होती तत्परता तो शायद बच जाती जान

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लापरवाही. स्कूली छात्र के लापता होने की शिकायत गंभीरता से नहीं ली पुलिस ने हीरापुर थाना अंतर्गत करीमडंगाल मंडलपाड़ा निवासी व स्कूली छात्र शिवनाथ बागदी के लापता होने की शिकायत को यदि गंभीरता से लिया गया होता तो शायद उसकी हत्या का परिणाम सामने नहीं आता. मृतक के परिजनों का आरोप है कि गरीब होने […]

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लापरवाही. स्कूली छात्र के लापता होने की शिकायत गंभीरता से नहीं ली पुलिस ने
हीरापुर थाना अंतर्गत करीमडंगाल मंडलपाड़ा निवासी व स्कूली छात्र शिवनाथ बागदी के लापता होने की शिकायत को यदि गंभीरता से लिया गया होता तो शायद उसकी हत्या का परिणाम सामने नहीं आता. मृतक के परिजनों का आरोप है कि गरीब होने के कारण ही उनकी शिकायत को अधिक महत्व नहीं दिया गया. इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल लग गया है.
बर्नपुर. हीरापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत करीमडंगाल-मंडलपाड़ा से पिछले 19 अप्रैल को लापता हुए 10 वर्षीय स्कूली बच्चे शिवनाथ बागदी के शव की बरामदगी श्यामडीह ग्राम के एक कुआं से होने के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगा है. मृतक के पिता देवाशीष बागदी व मां दीपाली बागदी ने कहा कि यदि पुलिस ने तत्परता बरती होती तो शायद उसके कलेजे के टुक ड़ेकी परिणति यह नहीं हुयी होती.
हिरासत में लेने के बाद छोड़ा था: बीते 19 अप्रैल को टय़ूशन से लौटने के बाद वह अपना बैग घर में रख कर चला गया था. दूसरे के घर में नौकरानी का कार्य करनेवाली उसकी मां घर पर नहीं थी. लेकिन जब वह घर लौटी और शिवनाथ की तलाश शुरू की तो उसे पता चल गया कि वासिम खान उसे अपने साथ लेकर गया है. देवाशीष को भी यही सूचना मिली. उस समय वसीम घर में नहीं था. दो बजे के बाद वह अपने घर लौटा. बागची दंपती ने जब उससे अपने बेटे के बारे में पूछा तो उसने शिवनाथ के अपने साथ होने से साफ इंकार कर दिया. इसके बाद थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करायी गयी. परिजनों ने वसीम पर संदेह जताते हुए पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की. बाद में कोई साक्ष्य नहीं मिलने के आधार पर उसे रिलीज कर दिया गया.
मंगलवार को शव मिलने व जनाक्रोश भड़कने पर उसे गिरफ्तार किया गया.
वासिम के साथ पहले का विवाद: देवाशीष का कहना है कि काफी समय पहले उसका किसी मुद्दे पर वासिम के साथ विवाद हुआ था. उसी समय वासिम ने अपने मकानमालिक सहित कई लोगों को कहा था कि वह बदला लेकर रहेगा. इन दिनों वह शिवनाथ से काफी घुलमिल गया था. उसने आशंका जतायी कि उसे मिठाई या अन्य कोई प्रलोभन देकर वासिम अपने साथ लेकर गया होगा तथा उसकी हत्या कर शव को बोरे में बंद कर फेंक दिया होगा. यदि पुलिस ने पहली ही बार उससे क ड़ाई से पूछताछ की होती तो शायद इस मामले का खुलासा हो जाता और उसके बेटे की जान बच जाती.
खुद को निर्दोष बता रहा वासिम: इधर इस मामले में गिरफ्तार वासिम का कहना है कि उसका इस हत्याकांड से कुछ लेना-देना नहीं है. देवाशीष के साथ उसके अच्छे संबंध थे. थोड़ा विवाद हर किसी के साथ होता है.
लेकिन वह विवाद इतना गहरा नहीं था कि वह उसके बेटे की हत्या कर देता. उससे पहले भी पुलिस ने पूछताछ की थी. उस समय भी उसने पूरी सच्चाई बता दी थी तथा उसके खिलाफ कोई साक्ष्य न मिलने पर ही उसे रिहा किया गया था. उसने कहा कि शोक संतप्त परिवार के प्रति उसकी पूरी संवेदना है. पुलिस निष्पक्षता से जांच करें तो सच्चाई सामने आ जायेगी.
मिले साक्ष्य होंगे महत्वपूर्ण: जानकारों के अनुसार इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण साबित होगा. उससे शिवनाथ की हत्या के तरीके व समय की भी जानकारी मिलेगी. इसके साथ ही जिस बोरे से उसका शव मिला है, उसकी भी जांच गंभीरता से होनी चाहिए.
देवाशीष की माली हालत ऐसी नहीं है कि फिरौती के लिए अपहरण कर उसकी हत्या की गयी हो. निश्चित तौर पर व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण उसकी हत्या की गयी होगी या फिर उसने कुछ ऐसा देख लिया होगा या उसे किसी ऐसी बात की जानकारी हो गयी होगी, जिसके सार्वजनिक होने से किसी को सामाजिक हानि हो सकती है. इस कारण से भी उसकी हत्या हो सकती है. फिलहाल पुलिस के लिए यह हत्याकांड चुनौतीपूर्ण साबित होगा.
शव को मुर्शिदाबाद ले जाने का था दबाव: मृतक के दादा दादी मुर्शिदाबाद जिले के खयरासोल के रहने वाले है. सूचना मिलने के बाद उन्होंने बच्चे के शव को मुर्शिदाबाद लाने की जिद करने लगें. पुलिस से शव मुर्शिदाबाद भेजने में सहयोग का आश्वासन दिया. लेकिन स्थानीय निवासियों ने कहा कि शव की स्थिति बदतर है.
उसका दाह संस्कार बर्नपुर में कर देना उचित होगा. इसके बाद शव को दामोदर नदी के रिवर साइड श्मशान ले जाया गया. वहां उसका दाह संस्कार किया गया.
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