इसी कोर्ट पहली जनवरी से शहर में

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आसनसोल के प्रस्तावित जिला के मुख्यालय बनने की प्रबल संभावना को देखते हुए राज्य सरकार के श्रम विभाग ने इसे एक और तोहफा दिया है. पहली जनवरी से श्हर में ही इसी कोर्ट कार्य करना शुरू कर देगी. श्रमिकों को इससे काफी सहूलियत होगी. आसनसोल : आसनसोल शिल्पांचल के हजारों श्रमिकों की सुविधा के लिए […]

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आसनसोल के प्रस्तावित जिला के मुख्यालय बनने की प्रबल संभावना को देखते हुए राज्य सरकार के श्रम विभाग ने इसे एक और तोहफा दिया है. पहली जनवरी से श्हर में ही इसी कोर्ट कार्य करना शुरू कर देगी. श्रमिकों को इससे काफी सहूलियत होगी.
आसनसोल : आसनसोल शिल्पांचल के हजारों श्रमिकों की सुविधा के लिए राज्य सरकार के श्रम विभाग ने आसनसोल में ही कर्मचारी मुआवजा कोर्ट स्थापित करने का निर्णय लिया है. श्रम सह विधि व न्याय मंत्री मलय घटक ने कहा कि यह कोर्ट पहली जनवरी, 2017 से प्रभावी हो जायेगा तथा इस कोर्ट में आसनसोल महकमा व पुरुलिया जिले के श्रमिकों के मामलों की सुनवाई होगी. पहले इन मामलों की सुनवाई के लिए कोलकाता जाना पड़ता था.श्रमिकों के हित में राज्य सरकार की यह महत्वपूर्ण कदम है.
मंत्री श्री घटक ने कहा कि राज्य सरकार ने श्रमिकों के कल्याण व सामाजिक सुरक्षा के हित में कई सार्थक पहल की है. विभिन्न औद्योगिक संस्थानों में अधिकार को लेकर कर्मचारी व नियोजकों के बीच विवादों की संख्या बढ़ रही है. इन विवादों के निष्पादन के लिए राज्य सरकार के स्तर से लेबर कोर्ट, ट्रिब्यूनल कर्मचारी मुआवजा कोर्ट आदि की स्थापना की जाती है. इन विवादों के शीघ्र निष्पादन के लिए भी राज्य सरकार ने सार्थक पहल की है.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस दिशा में रिपोर्ट तैयार की. उसमें यह तथ्य उभर कर आया कि राज्य में इन विवादों के निष्पादन के लिए लेबर कोर्ट व ट्रिब्यूनल की कुल संख्या 15 है. इनमें से 13 राज्य मुख्यालय कोलकाता में स्थित हैं. इस कारण इन विवादों से जुड़े श्रमिकों व कर्मचारियों को काफी परेशानी होती है. उन्हें इसके लिए अक्सरहां कोलकाता आना पड़ता है. उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनलों वन से लेकर पांच तक सभी कोलकाता में स्थित हैं. इनमें क्रमश: नॉर्थ 24 परगना, हावड़ा, हुगली, नदिया तथा मुर्शिदाबाद जिलों के मामलों की सुनवाई होती है. छठा ट्रिब्यूनल जलपाइगुड़ी में स्थित है.
इसमें कूचबिहार, जलपाइगुड़ी, दाजिर्लिंग, नॉर्थ दिनाजपुर, साउथ दिनाजपुर जिले को विवादों की सुनवाई होती है. इसके साथ ही सातवां और आठवां ट्रिब्यूनल कोलकाता में है. इनमें कोलकाता व साउथ 24 परगना जिले के मामलों की सुनवाई होती है. नौवें ट्रिब्यूनल में बर्दवान, विरभूम, बांकु ड़ा व पुरुलिया जिले के मामलों का निष्पादन होता है तथा यह दुर्गापुर में स्थित है. उन्होंने कहा कि पहला व दूसरा लेबर कोर्ट कोलकाता में स्थित है. इसी तरह श्रमिक (कर्मचारी) मुआवजा कोर्ट की संख्या चार है. सभी कोलकाता में ही स्थित है.
मंत्री श्री घटक ने कहा कि श्रमिकों की सुविधा के लिए राज्य सरकार ने इन ट्रिब्यूनलों व लेबर कोर्ट सहित श्रमिक मुआवजा कोर्ट को विकेंद्रित करने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि पहला श्रमिक मुआवजा कोर्ट कोलकाता में रहेगा. जबकि दूसरा कोर्ट आसनसोल में खुलेगा. इस कोर्ट में आसनसोल महकमा व पुरुलिया जिले के मामलों का निष्पादन होगा. दुर्गापुर में इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल बना रहेगा. लेकिन इसमें सिर्फ बर्दवान व विरभूम जिले के मामलों का निष्पादन होगा.
लेकिन इसमें आसनसोल महकमा शामिल नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि बांकु ड़ा जिले के लिए बांकु ड़ा में ही ट्रिब्यूनल खोला जायेगा. जबकि मिदनापुर में लेबर कोर्ट खोला जायेगा. उन्होंने कहा कि इन कोर्ट के लिए अलग से नियुक्ति नहीं होगी, बल्कि इनसे जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों का समायोजन किया जायेगा. उन्होंने कहा कि पहली जनवरी, 2017 से सभी नये कोर्ट प्रभाव में आ जायेंगे.
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