हड़ताल के पक्ष में जैक, वामो की सभाएं
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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लगातार श्रमिक विरोधी नीतियां अख्तियार कर रही केंद्रीय सरकार रुग्ण सरकारी कंपनियों को बचाने के बजाय बंदी, बिक्री पर जोर सीतारामपुर : विभिन्न मांगों के समर्थन में विभिन्न केंद्रीय यूनियनों यूनियनों द्वारा आगामी दो सितंबर को आहुत राष्ट्रीय हड़ताल के समर्थन में मंगलवार को जैक के बैनर तले सोदपुर एरिया अंतर्गत बैजडीह कोलियरी परिसर में […]
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लगातार श्रमिक विरोधी नीतियां अख्तियार कर रही केंद्रीय सरकार
रुग्ण सरकारी कंपनियों को बचाने के बजाय बंदी, बिक्री पर जोर
सीतारामपुर : विभिन्न मांगों के समर्थन में विभिन्न केंद्रीय यूनियनों यूनियनों द्वारा आगामी दो सितंबर को आहुत राष्ट्रीय हड़ताल के समर्थन में मंगलवार को जैक के बैनर तले सोदपुर एरिया अंतर्गत बैजडीह कोलियरी परिसर में सभा की गयी. मुख्य वक्ताओं में सीएमयू (इंटक) के पी मसी, जितेंद्र सिंह, नव कुमार बाउरी, सीएमएस (एटक) के जानकी साव, रामदेव पासवान, सीएमएसआइ (सीटू) के सुदर्शन प्रसाद, टीयूसीसी के बलराम प्रसाद, बजरंगी नोनिया आदि शामिल थे.
यूनियन नेतआों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार श्रमिक विरोधी नीतियां अख्तियार कर रही है. श्रमिकों के हित में कोई कानून बनाने के बजाय पहले से बने कानूनों को संशोधित कर उनके अधिकार छिने जा रहे हैं. यूनियनों की आपत्ति के बावजूद सातवां वेतन समझौता लागूकर दिया गया. कोयला श्रमिकों के लिए वेतन समझौते की अवधि 31 जुलाई को ही समाप्त हो गयी. नये वेतनमान के अनुरुप वेतन मिलना चाहिए था.
कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि अवधि समाप्त होने के पहो ही नया वेतन समझौता हो जायेगा. लेकिन अभी तक जेबीसीसीआइ का ही गठन नहीं हो सका है. समझौता कबहोगा, किसी को जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि कोयला उद्योग का निजीकरण किया जा रहा है. निजी कंपनियों को बाजार में कोयला बेचने की अनुमति दे दी गयी है. अधिसंख्य कार्य ठेकेदारों के माध्यम से हो रहे है. यही स्थिति रही तो इसीएल सहित कोल इंडिया लिमिटेड का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा.
उन्होंने कहा कि बीमार राष्ट्रीय कंपनियों का उद्धार करने के बजाय उन्हें बंद किया जा रहा है.
ताकि उन्हें निजी मालिकों को सौंपा जा सके. महंगाई पर कोई काबू नहीं लग सका हैय. मनरेगा मद में कटौती कर दी गयी है. ठेका श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी या तो है ही नहीं, या है तो वह उन्हें नहीं मिलती. उन्होंने ठेका श्रमिकों को प्रति माह 12 हजार रुपये वेतन न्यूनतम भुगतान करने की मांग की. उन्होंने कहा कि मांगों के फक्ष में दो सितंबर की हड़ताल जरूरी है.
इधर नियामतपुर मोड़ के समीप वामपंथी पार्टियों ने दो सितंबर की हड़ताल सफल बनाने के लिए राज्य सरकार की अराजकता के विरोध में सभा की. मौके पर कुल्टी माकपा जोनल कमेटी के सचिव सागर मुखर्जी, रफत परवेज, निशार अहमद अंसारी, देवआनंद प्रसाद, एम मुखर्जी आदि उपस्थित थे.
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