मानकों पर यह नदी फेल हो चुकी है.
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