ओंदा विस क्षेत्र पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला, कांटे की टक्कर

जिले के ओंदा विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है.
बांकुड़ा.
जिले के ओंदा विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. शुरुआत में यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, लेकिन समय के साथ यहां वामपंथियों का दबदबा बना और हाल के चुनावों में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच यहां सीधी टक्कर देखने को मिली. इस बार भी सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं.इतिहास में कांग्रेस और वामो का रहा दबदबा
1952 के पहले आम चुनाव में यहां हिन्दू महासभा के उम्मीदवार रामचंद्र ने जीत दर्ज की थी. 1957 से यह क्षेत्र कांग्रेस के प्रभाव में रहा और 1962 व 1967 में भी कांग्रेस ने जीत हासिल की. 1969 में फारवर्ड ब्लाक ने सीट जीती, जिसके बाद 1970 से 2000 तक वामपंथियों का वर्चस्व कायम रहा. 2006 में फारवर्ड ब्लाक के तारापद चक्रवर्ती विजयी हुए.
तृणमूल का उदय और भाजपा की एंट्री
2011 में तृणमूल कांग्रेस के अरूप खां ने 596 वोट से जीत दर्ज कर नया दौर शुरू किया. 2016 में भी तृणमूल ने बढ़त बनाए रखी. हालांकि 2021 में भाजपा के अमरनाथ शाखा ने 11551 वोट से जीत दर्ज कर तृणमूल के वर्चस्व को समाप्त किया. उस चुनाव में भाजपा को 104940 और तृणमूल को 93389 वोट मिले.
इस बार नये समीकरण और कड़ी टक्कर
इस बार तृणमूल कांग्रेस ने उम्मीदवार बदलते हुए सुब्रत दत्ता को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने मौजूदा विधायक अमरनाथ शाखा पर भरोसा जताया है. वामपंथ की ओर से असित बरन शर्मा और कांग्रेस के पवन सालमपुरिया भी मैदान में हैं.
कांटे की टक्कर के आसार
हालांकि मुकाबला त्रिकोणीय है, लेकिन मुख्य लड़ाई भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच मानी जा रही है. राज्य विधानसभा चुनाव के पहले चरण में आगामी 23 अप्रैल को यहां मतदान होना है और सभी दलों के उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत के लिए प्रचार में पूरा जोर लगा रहे हैं. पिछले चुनावों के आंकड़ों को देखते हुए इस बार भी मुकाबला कड़ा रहने की संभावना है.
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