आसनसोल.
बीसीसीएल के दामागोड़िया कोलियरी अंतर्गत बोड़ीरा ओसीपी में हुई दुर्घटना को लेकर मौके पर पहुंचे कुल्टी के विधायक व भाजपा नेता डॉ. अजय पोद्दार ने कहा कि कुल पांच लोगों को मलबे से निकाला गया है. जिसमें तीन की मौत हो चुकी है और दो का इलाज चल रहा है. कोयला के इस खेल में गरीब अपनी जान गंवा रहे हैं और सिंडिकेट राज के गुंडा, माफिया, पुलिस यह लोग मजा मार रहे हैं. सेंट्रल फोर्स, पुलिस और माफिया मिलकर यह राज चला रहे हैं. बोड़ीरा की इस घटना को लेकर राज्य मुख्यालय नवान्न से जिला आपदा प्रबंधन विभाग से पूरा रिपोर्ट मांगा गया है. सूत्रों के अनुसार विभाग की ओर से पूरी रिपोर्ट तैयार करके भेजा गया है. गौरतलब है बोड़ीरा ओसीपी में मंगलवार सुबह अवैध खनन के दौरान चाल धंसने से तीन लोगों की मौत हो गयी और दो गंभीर रूप से घायल हो गये. मारे गये लोगों में लक्ष्मणपुर इलाके की गीता बाउरी, कन्यापुर इलाके का सुरेश बाउरी और लालबाजार घाटी गली इलाके का टीलु बाउरी शामिल है. घायलों में बोड़ीरा के दो लोग सुभाष मल्लिक और गोविंद बाउरी शामिल हैं, जिनका इलाज चल रहा है. इस घटना ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है.25 अगस्त को हादसे में मरा था एक
25 अगस्त 2025 को बोड़ीरा खदान में एक दुर्घटना हुई. जिसमें लालबाजार घाटीमोड़ इलाके का निवासी गंभीर रूप से घायल हो गया. उसे इलाज के लिए स्थानीय एक नर्सिंग होम में लाया गया. जहां उसकी मौत हो गयी. कोयला माफियाओं ने तत्काल 20 हजार रुपये परिजनों को दिया और कुछ आर्थिक मुआवजा देने की मांग पर मामला शांत हो गया, कहीं कोई शिकायत नहीं हुई.
13 जून 2025 को भी खदान में अवैध खनन के दौरान हादसा हुआ, जिसमें केंदुआ बाजार गुप्ता होटल के निकट रहनेवाले एक व्यक्ति की चाल के अंदर ही मौत हो गयी. मलबे से शव को निकालकर खदान के निकट माजीपड़ा5के पास झाड़ियों में फेंक दिया गया. शव को बरामद कर घरवाले ले गये. इन्हें भी कोयला माफ़ियाओं ने कुछ मुआवजा दिया था.300 से 500 रुपये के लिए दांव पर लगाते हैं जान
अवैध खनन के दौरान खदानों में दो प्रकार से लोग पैसे रोजगार करते हैं. एक वे होते हैं जो सुरंगों में घुसकर कोयला काटते हैं और दूसरे वे जो उसे निकालकर उपर सतह तक लाते हैं. कोयला काटने और खदान से उपर तक लाने दोनों में ही जान का खतरा है. कोयला टोकरी के करके अंदर से उपर लाया जाता है. एक टोकरी कोयले की कीमत महिला को सौ रुपये और पुरुष को डेढ़ सौ रुपये तक मिलता है. कीमत थोड़ी उपर नीचे होती रहती है. एक दिन में एक व्यक्ति अधिकतम 500 रुपये कमा लेता है. यह काम रात एक बजे से भोर पांच बजे तक चलता है. सुबह फिर सबकुछ सामान्य दिखता है.कारखानों से कागजात संग निकल जाता है अवैध कोल
खदान से निकाला गया कोयला स्थानीय कोक प्लांट में पहुंच जाता है. सौ रुपये में खरीदा गया कोयला वैध कागजात के साथ कोक प्लांट से 400 रुपये में निकलता है. कोक प्लांट वाले 2000 रुपये टन के हिसाब से कोयला खरीदते हैं और इसे खुले बाजार में 6000 से आठ हजार रुपये प्रति टन तक बेचते हैं. पूरा खेल सिंडिकेट चलाता है. मुनाफा का हिस्सा अनेकों जगह पहुंचता है. जिसकी जांच सीबीआइ और इडी कर रही है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

