यह बातें सर्विस डॉक्टर फोरम के महासचिव डॉ सजल विश्वास ने कहीं. वे सोमवार को सर्विस डॉक्टर फोरम व मेडिकल सर्विस सेंटर की ओर से आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने बताया कि जल्द ही इन घटनाओं के मद्देनजर उक्त संगठनों की ओर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व स्वास्थ्य राज्यमंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को ज्ञापन सौंपा जायेगा. डॉ विश्वास ने कहा कि राज्य में मॉर्डन मेडिकल शिक्षा (एलोपैथी) के विभिन्न पाठ्यक्रम में सीट के अभाव में मेधावी छात्रों को पढ़ने का मौका नहीं मिलता है. वहीं पश्चिम बंगाल ही नहीं पूरे देश में चिकित्सकों का अभाव है. उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि औसतन 600 मरीजों पर एक एलोपैथी डॉक्टर की जरूरत है जबकि हमारे यहां 1600 मरीजों के इलाज का जिम्मा एक चिकित्सक पर होता है.
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मृत डॉक्टर भी जीवित हैं वेबसाइट पर
कोलकाता. राज्यभर से फरजी डॉक्टरों की गिरफ्तारी हो रही है. राज्य में फैले फरजी चिकित्सकों पर नकेल कसने के लिए पुलिस प्रशासन भी सक्रिय हो गया है, लेकिन स्टेट मेडिकल काउंसिल की लापरवाही के कारण अब तक फरजी डॉक्टरों को आश्रय मिल रहा था. काउंसिल की वेबसाइट अपडेट नहीं होने के कारण यह समस्या हो […]
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कोलकाता. राज्यभर से फरजी डॉक्टरों की गिरफ्तारी हो रही है. राज्य में फैले फरजी चिकित्सकों पर नकेल कसने के लिए पुलिस प्रशासन भी सक्रिय हो गया है, लेकिन स्टेट मेडिकल काउंसिल की लापरवाही के कारण अब तक फरजी डॉक्टरों को आश्रय मिल रहा था. काउंसिल की वेबसाइट अपडेट नहीं होने के कारण यह समस्या हो रही है. फलस्वरूप स्टेट काउंसिल की वेबसाइट पर कुछ ऐसे भी चिकित्सकों के नाम हैं ,जो अब परलोक सिधार चुके हैं और इसका फायदा उठा कर कुछ लोग मर चुके चिकित्सकों के रजिस्ट्रेशन नंबर को अवैध रूप से इस्तेमाल कर चिकित्सा व्यवस्था व मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं.
गांव में फरजी डॉक्टरों की संख्या अधिक
डॉ विश्वास ने कहा कि सबसे अधिक फरजी चिकित्सक राज्य के विभिन्न जिलों में है. जिलों में मात्र 20 डॉक्टर वैध रूप से डिग्री प्राप्त कर प्रैक्टिस कर रहे हैं. शेष जितने भी चिकित्सक है सभी फरजी हैं. उन्होंने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण से भी फरजी चिकित्सकों को आश्रय मिल रहा है.
सभी काउंसिलों को सक्रिय होने की जरूरत
डॉ विश्वास ने कहा कि वेस्ट बंगाल मेडिकल काउंसिल के अलावा सेंट्रल काउंसिल ऑफ होमियोपैथी तथा आयुर्वेद काउंसिल को भी सक्रिय होने की जरूरत है. इसके बाद ही फरजी चिकित्सकों पर नकेल कसी जा सकती है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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