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अखाड़ा में बिहार व झारखंड के पहलवानों ने दिखाया दम

Updated at : 16 Aug 2025 10:12 PM (IST)
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अखाड़ा में बिहार व झारखंड के पहलवानों ने दिखाया दम

कुश्ती को बढ़ावा देने को रेलनगरी चित्तरंजन में 16 साल बाद फिर अभियान शुरू

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विजयी प्रतियोगियों के साथ अखाड़ा में उतरनेवाले पहलवानों का नगद व अंगवस्त्र देकर सम्मान आसनसोल/रूपनारायणपुर. 16 साल बाद रेल नगरी चित्तरंजन में पुनः कुश्ती को लेकर नई पहल हुई. जिसके तहत चित्तरंजन अखाड़ा महासंघ ने फतेहपुर इलाके में 15 अगस्त को दंगल का आयोजन किया. जिसमें बिहार के जमुई और लक्खीसराय से, झारखंड के मिहिजाम और डांगाल इलाके के अलावा सालानपुर थाना क्षेत्र के केशिया और देंदुआ के कुल 22 पहलवानों ने हिस्सा लिया. 16 से 25 वर्ष और 25 से 35 वर्ष उम्र दो श्रेणी में पहलवानों को विभक्त करके कुश्ती का आयोजन हुआ. भारी संख्या में दर्शक उपस्थित होकर पहलवानों का हौसला बढ़ाया. बतौर मुख्य अतिथि चिरेका के प्रधान मुख्य अभियंता (सिविल) रामाश्रय प्रसाद ने इस कार्यक्रम के आयोजन को लेकर आयोजकों की भरपूर सराहना की और कहा कि कुश्ती में भारत के अपना दम दिखाया है. ऑलिम्पिक में अनेकों पदक पहलवानों ने जीता है. इस खेल को हर स्तर पर बढ़ावा देने की जरूरत है. मौके में अखाड़ा महासंघ के महासचिव अभिषेक कुमार सिंह, सदस्य विशाल सिंह, राजेश सिंह, संजय सिंह, ब्रम्हदेव यादव आदि उपस्थित थे. 16 से 25 वर्ष उम्र कैटेगरी में लक्खीसराय के हीरालाल यादव, जमुई के सूरज यादव, संदीप यादव, मिहिजाम के संतु यादव, डांगाल के नितेश यादव और केशिया के मोतीलाल यादव विजयी हुए. 25 से 35 वर्ष उम्र वर्ग में लक्खीसराय के राहुल यादव, जमुई के उमेश यादव, सुनील यादव, मिहिजाम के पंकज यादव और छत्रीलाल यादव विजयी हुए. विजयी पहलवानों को 21 सौ रुपये नगद राशि और उपविजेता पहलवानों को 500 रुपये नगद राशि के साथ अंगवस्त्र प्रदान कर पुरस्कृत किया गया. चित्तरंजन अखाड़ा महासंघ के महासचिव श्री सिंह ने कहा कि रेल नगरी के फतेहपुर इलाके में वर्ष 1952 में अखाड़ा बना. यहां एक समय कुश्ती का जलवा रहता था. खरवान यादव, राजदेव यादव जैसे अनेकों पहलवानों को इस अखाड़ा में कुश्ती जीतने पर चिरेका में नौकरी मिली थी. विजेताओं को महाप्रबंधकों ने नौकरी प्रदान की थी. सारे पहलवान यहां से रिटायर होकर चले गए तो कुश्ती का कल्चर ही यहां समाप्त हो गया. यह अखाड़ा अब नशेड़ी और अपराधियों का अखाड़ा बन गया है. पहलवानों का विश्राम करने का घर, शौचालय सारा कुछ नष्ट हो गया है. इस खेल को इलाके में पुनः लोकप्रिय बनाने के लिए 16 साल बाद पुनः दंगल की शुरुआत यहां की गयी है. अखाड़ा को तैयार किया गया है. स्थानीय प्रशासन से सहयोग मिला तो इसे बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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