पुलों की खस्ता हालत पर मांग रहे जवाब
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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फ्लाइओवर हादसे के बाद से आसनसोल में भी लोग हैं भयभीत मुश्ताक खान आसनसोल : आमतौर पर चुनाव विकास व भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे, सरकार के कामकाज, राजनीतिक दलों के वादे और उम्मीदवारों की छवि व इमेज पर लड़े जाते हैं, पर इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव में पुल व फ्लाईओवर भी चुनावी मुद्दे […]
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फ्लाइओवर हादसे के बाद से आसनसोल में भी लोग हैं भयभीत
मुश्ताक खान
आसनसोल : आमतौर पर चुनाव विकास व भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे, सरकार के कामकाज, राजनीतिक दलों के वादे और उम्मीदवारों की छवि व इमेज पर लड़े जाते हैं, पर इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव में पुल व फ्लाईओवर भी चुनावी मुद्दे बन चुके हैं.
31 मार्च को उत्तरी कोलकाता के पोस्ता इलाके में निर्माणाधीन विवेकानंद फ्लाईओवर का एक बड़ा हिस्सा गिरने की घटना ने 28लोगों की जान ले ली, जबकि बड़ी संख्या में घायल हुए लोग अभी भी विभिन्न अस्पतालों में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं. चुनाव के इस माहौल में इस हादसे ने इतनी सुर्खियां बटोरी कि आज पुलों और फ्लाईओवरों की हालत एक बड़े मुद्दे का रूप धारण कर चुकी है, जनता नेताओं से अपने-अपने इलाक़ों के पुल व फ्लाईओवर की मरम्मत का हिसाब मांग रही हैं.
राजधानी कोलकाता के बाद राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर आसनसोल भी इस स्थिति से अछूता नहीं है. यहां के मतदाता भी सभी दलों के उम्मीदवारों से शहर के पुलों की मरम्मत की मांग जोरदार तरीके से कर रहे हैं. आसनसोल शहर में दो काफी पुराने पुल हैं.
लोहा पुल और सिद्दीकी सेतु की उम्र 100 वर्ष से अधिक हो चुकी है. जाहिर सी बात है कि शहर के रेलपार इलाके में स्थित इन पुलों की हालत बेहद खराब है.
रेलपार इलाका निवासी सत्येंद्र साव का कहना है कि कोलकाता की घटना के बाद इन पुलों पर गुज़रते वक़्त दिल दहल उठता है. नसीम उद्दीन नामक एक अन्य शख्श का कहना है कि इन पुलों पर से गुज़रते वक़्त अपने आप जबान पर ऊपरवाले का नाम आ जाता है.
लोहा पुल गाडुई नदी के ऊपर बना है. देखभाल और मरम्मत के अभाव में इसका हाल बेहाल हो चुका है. बड़ी-बड़ी गाड़ियां इस पुल से गुज़रती है, पर इसके दोनों ओर कोई गार्डवाल तक नहीं है. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इस पुल की मरम्मत की मांग की जाने के बावजूद प्रशासन ने कभी भी इस ओर ध्यान नहीं दिया, जिसका खमियाज़ा हमें ही भुगतना पड़ेगा.
लोहा पुल से थोड़ी दूरी पर लोहे के बड़े-बड़े प्लेट से बना सिद्दीकी सेतु है, जिससे रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं. बेहद प्राचीन इस पुल के बीच में दरारें तक पड़ चुकी हैं. पुल का ढांचा तक जर्जर होने लगा है. इससे गुजरते समय ऐसा लगता है कि जैसे पुल डोल रहा है.
इन पुलों की ये खस्ता हालत इस चुनाव में एक मुद्दा बन चुकी है. मतदाता उम्मीदवारों के सामने अन्य मांगों के साथ पुलों की मरम्मत की मांग भी रख रहे हैं.
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