बराकर में दो सूबों की सीमा पर सूर्यदेव को एक साथ दिया अर्घ्य

Updated at : 27 Oct 2025 9:29 PM (IST)
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बराकर में दो सूबों की सीमा पर सूर्यदेव को एक साथ दिया अर्घ्य

सूर्योपासना के महापर्व छठ पर सोमवार को आसनसोल के कुल्टी विधानसभा क्षेत्र स्थित बराकर नदी के तट पर आस्था और एकता का अनोखा दृश्य देखने को मिला.

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आसनसोल/नियामतपुर.

सूर्योपासना के महापर्व छठ पर सोमवार को आसनसोल के कुल्टी विधानसभा क्षेत्र स्थित बराकर नदी के तट पर आस्था और एकता का अनोखा दृश्य देखने को मिला. यहां पश्चिम बंगाल और झारखंड, दोनों राज्यों की सीमाओं पर स्थित दो घाटों—बराकर (बंगाल) और चिरकुंडा (झारखंड)—पर श्रद्धालुओं ने एक साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया.

दो राज्यों के श्रद्धालुओं का एक साथ जुटना

हर वर्ष की तरह इस बार भी दोनों घाटों पर हजारों श्रद्धालु सोमवार को प्रथम अर्घ्य के लिए और मंगलवार सुबह द्वितीय अर्घ्य देने के लिए पहुंचे. दामोदर नदी के पवित्र जल में उतरकर सूर्यदेव की आराधना करते हुए श्रद्धालुओं ने एकता, भक्ति और सांस्कृतिक सद्भाव का अद्भुत उदाहरण पेश किया.

अंतरराज्यीय मिलन का प्रतीक बना पर्व

स्थानीय लोगों ने बताया कि छठ पर्व के इस अवसर पर दो राज्यों की सीमाएं मानो धुंधली हो जाती हैं. बंगाल और झारखंड के लोग मिलकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते हैं. यह दृश्य न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि भारतीय संस्कृति की एकजुटता और साझा परंपरा का भी प्रतीक बन गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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