पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा इसीएल का उत्पादन

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सांकतोड़िया : चालू वर्ष 2015-16 में इसीएल उत्पादन लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी. वित्तीय वर्ष 2015-16 में कंपनी को वार्षिक उत्पादन लक्ष्य 42.13 मिलियन टन दिया गया था जिसमें 40.21 मिलियन टन ही उत्पादन हो सका. अद्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) के तकनीकी सचिव निलाद्री राय ने कहा कि उत्पादन लक्ष्य हासिल नहीं होने के […]

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सांकतोड़िया : चालू वर्ष 2015-16 में इसीएल उत्पादन लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी. वित्तीय वर्ष 2015-16 में कंपनी को वार्षिक उत्पादन लक्ष्य 42.13 मिलियन टन दिया गया था जिसमें 40.21 मिलियन टन ही उत्पादन हो सका. अद्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) के तकनीकी सचिव निलाद्री राय ने कहा कि उत्पादन लक्ष्य हासिल नहीं होने के बाद भी पिछले वर्ष की तुलना में 0.51 प्रतिशत ज्यादा उत्पादन हुआ है. डिसपैच में भी 0.2 प्रतिशत का ग्रोथ है.
सबसे ज्यादा ग्रोथ 27.2 फीसदी अधिभार हटाने में है. श्री राय ने कहा कि उत्पादन लक्ष्य हासिल किया जा सकता था . लेकिन पावर प्लांटों में कोयले की मांग अचानक कम हो गयी. जिसके कारण उत्पादन में थोड़ी कमी लानी पड़ी. चालू वित्तीय वर्ष 2016-17 में कंपनी को वार्षिक उत्पादन लक्ष्य 46.94 मिलियन टन दिया गया है. इसे प्राप्त करने के लिये तैयारी शुरू हो गयी है. कोल इंडिया को वर्ष 2019-20 तक उत्पादन लक्ष्य एक बिलियन टन दिया गया है. जिसमें इसीएल को 62 मिलियन टन की भागीदारी निभानी है.
उन्होंने कहा कि पावर प्लांटों ने कोयला खरीदने से मना कर दिया जिसके कारण कंपनी के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है. फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट के तहत ही कंपनी साल भर का लक्ष्य बना कर कोयले का उत्पादन करती है.
उन्होंने कहा कि तीन कारणों से उत्पादन प्रभावित हुआ. बारिश के कारण खुली खदानें ज्यादा प्रभावित हुयी. गत वर्ष की अपेक्षा चालू वर्ष में 400 मिलीमीटर ज्यादा बारिश हुयी. राजमहल परियोजना एवं सोनपुर बाजारी परियोजना में जमीन अधिग्रहण को लेकर उत्पादन बाधित हुआ.
कोयले की मांग में कमी होना भी कारण बना. कंपनी वर्ष 2019-20 तक के मिशन को पूरा करने को लेकर कंपनी ज्यादा फोकस दे रही है. नये-नये पैच खोले जा रहे है. खुली खदानें एवं भूमिगत खदानों में नयी तकनीक लगायी जा रही है. ताकि उत्पादन में बढ़ोतरी हो. धीरे धीरे मैन पावर की संख्या घटती जा रही है. वैसे स्थिति में मशीनीकरण करना जरूरी हो गया है.
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