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ममता की ललकार भाजपा को स्वीकार

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की ललकार को भाजपा ने स्वीकार कर लिया है. भाजपा भारत छोड़ो का नारा लेकर ममता बनर्जी सड़क पर उतर गयी हैं. जवाब में भाजपा का कहना है कि ममता अगर यह सोचती हैं कि बंगाल में 1972 का दौर लायेंगी, तो वह मुगालते में हैं. क्योंकि भाजपा को […]

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की ललकार को भाजपा ने स्वीकार कर लिया है. भाजपा भारत छोड़ो का नारा लेकर ममता बनर्जी सड़क पर उतर गयी हैं. जवाब में भाजपा का कहना है कि ममता अगर यह सोचती हैं कि बंगाल में 1972 का दौर लायेंगी, तो वह मुगालते में हैं. क्योंकि भाजपा को कमतर आंकने की गलती अगर वह करती हैं, तो उन्हें इस बात का खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहना होगा. दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के दौर से राजनीतिक पारा और चढ़ता जा रहा है.
पिछले 21 जुलाई को शहीद दिवस की सभा से ममता ने हुंकार भरी थी कि नौ अगस्त से अंग्रेजों भारत छोड़ो के तर्ज पर भाजपा भारत छोड़ो आंदोलन का आगाज होगा. इसके जवाब में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने 21 जुलाई को ही एलान किया था कि उनकी पार्टी नौ अगस्त से तृणमूल कांग्रेस तुष्टिकरण छोड़ो कार्यक्रम शुरू करेगी. नौ अगस्त से तृणमूल कांग्रेस का भाजपा भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हो गया है.
इधर, भाजपा भी सड़कों पर उतर गयी है. भाजपा की महासचिव देवश्री चौधरी के अनुसार ममता बनर्जी जिस तरह से अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की नीति अपना कर बहुसंख्यक को वंचित कर रही हैं. उसके खिलाफ भाजपा का अभियान जारी है.
उन्होंने दावा किया कि भाजपा का जनाधार बढ़ रहा है. इसस‍े घबराकर तृणमूल की ओर से भाजपा कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले किये जा रहे हैं. ममता बंगाल में 1972 के दौर का काला दिन वापस लाना चाहती हैं. लेकिन वह इस बात को भूल जा रही हैं कि भाजपा अब पहलेवाली भाजपा नहीं है. आज जहां भी नजर जाती है कमल खिलता हुआ नजर आता है. ममता इसे हटाने का दुस्साहस कर रही हैं.
इधर, प्रधानमंत्री खुद अगस्त क्रांति के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर नया नारा करेंगे और करके रहेंगे दिया है. जवाब में ममता बनर्जी डु आॅर डाइ का नारा दे चुकी हैं. ममता के दिल्ली दौरे को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है. राष्ट्रीय राजनीति में विरोधी दलों का चेहरा बनकर ममता बनर्जी भाजपा को टक्कर दे रही हैं.

राजनीतिक हलकों में कयास लगाये जा रहे हैं कि दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठक में सोनिया गांधी ने जिस तरह ममता बनर्जी को तवज्जो दिया और उनके हर प्रस्ताव पर सर्वसम्मति बनी, उसे देखते हुए हर कोई कह रहा है कि आनेवाले दिनों में विरोधी दलों का जो महागठबंधन होगा, उसके नेतृत्व की कमान ममता बनर्जी के हाथों में हो सकती है. इस बात को समझते हुए भाजपा ममता बनर्जी को उनके ही घर यानी पश्चिम बंगाल में ही उलझाये रखना चाहती है. कुल मिलाकर आनेवाले समय में बंगाल की राजनीति गर्म रहने की उम्मीद है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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