पुरुलिया हत्याकांड: भाजपा कार्यकर्ता दुलाल कुमार मौत मामला, पुलिस की जांच के तरीके पर उठ रहे सवाल

Updated at : 12 Jun 2018 6:09 AM (IST)
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पुरुलिया हत्याकांड: भाजपा कार्यकर्ता दुलाल कुमार मौत  मामला, पुलिस की जांच के तरीके पर उठ रहे सवाल

कोलकाता : पश्चिम बंगाल पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ता दुलाल कुमार की मौत मामले में मात्र एक घंटे के अंदर प्राथमिक जांच पूरी कर ली थी. भाजपा कार्यकर्ता की मौत से संबंधित दस्तावेज की एक प्रति जो आमतौर पर पूछताछ रिपोर्ट के रूप में जानी जाती है, उसमें साफ कहा गया है कि जांच 2 जून […]

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ता दुलाल कुमार की मौत मामले में मात्र एक घंटे के अंदर प्राथमिक जांच पूरी कर ली थी. भाजपा कार्यकर्ता की मौत से संबंधित दस्तावेज की एक प्रति जो आमतौर पर पूछताछ रिपोर्ट के रूप में जानी जाती है, उसमें साफ कहा गया है कि जांच 2 जून को 2.25 बजे शुरू की गयी और 2 जून को ही 3.35 बजे जांच पूरी कर ली गयी.
दुलाल का शव पुरुलिया के बलरामपुर के दाभा गांव में बिजली के खंभे से लटका मिला था. भाजपा ने इस कथित हत्या के लिए तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया था.
इस हत्या से उस वक्त बंगाल की सियासत गरमा गयी थी, क्योंकि तीन दिन में यह भाजपा कार्यकर्ता की मौत का दूसरा मामला था. एक अन्य मामले में 18 वर्षीय त्रिलोचन महतो का शव पाया गया था. वह भाजपा में दलित समुदाय का कार्यकर्ता था. उसके शव पर एक पोस्टर भी चिपकाया जिसपर लिखा था, ‘बीजेपी के लिए काम करने का यही हश्र होगा.
पुलिस ने सिर्फ एक घंटे में पूरी कर ली भाजपा कार्यकर्ता की मौत की जांच
पुलिस की लापरवाही
दो जून को पुलिस अधीक्षक जय विश्वास ने बिना पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आये ही घटना को आत्महत्या करार दे दिया था. एक दिन बाद नये पुलिस अधीक्षक आकाश मघारिया ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद इस घटना को आत्महत्या बताया. हालांकि, दुलाल के परिजनों ने बलरामपुर थाने में हत्या की तहरीर दर्ज करायी थी.
जब इस मामले में बलरामपुर थाना प्रभारी सुदीप हाजरा से बात की गयी तो उन्होंने इस घटना पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि मामला सीआइडी के पास है, वह इसमें कुछ नहीं कह सकते.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मानें की पुलिस को इसमें गहन जांच करनी चाहिए. सवाल यह उठ रहे हैं कि दुलाल बिना किसी मदद के आखिर इतने ऊंचे खंभे पर कैसे चढ़े? उसका शव नाइलॉन की रस्सी से लटक रहा था, यह भी अजीब बात थी. कुछ और इसी तरह की मौतें हुईं उन्हें भी इस केस से जोड़कर देखा जा सकता है.
हत्या या खुदकुशी?
दो जून को पुरुलिया के बलरामपुर के दाभा गांव में 32 वर्ष के दुलाल कुमार का शव गांव में ही एक बिजली के खंभे से लटका मिला था. पुलिस अधीक्षक ने दावा किया था कि उसने आत्महत्या की थी. वहीं, दुलाल कुमार के परिजनों का कहना था कि उन्होंने आत्महत्या नहीं की.
उनका शव जिस बिजली के खंभे से लटक रहा था, वह जमीन से लगभग सात फीट ऊंचा था. पुलिस ने जो रिपोर्ट तैयार की, उसमें यह भी नहीं लिखा गया कि खंभा कितना ऊंचा था. सामान्यतया जब घटनास्थल से शव को कब्जे में लिया जाता है तो उस दौरान चश्मदीदों का होना जरूरी है.
स्थानीय लोगों से पूछताछ की जाती है कि किसने सबसे पहली बार शव देखा? घटना की हर कड़ी को जोड़ा जाता है. मृतक के परिजनों को बुलाया जाता है. घटनास्थल की फोटोग्राफी होती है. क्राइम ब्रांच की टीम को बुलाया जाता है ताकि साक्ष्य एकत्र किये जा सकें. इसके अलावा कई अन्य चीजें होती हैं जिनमें घंटों लगते हैं.
परिजनों ने सीबीआइ जांच की मांग की
दुलाल की पत्नी मोनिका और बीजेपी के जिलाध्यक्ष विद्यासागर चक्रबर्ती ने कहा कि दुलाल ने एक जून को बलरामपुर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था. यह कार्यक्रम 18 साल के युवक त्रिलोचन महतो की हत्या के विरोध में था. आज तक त्रिलोचन की हत्या के मामले में भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. यह मामले भी केस सीआइडी को ट्रांसफर कर दिया गया था. त्रिलोचन महतो के मामले में सीआइडी के एडीजी कानून व्यवस्था अनुज शर्मा ने बताया कि अभी जांच चल रही है.
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