केंद्रीय व पीएसयू अस्पतालों से भी चिकित्सकों को कोरोना इलाज के लिए जोड़ने की मांग हुई तेज

Updated at : 10 Aug 2020 11:46 PM (IST)
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केंद्रीय व पीएसयू अस्पतालों से भी चिकित्सकों को कोरोना इलाज के लिए जोड़ने की मांग हुई तेज

केंद्रीय व पीएसयू अस्पतालों से भी चिकित्सकों को कोरोना इलाज के लिए जोड़ने की मांग

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सेफ होम में जिला अस्पताल के चिकित्सकों की तैनाती से अस्पताल में मरीजों को उत्पन्न हो रही समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने इलाज के लिए वैकल्पिक चिकित्सकों की तलाश को लेकर सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बैठक की. बैठक में सेफ होम, कोविड-19 जांच और होम आइसोलेशन में इलाज का कुछ जगहों पर हो रहे विरोध पर चर्चा हुई.

जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने जिले में स्थित केंद्र सरकार और पब्लिक सेक्टर इकाईयों के अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों को भी इस महामारी की स्थिति में कार्य पर लगाने का सुझाव दिया. जिला प्रशासन इस सुझाव के आधार पर रेल, सेल, इसीएल, डीएसपी आदि संस्थाओं से भी जल्द चिकित्सकों की मांग करेगी. आईएमए ने भी इस मांग का समर्थन किया.

सनद रहे कि जिला अस्पताल में 68 चिकित्सक, सात पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनी, पांच सीनियर रेसिडेंस चिकित्सक, 230 नर्सिंग स्टॉफ, छह हाउस स्टॉफ की तैनाती है. जिला अस्पताल के मरीजों की सेवा के लिए यह संख्या सही है. यहां से चिकित्सकों को अन्य जगह शिफ्ट करने से अस्पताल के मरीजों के लिए समस्या उत्पन्न हो रही है. हाल ही में कोरोना मरीजों के लिए जिले में सात सेफ होम बनाया गया. जहां बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है.

इएसआइ अस्पताल में बने 80 बेडों वाले सेफ होम में जिला अस्पताल के चार चिकित्सक और छह नर्सिंग स्टॉफ की तैनाती की गई है. अन्य सेफ होम में भी जिला अस्पताल से चिकित्सकों की तैनाती का आदेश जारी होते ही चिकित्सकों ने इसका विरोध कर दिया.

सेफ होम में राउंड विजिट करने की मांग

जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने सेफ होम में उनकी तैनाती का विरोध किया है. चिकित्सकों की यूनियन प्रोग्रेसिव डॉक्टर्स एसोसिएशन आसनसोल शाखा के बैनर तले चिकित्सकों ने अपना विरोध अस्पताल के अधीक्षक के पास दर्ज कराया. यूनियन के प्रतिनिधि ने बताया कि कोविड मरीजों की सेवा से उन्हें कोई परहेज नहीं है. सेवा कैसे की जाएगी इसे लेकर उनसे चर्चा किये बगैर सिर्फ आदेश जारी किया जा रहा है.

इसएसआइ अस्पताल में बने सेफ होम में जिला अस्पताल के चार चिकित्सक और छह नर्स की 24 घंटे की तैनाती कर दी गयी. इस सेफ होम को इसएसआइ हॉस्पिटल के साथ ही जोड़ देने से सभी को सुविधा होगी. इस प्रकार महामारी के इस दौर में जिले में स्थित केंद्र सरकार और पीएसयू की सभी अस्पतालों से कुछ-कुछ चिकित्सकों को लेकर उन्हें भी कार्य पर लगाना होगा.

आगामी दिनों में समस्या और भी गंभीर होने वाली है. ऐसे में सिर्फ जिला अस्पताल के चिकित्सकों को ही सभी जगह कार्य पर लगाया जाएगा, इससे जिला अस्पताल की स्थिति काफी खराब हो जाएगी. उन्होंने कहा कि जब तक अन्य जगह से चिकित्सक नहीं मिलते हैं, उस दौरान सेफ होम में जिला अस्पताल के चिकित्सकों को राउंड विजिट की ड्यूटी देने की मांग की गई है. इससे जिला अस्पताल भी सुरक्षित रहेगा और सेफ होम में भी मरीजों का इलाज चलता रहेगा.

सेफ होम, होम आइसोलेशन और जांच का हो रहा विरोध

जिला में कोरोना के बढ़ते मामले से निबटने के लिए प्रशासन ने डेडिकेटेड कोविड-19 अस्पताल के अलावा सेफ होम और होम आइसोलेशन में भी मरीजों के इलाज की व्यवस्था की है. इसके साथ ही कोविड जांच की संख्या बढ़ाने के लिए शिविर लगाकर जांच करने का कार्य आरंभ किया है. कुछ जगहों पर इसका विरोध आरम्भ हो गया. जिससे प्रशासन की परेशानी बढ़ गयी है. रानीगंज में दो सेफ होम का विरोध होने पर उसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. होम आइसोलेशन में भी कुछ जगहों पर विरोध होने लगा है. जिला शासक ने इस मुद्दे को लेकर सोमवार को अधिकारियों से चर्चा की और लोगों को इस दिशा में सरकार का सहयोग करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है.

posted by : sameer oraon

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