शवों को जलाने के बाद जल संकट

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आसनसोल : डीवीसी के पंचेत व मैथन जलाशयों से जल निकासी में हो रही 50 फीसदी कटौती के कारण दामोदर नदी में जल स्तर काफी नीचे चला गया है. इसके कारण दामोदर नदी का बहाव बीच में केंद्रित हो गया है. काला झरिया स्थित श्मशान घाट के पास पानी की धारा नहीं है. इस कारण […]

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आसनसोल : डीवीसी के पंचेत व मैथन जलाशयों से जल निकासी में हो रही 50 फीसदी कटौती के कारण दामोदर नदी में जल स्तर काफी नीचे चला गया है. इसके कारण दामोदर नदी का बहाव बीच में केंद्रित हो गया है.
काला झरिया स्थित श्मशान घाट के पास पानी की धारा नहीं है. इस कारण शवों के दाह संस्कार की प्रक्रिया में काफी परेशानी हो रही है. सुविधा के लिए नदी के किनारे बालू को घेर कर तालाब का रूप दे दिया गया है. लेकिन उसमें भी काफी गंदगी है. विसजिर्त मूत्तिर्यों के अवशेष के कारण दलदल बन गया है. पानी सड़ गया है.
सनद रहे कि डीवीसी के इन दो जलाशयों में जल स्तर कम होने के कारण केंद्रीय जल आयोग के निर्देश पर डीवीसी ने अपने इन दो जलाशयों से होनेवाली जल निकासी में 50 फीसदी की कटौती बीते 15 दिसंबर से शुरू कर दी है. बीते मानसून में पर्याप्त बारिश न होने के कारण नदी में पहले से ही जल का स्तर काफी कम था. जल निकासी कटौती में स्थिति काफी बदतर होती जा रही है. कालाझरिया श्मशान घाट से दामोदर नदी की धारा सात सौ मीटर दूर चली गयी है. श्मशान के पास बालू खोद कर एक कुंड का रूप दे दिया गया है.
श्मशान घाट पर शवों को जलाने के बाद उसे बुझाने के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है. कुछ क्षेत्रों में शव के एक मामूली हिस्से को नदी में प्रवाहित करने की भी परंपरा है. लेकिन किनारे पानी न होने के कारण शवों को बुझाने में काफी परेशानी होती है. इसके साथ ही पानी की कम मात्र होने के कारण शव जलने के बाद बनी राख भी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाती है. शव के छोटे हिस्से को यदि उस पानी में फेंका जाता है तो वह बहाव नहीं होने के कारण वहीं जमा हो जाता है तथा पानी में सड़ जाता है. इसके कारण काफी बदबू आती है.
शव का दाह संस्कार करने आये निवासियों ने बताया कि शव जलाने के बाद उसका निबंधन आसनसोल नगर निगम के स्तर से होता है. आसनसोल नगर निगम के स्तर से वहां बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध करायी गयी है. इस स्थिति में नगर निगम का ही यह दायित्व बनता है कि श्मशान घाट के किनारे पानी की व्यवस्था करें.
इसके लिए काला झरिया के पश्चिमी इलाके में ही दामोदर नदी की धारा को मोड़ना होगा. इसके लिए बालू की कटाई करने के साथ ही बांध भी बनाना होगा. परेशानी की बात है कि आम नागरिक नियमित रूप से श्मशान घाट आते नहीं है. शव के दाह संस्कार के समय परेशआनी से जूझते हैं तथा लौटने के बाद यह समस्या उनके लिए बेमायने हो जाती है. इस कारण इस समस्या के समाधान की पहल नहीं हो रही है.
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