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नीट (मेडिकल) बांग्ला मीडियम छात्रों के लिए कठिन रहा

अच्छे अंकों व रैंक को लेकर छात्रों व शिक्षकों में चिंता बढ़ी कोलकाता : एनइइटी (नीट) 2017 में इस बार बंगाल से कुल 56,069 छात्र परीक्षा में बैठे थे. नेशनल एलीजेबिलिटी कम-एन्ट्रेंस टेस्ट (नीट) से पहले मेडिकल के लिए राज्य में पश्चिम बंगाल ज्वाइन्ट एंट्रेंस एक्जामिनेशन बोर्ड द्वारा ही परीक्षा ली जाती थी. अब इसको […]

अच्छे अंकों व रैंक को लेकर छात्रों व शिक्षकों में चिंता बढ़ी
कोलकाता : एनइइटी (नीट) 2017 में इस बार बंगाल से कुल 56,069 छात्र परीक्षा में बैठे थे. नेशनल एलीजेबिलिटी कम-एन्ट्रेंस टेस्ट (नीट) से पहले मेडिकल के लिए राज्य में पश्चिम बंगाल ज्वाइन्ट एंट्रेंस एक्जामिनेशन बोर्ड द्वारा ही परीक्षा ली जाती थी. अब इसको कॉमन परीक्षा करने के कारण राज्य के छात्रों को काफी परेशानी हुई है. इस विषय में नीट में बैठे बांग्ला मीडियम के छात्रों ने बताया कि बांग्ला में दी गयी परीक्षा का प्रश्नपत्र ज्यादा कठिन था. जो प्रश्नपत्र छात्रों को अंग्रेजी में दिया गया, उसकी तुलना में बांग्ला वर्जन का पेपर उनको ठीक से समझ में ही नहीं आया. उनको लगता है कि इस साल परीक्षा में उनको अच्छे स्कोर नहीं मिलेंगे.
हावड़ा के एक इंजीनियरिंग संस्थान के छात्र का कहना है कि जिन छात्रों ने बंगला प्रश्नपत्र से परीक्षा दी, उनका अच्छे से मूल्यांकन नहीं होगा. कुल नतीजों के 10 प्रतिशत टॉपरों में भी उनका नंबर नहीं आयेगा, क्योंकि यह पेपर जेइइ के पैटर्न से एकदम अलग था. पता नहीं अच्छे मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलेगा कि नहीं. राज्य के 470 मेडिकल कॉलेजों में 65,170 एमबीबीएस सीटें हैं. इसके अलावा 308 डेन्टल कॉलेजों में 25,730 बीडीएस सीटें हैं. कुछ छात्रों ने बताया कि नीट के कारण राज्य के कई छात्रों ने 2018 में परीक्षा में बैठने का फैसला किया है. है. ये छात्र अंग्रेजी में ही परीक्षा देंगे, ताकि उनको अच्छा अवसर मिल सके. कल्याणी के एक मेडिकल छात्र ने बताया कि गुजराती व बंगाली वरजन के पेपर अंग्रेजी प्रश्नपत्र से एकदम अलग थे. परीक्षा के बंगला वरजन में काफी मुश्किल प्रश्न आये थे. डेंटल कॉलेज के एक छात्र का कहना है कि छात्रों को काफी परेशानी हुई है.
मेडिकल कॉलेज के एक शिक्षक का कहना है कि सीबीएसइ को अगली बार प्रश्नपत्र के नमूने में संशोधन करना चाहिए, ताकि छात्र अपनी क्षेत्रीय भाषा में ठीक से पेपर दे सकें. इस बार बंगला में पेपर देने वाले छात्रों के अंक अंग्रेजी में परीक्षा देने वाले छात्रों से कम आयेंगे. पहले जब जेइइ बोर्ड प्रवेश परीक्षा लेता था तो ज्यादातर सीटों पर बंगाली मीडियम के छात्रों का ही कब्जा होता था. वह पेपर सिलेबस के अनुरुप ही होता था. बंगाल में कई मेडिकल कॉलेजों की सीटें दिल्ली बोर्ड के छात्र ही ले जाते थे.
इस साल छात्रों को वही उत्तर देने पड़े, जो एनसीईआरटी टेक्सटबुक्स के आधार पर परीक्षा में सैट किये गये. इस विषय में विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के पैटर्न में बदलाव होने से छात्रों को दिक्कत तो आयेगी ही, क्योंकि बंगाल के छात्रों के लिए पहले जेइइ बोर्ड पेपर सैट करता था. अब यह परीक्षा कॉमन रूप से राष्ट्रीय स्तर हो रही है. नीट, मेडिकल के लिए इस बार बंगाल से 21,662 छात्रों ने इंगलिश में व 34,417 छात्रों ने बंगला वरजन में परीक्षा दी.
Prabhat Khabar Digital Desk
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