आसनसोल का पारा 44 डिग्री के पार

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आगामी 72 घंटों तक नहीं मिलेगी दक्षिण बंगाल को गरमी से राहत बंगाल की खाड़ी की नमी शिफ्ट कर गयी बांग्लादेश, नॉर्थ इस्ट हिमालयन में मौसम विभाग के अनुसार तीन दिनों तक बारिश होने के नहीं दिख रहे आसार आसनसोल : कोयलांचल सहित पूरा दक्षिण बंगाल भीषण गरमी की चपेट में है. आसनसोल का पारा […]

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आगामी 72 घंटों तक नहीं मिलेगी दक्षिण बंगाल को गरमी से राहत
बंगाल की खाड़ी की नमी शिफ्ट कर गयी बांग्लादेश, नॉर्थ इस्ट हिमालयन में
मौसम विभाग के अनुसार तीन दिनों तक बारिश होने के नहीं दिख रहे आसार
आसनसोल : कोयलांचल सहित पूरा दक्षिण बंगाल भीषण गरमी की चपेट में है. आसनसोल का पारा 44.7 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है. मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी के परिवेश में नमी नहीं रहने से बारिश के लिए बादल नहीं बन पा रहे हैं. इस स्थिति में गरमी व लू से बचने के अलावा और कोई विकल्प नहीं दिख रहा है.
आसनसोल. आगामी 72 घंटों तक आसनसोल सहित पूरे दक्षिण बंगाल को भीषण गरमी व तेज लू से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है. आसनसोल का तापमान 44.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. आमतौर पर पिछले कई वर्षो में यह तापमान मई माह के पहले या दूसरे सप्ताह में पहुंचता था. रीजनल मेटियोरोलोजिकल सेंटर (आरएमसी) के अनुसार गर्मी में और इजाफा होगा क्योंकि आगामी दो दिनों तक बारिश की कोई संभावना दूर-दूर तक नहीं दिख रही है.
आरएमसी के वरीय अधिकारियों के अनुसार आसनसोल सहित पूरे बर्दवान, बांकु ड़ा, वीरभूम, पुरुलिया, मालदा व मुर्शिदाबाद जिलों में यही स्थिति बनी हुयी है. गरमी के कारण दक्षिण बंगाल में मृतकों की संख्या आधा दर्जन से अधिक हो गयी है. उन्होंने कहा कि बंगाल की खाड़ी में मौजूद परिवेश की नमी बांग्लादेश तथा उत्तरी-पूर्वी हिमालयन क्षेत्रों की ओर शिफ्ट हो गयी है. इस कारण उधर बारिश हो सकती है. इसके कारण पश्चिम बंगाल के क्षेत्रों में परिवेश सूख गया है. नमी नहीं होने के कारण बारिश के बादल नहीं बन पा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह के अंत तक बारिश के आसार बन सकते हैं. हालांकि इसकी भी संभावना काफी अधिक नहीं है. गंगीय तट में बारिश की संभावना न के बराबर है, क्योंकि हिमालयन क्षेत्र में बारिश होने की संभावना है.
इधर बढ़ती गरमी के कारण आसनसोल शहर सहित कोयलांचल में आम जन जीवन अस्त-व्यस्त होने लगा है. लू लगने के साथ-साथ खई बीमारियों के लक्षण दिखने लगे है. खासकर पेट संबंधित बीमारियां अधिक शुरू हो गयी हैं. पेट में ऐंठन के साथ-साथ लू लगने पर तेज बुखार, गला सूखने, सरदी-गरमी होने पर नाक से पानी आना, आंखों का लाल होना शुरू हो गया है.
चिकित्सकों ने इस धूप से बचने की सलाह दी है. उनके अनुसार सर्वाधिक पाच्य वाले सामग्रियों का सेवन करना चाहिए तथा अधिक से अधिक पानी का सेवन किया जाये. इससे डीहाइड्रेशन से मुक्ति मिलेगी.
थोड़े-थोड़े अंतराल पर करें हल्का भोजन: चिकित्सक डॉ प्रशांत सरकार की माने तो गरमी के मौसम में शरीर का पानी सबसे ज्यादा सूखता है. ऐसे में शरीर को चुस्त दुरुस्त रखने के लिये पेय पदार्थो का सेवन लाभकारी साबित होगा. इस मौसम में लू शरीर को ज्यादा प्रभावित करता है.
इससे बचने के लिये ग्लोनाइन का सेवन किया जा सकता है. चीनी-नींबू व नमक का घोल पीते रहना चाहिए. नॉर्मल पानी, जीरा की छाछ, जूस व फल का अधिक सेवन करना चाहिए. गरमी में बच्चों को बचाकर रखना जरूरी है. बच्चों की नरम त्वचा गर्म हवा व लू के थपेड़े को बरदाश्त नहीं कर पाती. समय -समय पर बच्चों को पानी नहीं मिला तो उनकी सेहत प्रभावित हो सकती है. ऐसे में पेट में दर्द, शरीर में ऐंठन, दस्त व कै(उल्टी) की शिकायत हो सकती है. बुखार भी आ सकता है.
ऐसे में बच्चों को ज्यादा ज्यादा पानी देना चाहिए. ओआरएस का घोल व पारासिटामोल दवा का भी प्रयोग करना चाहिए.
गरमी में लू लगने, डीहाइड्रेशन , शरीर में दर्द आदि बीमारियों के अलावा पसीने के कारण चर्म रोग की भी आशंका बनी रहती है. ऐसे में थोड़े थोड़े अंतराल पर हल्का व ताजा भेजन लेना चाहिए. कभी भी खाली पेट नहीं रहना चाहिए. दही, मट्ठा, जली जीरा व नींबू पानी आदि तरल पदार्थ अधिक सेवन करना चाहिए. ओआरएस व अमझोरा सबसे ज्यादा फायदेमंद रहेगा.
आसनसोल : आसनसोल आश्रम मोड़ स्थित शनि मंदिर परिसर में शनिवार को वरुण देवता को प्रसन्न करने के लिये यज्ञ का आयोजन किया गया. जिसमें पंडित तुलसी तिवारी, साधु नाथ, मोनालिसा नाथ सह अनेक भक्त शामिल थे. पंडित श्री तिवारी ने कहा कि इस भीषण गरमी के प्रकोप से इंसान सहित पशु पक्षी भी काफी परेशान है. वरुण देवता को प्रसन्न करने के लिये यज्ञ किया जा रहा है. वरुण देवता के प्रसन्न होने से वर्षा हो सकती है. इससे काफी राहत मिलेगी. इस भीषण गरमी के क ारण दोपहर में सड़कें सुनसान हो जाती है.
मजदूर लोग इस भीषण गरमी में प्रकृति का कहर ङोल रहे है. कार्यालयो से बाहर काम करने वाले दोपहर में गरमी के कारण बाहर नहीं निकल पा रहे है. कई स्थानों पर सूखा पड़ गया है. प्रकृति के प्रकोप को वरुण देव ही शांत कर सकते है. सभी श्रद्धालु मिल कर वरुण देव को प्रसन्न करने वाले इस यज्ञ में पूर्ण आहुति दी. उन्होंने कहा कि वरुण देव को पूर्ण आहुति देकर बारिश होने की विनती की गयी. पानी के अभाव में जल स्तर नीचे चला गया है तथा जलाशय सूख चुके है.
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